पाकिस्तान में धार्मिक उन्माद और हिंसा
पाकिस्तान में एक बार फिर ईशनिंदा के आरोपों ने धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाहौर से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित शेखूपुरा जिले के घरियाल कलां गांव में हुई एक हिंसक घटना में ईसाई समुदाय के लोगों को अपना घर-बार छोड़कर भागने पर मजबूर होना पड़ा। यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर साझा की गई एक कथित आपत्तिजनक सामग्री से शुरू हुआ, जिसके बाद वहां का माहौल तेजी से बिगड़ गया।
मस्जिद से भीड़ जुटाने का आह्वान
पुलिस के अनुसार, इस मामले में आरोपी की पहचान 40 वर्षीय कामरान गुल मसीह के रूप में हुई है। उस पर सोशल मीडिया पर ईशनिंदा से संबंधित सामग्री फैलाने का आरोप है। पुलिस अधिकारी जुबैर अब्बास ने जानकारी दी कि कामरान गुल मसीह को हिरासत में ले लिया गया है और उसकी जान बचाने के लिए उसे किसी सुरक्षित स्थान पर रखा गया है, क्योंकि वहां मौजूद उग्र भीड़ उसके लिए बड़ा खतरा बन गई थी। तनाव तब और बढ़ गया जब एक स्थानीय मस्जिद से लोगों को कामरान के घर के बाहर एकत्र होने के लिए लाउडस्पीकर के जरिए घोषणा की गई। देखते ही देखते वहां भारी भीड़ जमा हो गई। गुस्साए लोगों ने सबसे पहले मसीह के रिहायशी मकान को निशाना बनाया और उसमें आग लगा दी। इसके बाद भीड़ ने उसकी फार्मेसी को भी पूरी तरह से जलाकर खाक कर दिया। इस घटना की जानकारी मिलते ही गांव में रह रहे अन्य ईसाई परिवार अपनी जान बचाने के लिए वहां से सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन कर गए।
35 से अधिक ईसाई परिवारों का पलायन
पुलिस अधिकारी जुबैर अब्बास ने बताया कि इस खौफनाक मंजर के बाद कुल 35 से अधिक ईसाई परिवारों ने अपने घरों से पलायन किया है। घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व में सुरक्षाबलों की टीम ने मौके पर पहुंचकर हालात को नियंत्रित किया। पुलिस ने आरोपी कामरान गुल मसीह के खिलाफ पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 295-C के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। यह कानून पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी या कार्य से जुड़े मामलों में इस्तेमाल किया जाता है, जो पाकिस्तान में बेहद गंभीर माना जाता है।
फेसबुक वीडियो से शुरू हुआ विवाद
पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार, शिकायतकर्ता रईस अहमद ने बताया कि वे अन्य पुलिस कर्मियों के साथ इलाके में गश्त पर थे। इसी दौरान उन्हें सूचना मिली कि कामरान गुल मसीह ने फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट किया है। आरोप है कि यह वीडियो एक दिन पहले जॉन शाकी नामक यूजर द्वारा अपलोड किया गया था। पुलिस अधिकारियों ने अपनी जांच के दौरान उस वीडियो को मोबाइल फोन पर डाउनलोड किया और फिर गवाहों की मौजूदगी में उसे एक यूएसबी ड्राइव में सुरक्षित ट्रांसफर कर सील कर दिया। सबूत के तौर पर पुलिस ने वीडियो के स्क्रीनशॉट भी अपने कब्जे में लिए हैं।
आगजनी के खिलाफ भी अलग कार्रवाई
मसीह के खिलाफ मामला दर्ज करने के साथ ही, पुलिस ने तोड़फोड़ और आगजनी करने वाली भीड़ के विरुद्ध भी एक अलग प्राथमिकी दर्ज की है। इस मामले में पुलिस ने 5 लोगों को नामजद किया है, जबकि कई अन्य अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। हालांकि पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई का दावा किया है, लेकिन इस घटना के बाद इलाके के अल्पसंख्यकों में भारी भय का वातावरण है।
अल्पसंख्यकों पर हमलों का लंबा इतिहास
पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर ईसाइयों और हिंदुओं को अक्सर भेदभाव और कट्टरपंथी समूहों की धमकियों का सामना करना पड़ता है। ईशनिंदा का मुद्दा वहां इतना संवेदनशील है कि अक्सर बिना किसी न्यायिक जांच के ही भीड़ कानून अपने हाथ में ले लेती है। कई बार ऐसी घटनाओं में आरोपी को अदालत का सामना करने का मौका भी नहीं मिलता और उससे पहले ही भीड़ उसे मार डालती है। साल 2021 में सियालकोट के औद्योगिक क्षेत्र में हुई एक घटना आज भी सबको झकझोर देती है, जहां भीड़ ने ईशनिंदा के शक में एक श्रीलंकाई नागरिक की निर्मम हत्या कर दी थी। इन लगातार हो रही घटनाओं ने पाकिस्तान में मानवाधिकारों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल खड़े किए हैं।
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