रूस और अमेरिका के बीच डीजल डील पर मचा घमासान, यूक्रेन में रूसी मिसाइल हमले से 20 लोगों की मौत

रूस से डीजल आयात करने के अमेरिकी फैसले ने वैश्विक राजनीति में खलबली मचा दी है, जिससे नाराज यूक्रेन ने रूस पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं। इस बीच, रूस के जवाबी मिसाइल हमलों में यूक्रेन के ज़पोरिजिया क्षेत्र में 20 लोगों की जान चली गई है।

पुतिन और ट्रंप की डीजल डील से बढ़ा तनाव

रूस और अमेरिका के बीच एक बड़े समझौते की खबर सामने आई है, जिसके तहत व्लादिमीर पुतिन अमेरिका को 30 लाख टन डीजल की आपूर्ति करेंगे। इस डील के तहत रूस से 3 लाख टन डीजल की पहली खेप अगले एक या दो दिनों में अमेरिका पहुंच जाएगी। इस समझौते ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की को गहरे संकट में डाल दिया है। जेलेंस्की ने डोनाल्ड ट्रंप को धोखेबाज करार देते हुए इस सौदे का खुलकर विरोध किया है। डील से बौखलाए यूक्रेन ने रूसी रिफाइनरियों और तेल टर्मिनल पर अपने हमलों को तेज कर दिया है और लंबी दूरी के ड्रोन्स का इस्तेमाल करते हुए रूस की तीन प्रमुख रिफाइनरियों को निशाना बनाया है।

यूक्रेन पर रूस का घातक पलटवार

यूक्रेन के हमलों का जवाब देते हुए रूस ने जबरदस्त पलटवार किया है। रूसी सेना ने यूक्रेन के विभिन्न प्रांतों में मिसाइल और ड्रोन की बौछार कर दी है। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, ज़पोरिजिया क्षेत्र में हुए इन हमलों ने भयंकर तबाही मचाई है, जिसमें 20 लोगों की मौत हो गई है और 18 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। रूस ने इस दौरान एक और बड़ा दावा करते हुए कहा है कि प्रतिबंधों के बावजूद यूरोपीय संघ के देशों ने 2026 में 2025 की तुलना में अधिक एलएनजी खरीदी है। इस बदलती स्थिति के कारण जेलेंस्की के लिए यह तय करना मुश्किल हो गया है कि वे युद्ध जारी रखें या मास्को जाकर पुतिन के साथ किसी तरह की शांति वार्ता करें।

ट्रंप ने तोड़ा अपना वादा

डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले ने सबको हैरान कर दिया है क्योंकि वे अपने पूर्ववर्ती वादे से पूरी तरह पलट गए हैं। 16 सितंबर को ट्रंप प्रशासन ने लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग एक्ट 2026 पारित किया था, लेकिन केवल 24 दिनों के भीतर ही वे इस नीति से पीछे हट गए और खुद रूसी तेल खरीदने की घोषणा कर दी। यूक्रेन के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से डीजल खरीदकर ट्रंप पुतिन के लिए आर्थिक सहारा यानी 'एटीएम' बन गए हैं।

यूरोप की नाराजगी और नाटो के लिए खतरा

ट्रंप और पुतिन की इस डीजल डील से पूरा यूरोप सकते में है। इस घटनाक्रम के बाद अमेरिका और नाटो सहयोगियों के बीच दरार पड़ने का खतरा गहरा गया है। ट्रंप पर आरोप है कि उन्होंने अपने स्वार्थ के लिए जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, डेनमार्क, फिनलैंड और पोलैंड जैसे देशों को अंधेरे में रखा। एक तरफ ट्रंप इन देशों पर अपने तेल भंडार से डीजल जारी करने का दबाव बना रहे थे और रूस से ईंधन न खरीदने की नसीहत दे रहे थे, वहीं दूसरी ओर वे खुद रूस के साथ गुप्त सौदेबाजी में लगे थे।

डीजल डील का पूरा गणित और समयसीमा

रूस और अमेरिका के बीच यह करार कुल सात महीने की अवधि के लिए किया गया है। ट्रंप सरकार ने रूसी डीजल पर लगी पाबंदियों को 7 अप्रैल 2027 तक हटा लिया है। खरीद की योजना के अनुसार, अक्टूबर में 3 लाख टन, नवंबर में 5 लाख टन और दिसंबर में 10 लाख टन डीजल अमेरिका पहुंचेगा। अगले साल अप्रैल तक कुल 30 लाख टन डीजल की आपूर्ति का लक्ष्य रखा गया है।

मिड टर्म चुनाव में ट्रंप की रणनीति

इस फैसले के पीछे का मुख्य कारण घरेलू राजनीति माना जा रहा है। ईरान के साथ संघर्ष शुरू होने से पहले अमेरिका में डीजल की कीमत 3.70 डॉलर प्रति गैलन थी, जो अब बढ़कर 6.28 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच चुकी है। अमेरिकी किसान, ट्रक चालक और बड़ी कंपनियां डीजल की बढ़ती कीमतों से त्रस्त हैं। ट्रंप को डर है कि अगर डीजल के दाम काबू में नहीं आए तो उन्हें मिड टर्म चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ सकता है।

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