सिक्की घास ने बदली छपरा की महिलाओं की किस्मत, घर बैठे कर रहीं हजारों की कमाई

छपरा के ग्रामीण इलाकों में महिलाएं जीविका परियोजना की मदद से सिक्की घास से बेहतरीन हस्तशिल्प उत्पाद बना रही हैं। स्थानीय मेलों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए इन उत्पादों की भारी मांग है, जिससे महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।

छपरा की महिलाओं का नया हुनर

बिहार के छपरा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अब महिलाएं अपनी कलाकारी के जरिए रोजगार की नई राहें खोल रही हैं। जीविका परियोजना से जुड़कर ये महिलाएं सिक्की घास से सुंदर और आकर्षक हस्तशिल्प उत्पाद तैयार कर रही हैं। इस अनोखी कला को न केवल पहचान मिल रही है, बल्कि बाजार में इसकी बढ़ती मांग ने सैकड़ों बेरोजगार महिलाओं के लिए आय का जरिया भी बना दिया है। सारण जिले में हजारों ऐसी महिलाएं हैं जो अपनी हाथों की कारीगरी के लिए जानी जाती हैं, और अब वे इस हुनर का उपयोग अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने में कर रही हैं।

बरेजा गांव की महिलाओं की मेहनत

छपरा के मांझी प्रखंड अंतर्गत आने वाले बरेजा गांव में दो दर्जन से अधिक महिलाएं इस मुहिम में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। ये महिलाएं अपनी मेहनत और रचनात्मकता के दम पर सिक्की घास से बनी वस्तुओं को नई ऊंचाई पर ले जा रही हैं। इनका उद्देश्य अपनी कला को बड़े शहरों तक पहुंचाना है। ये महिलाएं समय-समय पर बड़े शहरों में आयोजित होने वाले मेलों में स्टॉल लगाती हैं, जहां उनके द्वारा बनाए गए उत्पादों को हाथों-हाथ लिया जाता है। सरकार भी जीविका के माध्यम से इन महिलाओं को हर संभव मंच और सहायता प्रदान कर रही है, ताकि उनकी कलाकारी को उचित सम्मान और मूल्य मिल सके।

मेले और ऑनलाइन मार्केट का सहारा

इन महिलाओं को अपनी कला प्रदर्शित करने के लिए पटना का सरस मेला और विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेला जैसे बड़े मंच उपलब्ध कराए जाते हैं। इन आयोजनों में स्टॉल लगाकर ये महिलाएं अपने उत्पाद ग्राहकों तक पहुंचाती हैं और वहां उन्हें अच्छी कीमत मिलती है। स्थानीय स्तर पर बाजार मिलने के साथ-साथ अब डिजिटल माध्यमों का उपयोग भी शुरू हो गया है। अब इनके बनाए उत्पादों की ऑनलाइन मांग भी बढ़ रही है, जिससे उनकी पहुंच दूर-दराज के इलाकों तक बन गई है।

शून्य से आत्मनिर्भरता तक का सफर

स्थानीय निवासी पुष्पा देवी, जो बरेजा पंचायत के एसजेवाई की सदस्य हैं, ने अपनी सफलता साझा करते हुए बताया कि एक समय था जब वे पूरी तरह बेरोजगार थीं। पहले उनके पास काम का कोई जरिया नहीं था और उन्हें यह भी नहीं पता था कि अपने बनाए हुए उत्पादों का व्यावसायिक उपयोग कैसे किया जा सकता है। पहले वे जो कुछ भी बनाती थीं, उसका इस्तेमाल केवल घरों में ही हो पाता था। हालांकि, जीविका से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने न केवल उत्पादों को बेचने का तरीका सीखा, बल्कि बाजार की जरूरतों को भी समझा।

उत्पाद निर्माण की प्रक्रिया और कमाई

पुष्पा देवी के अनुसार, सिक्की घास के उत्पाद तैयार करने की प्रक्रिया काफी मेहनत भरी होती है। सबसे पहले घास को जंगलों से चुनकर लाया जाता है, फिर उसे धूप में सुखाया जाता है और अंत में विभिन्न रंगों से सजाया जाता है। इसके बाद ही वे इसे आकर्षक रूप दे पाती हैं। उनके द्वारा बनाई गई वस्तुओं में मुख्य रूप से कान की बालियां, चूड़ियां, दौड़ी, हेयर बैंड और फूल-दानिया जैसी वस्तुएं शामिल हैं।

अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि अब उनका परिवार बेहतर स्थिति में है। सरकारी योजना के तहत उन्हें काम शुरू करने के लिए लोन भी उपलब्ध कराया गया है। हाल ही में हुए सरस मेले में उनकी कुल बिक्री **45 हजार** रुपये तक रही है। उन्होंने कहा कि जीविका की सहायता से वे अब न केवल अपना घर चला पा रही हैं, बल्कि खुद को एक सफल उद्यमी के रूप में भी देख रही हैं। सरकार की यह पहल उन जैसी हजारों महिलाओं के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर आई है, जो पहले आर्थिक रूप से पिछड़ी हुई थीं।

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