सस्ते कर्ज का युग अब खत्म होने के संकेत
अगर आपने हाल ही में होम लोन लिया है या लेने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। बीते साढ़े तीन वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, रिजर्व बैंक ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट में बढ़ोतरी का फैसला लिया था। उस समय अधिकतर लोगों को यह एक मामूली और एक बार की घटना लगी थी, लेकिन अब एसबीआई कैपिटल की एक नई रिपोर्ट ने स्थिति की गंभीरता को उजागर कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, रेपो रेट में की गई यह वृद्धि केवल एक शुरुआत है और आने वाले समय में कर्ज और अधिक महंगा हो सकता है।
रेपो रेट में 1 फीसदी की और वृद्धि का अनुमान
एसबीआई कैपिटल के विश्लेषण के मुताबिक, रिजर्व बैंक भविष्य में रेपो रेट में 1 फीसदी तक की और बढ़ोतरी कर सकता है। इस रिपोर्ट के पीछे मुख्य कारण बढ़ती हुई महंगाई को बताया गया है। यदि महंगाई के आंकड़े नियंत्रण से बाहर रहते हैं, तो रिजर्व बैंक के पास रेपो रेट बढ़ाने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचेगा। इसका सीधा और सबसे बड़ा असर आम ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा। वर्तमान में जो होम लोन 8 फीसदी की ब्याज दर पर उपलब्ध हैं, वे बढ़कर 9 फीसदी तक पहुंच सकते हैं।
सभी प्रकार के कर्ज होंगे महंगे
रेपो रेट में होने वाली इस संभावित बढ़ोतरी का असर केवल होम लोन तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर ऑटो लोन और अन्य सभी प्रकार के खुदरा कर्ज पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। बैंकों की फंड जुटाने की लागत बढ़ने के कारण वे सीधे तौर पर इस बोझ को ग्राहकों पर डालेंगे। यदि आप भविष्य में कोई बड़ा लोन लेने की सोच रहे हैं, तो आपको इस बढ़ती हुई ब्याज दर के लिए मानसिक और आर्थिक रूप से तैयार रहना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीने वित्तीय मोर्चे पर चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं क्योंकि महंगाई और ब्याज दरों का दोहरा दबाव आम आदमी के बजट को बिगाड़ सकता है।
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