पिता के निधन के बाद IAS सोनल गोयल ने किलिमंजारो पर फहराया तिरंगा, नशा छोड़ सपने चुनने का दिया संदेश

अक्टूबर 2023 में पिता को कैंसर से खोने के बाद 2008 बैच की आईएएस अधिकारी सोनल गोयल ने कैंसर जागरूकता अभियान शुरू किया और किलिमंजारो की 18,829 फीट ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराया।

निजी गम को बनाया सामाजिक सरोकार की ताकत

व्यक्तिगत दुख और कठिन चुनौतियों के सामने अक्सर इंसान टूट जाता है, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपने दर्द को समाज के भले के लिए एक शक्ति में बदल देते हैं। वर्ष 2008 बैच की प्रसिद्ध भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी सोनल गोयल ने भी कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश किया है। अक्टूबर 2023 में अपने पिता को कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की वजह से खोने के बाद उन्होंने इस बीमारी के खिलाफ एक व्यापक सामाजिक अभियान चलाने का संकल्प लिया। हरियाणा के पानीपत जिले से ताल्लुक रखने वाली आईएएस सोनल गोयल ने अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर तिरंगा फहराकर न केवल एक नया कीर्तिमान स्थापित किया, बल्कि दुनिया भर में कैंसर जागरूकता और युवाओं के स्वस्थ भविष्य का एक सशक्त संदेश भी दिया।

कैंसर जागरूकता और पर्वतारोहण अभियान का सफर

अपने पिता के निधन के बाद सोनल गोयल ने कैंसर जैसी बीमारी के खिलाफ लड़ाई को अपने जीवन का सबसे मुख्य सामाजिक उद्देश्य बना लिया। इस अभियान की शुरुआत उन्होंने मई 2026 में एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेक के साथ की थी। इसके बाद उन्होंने हार न मानते हुए माउंट किलिमंजारो के कठिन पर्वतरोहण अभियान की ओर अपने कदम बढ़ाए। सोनल गोयल का दृढ़ विश्वास है कि कैंसर जैसी बीमारी से जंग जीतने का सबसे बड़ा हथियार समय पर इसकी पहचान होना और जन-जन तक इसके प्रति जागरूकता पहुंचाना है। यदि शुरुआती चरण में ही बीमारी का पता चल जाए, तो अनगिनत लोगों की जान बचाई जा सकती है।

युवाओं के लिए सीधा संदेश: 'नशा नहीं, सपने चुनो'

माउंट किलिमंजारो की बर्फीली ऊंचाइयों से सोनल गोयल ने देश की युवा पीढ़ी को एक बेहद सशक्त और सीधा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को 'नशा नहीं, सपने चुनो' की राह पर चलना चाहिए। उनका मानना है कि आज का युवा ही देश का भविष्य तय करता है, इसलिए उन्हें केवल बेहतर करियर अवसर ही नहीं मिलने चाहिए, बल्कि सही और स्वस्थ रास्ता चुनने की मानसिक क्षमता भी विकसित करनी चाहिए।

अपने इस विशेष अभियान के जरिए उन्होंने निम्नलिखित प्रमुख पहलुओं पर विशेष बल दिया:

  • नशे से दूरी: युवाओं को किसी भी प्रकार के मादक पदार्थों और नशे की लत से पूरी तरह दूर रहना चाहिए ताकि उनकी ऊर्जा सही दिशा में लगे।
  • लक्ष्य पर ध्यान: जीवन में बड़े सपने देखने चाहिए और उन्हें पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगानी चाहिए।
  • शारीरिक स्वास्थ्य: नियमित फिटनेस, खेल और स्वस्थ दिनचर्या को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए।
  • सकारात्मक दृष्टिकोण: विपरीत परिस्थितियों में भी मन में सकारात्मकता और मानसिक मजबूती बनाए रखनी चाहिए।

किलिमंजारो की कठिन राह और जंगल की आग का सामना

माउंट किलिमंजारो की चढ़ाई सोनल गोयल के लिए आसान नहीं थी और इस यात्रा के दौरान उनके सामने कई गंभीर बाधाएं आईं। उन्होंने अपनी इस चुनौतीपूर्ण यात्रा की शुरुआत प्रसिद्ध लेमोशो रूट से की थी। हालांकि, यात्रा के तीसरे दिन ही शिरा क्षेत्र के आसपास के जंगलों में भयंकर आग लग गई। इस आपातकालीन स्थिति को देखते हुए सुरक्षा कारणों से पूरी टीम को बीच रास्ते से ही वापस लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा।

लेकिन इस रुकावट के बावजूद उनके इरादे डगमगाए नहीं। उन्होंने यह साबित किया कि परिस्थितियां बिगड़ने पर योजनाएं बदली जा सकती हैं, लेकिन मुख्य लक्ष्य नहीं। सोनल गोयल ने एक नए रास्ते से फिर से अपनी चढ़ाई शुरू की। यात्रा के दौरान उन्हें बरांको वॉल जैसी सीधी और खतरनाक चट्टानों को पार करना पड़ा और कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ा। तमाम मुश्किलों को मात देते हुए आखिरकार 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर वह समुद्र तल से 18,829 फीट की ऊंचाई पर स्थित स्टेला पॉइंट पर पहुंचीं और वहां गर्व से भारत का राष्ट्रध्वज फहराया।

असाधारण शैक्षणिक सफर और UPSC में AIR 13

आईएएस सोनल गोयल की सफलता की कहानी संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी कर रहे हर अभ्यर्थी के लिए एक बड़ा प्रेरणास्रोत है। दिल्ली के प्रसिद्ध श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) से स्नातक की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का मन बना लिया था। हालांकि, सिविल सेवा परीक्षा में सफलता का रास्ता आसान नहीं रहा।

उनकी इस सफलता के प्रमुख पड़ाव इस प्रकार रहे:

  • पहला प्रयास: कड़ी मेहनत के बाद भी वह अपने पहले प्रयास में साक्षात्कार के चरण तक नहीं पहुंच सकी थीं।
  • लगन और निरंतरता: पहली असफलता से निराश होने के बजाय उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना और फिर से दोगुनी मेहनत शुरू की।
  • नौकरी के साथ पढ़ाई: उन्होंने कंपनी सेक्रेटरी (CS) के तौर पर काम करते हुए और लॉ (LLB) की पढ़ाई पूरी करते हुए यूपीएससी की तैयारी जारी रखी।
  • दूसरी बार में शीर्ष स्थान: अपनी कड़ी मेहनत के बल पर उन्होंने दूसरे प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 13 (AIR 13) हासिल की और आईएएस अधिकारी बनीं।

राष्ट्रीय स्तर पर मिले कई प्रतिष्ठित सम्मान

प्रशासनिक कार्यों में अपनी कार्यकुशलता के साथ-साथ सोनल गोयल अपनी बेबाक सोच और सामाजिक प्रतिबद्धता के लिए भी जानी जाती हैं। देश और समाज के प्रति उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय मंचों पर सराहा गया है। नीति आयोग द्वारा उन्हें 'टॉप 25 वुमेन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया' सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, सोशल मीडिया पर सकारात्मक बदलाव लाने और जागरूकता फैलाने के लिए एक्स पर उन्हें 'वेब वंडर वुमन' के खिताब से भी नवाजा गया है। सोनल गोयल की यह प्रेरक कहानी संदेश देती है कि संकल्प और मेहनत से जीवन की हर कठिन से कठिन चुनौती को पार किया जा सकता है।

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