एयर होस्टेस से 'बांसा घर' की मालकिन तक: पिंकी ने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ मोमोज से कमाए महीने के 50 हजार

झारखंड के बोकारो जिले की पिंकी कुमारी ने गुड़गांव की कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर अपने गांव में फास्ट फूड स्टॉल शुरू किया और आज शाकाहारी मोमोज बेचकर हर महीने 40 से 50 हजार रुपये तक कमा रही हैं।

बड़े शहरों की चकाचौंध भरी नौकरी छोड़कर भी अपने गांव-घर में सफलता की नई कहानी लिखी जा सकती है, बशर्ते इरादे मजबूत हों और खुद पर भरोसा हो। इसे सच कर दिखाया है झारखंड के बोकारो जिले के चंद्रपुरा प्रखंड की रहने वाली पिंकी कुमारी ने। कभी आसमान में उड़ान भरने और कॉर्पोरेट सेक्टर में मोटी सैलरी पाने वाली पिंकी आज अपने दम पर फास्ट फूड कारोबार में एक मिसाल कायम कर रही हैं।

आठ साल कॉर्पोरेट और सर्विस सेक्टर में बिताए

पिंकी कुमारी ने एक खास बातचीत में अपने इस दिलचस्प सफर के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने दिल्ली-एनसीआर के गुड़गांव (गुरुग्राम) में करीब 8 वर्षों तक कॉर्पोरेट और सर्विस सेक्टर में काम किया। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने मशहूर एयरलाइन कंपनी स्पाइसजेट के साथ बतौर एयर होस्टेस की थी और इसके बाद कई बड़े कॉर्पोरेट संस्थानों में भी अपनी सेवाएं दीं। बेहतरीन नौकरियों के बावजूद उनका मन हमेशा खुद का कोई कारोबार शुरू करने में ही लगा रहता था।

गांव लौटकर शुरू किया 'बांसा घर'

जब अपना काम करने की चाहत और प्रबल होने लगी, तो पिंकी ने बोकारो लौटकर अपने सपनों को नई दिशा देने का साहसिक फैसला किया। बचपन से ही खानपान और कुकिंग में गहरी दिलचस्पी होने के कारण उन्होंने फास्ट फूड के क्षेत्र को चुना। चंद्रपुरा में अपना स्टॉल शुरू करते हुए उन्होंने उसका अनोखा नाम रखा—बांसा घर।

पिंकी बताती हैं कि मिथिलांचल और मैथिली संस्कृति में रसोई घर को बांसा घर कहा जाता है। इसी सांस्कृतिक जुड़ाव के चलते उन्होंने अपने स्टॉल को यही नाम दिया।

पूरी तरह शाकाहारी मेन्यू

पिंकी ने अपने कारोबार की शुरुआत मुख्य रूप से मोमोज की अलग-अलग वैरायटी से की थी। आज उनके स्टॉल पर मलाई मोमोज, अफगानी मोमोज, पास्ता, नूडल्स समेत कई तरह के स्वादिष्ट फास्ट फूड आइटम मिलते हैं। उनके आउटलेट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां बिकने वाले सभी व्यंजन पूरी तरह शाकाहारी होते हैं, लेकिन मसालों और बनाने के अंदाज का स्वाद ऐसा है कि लोग बार-बार यहां खाने पहुंचते हैं।

मलाई मोमोज की सबसे ज्यादा मांग

पिंकी कुमारी कहती हैं कि चंद्रपुरा जैसे छोटे इलाके में आमतौर पर पहले फास्ट फूड की इतनी वैरायटी नहीं मिलती थी। ऐसे में उन्होंने स्थानीय लोगों को महानगरों जैसा नया और प्रीमियम स्वाद देने की कोशिश की, जिसे अब ग्राहकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिलहाल उनके यहां सबसे ज्यादा मांग मलाई मोमोज की रहती है, जिसकी रोजाना करीब 100 प्लेट तक की खपत आसानी से हो जाती है।

कुछ घंटों के कारोबार से शानदार कमाई

यह फूड स्टॉल रोजाना शाम 5 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है। पिंकी के मुताबिक, महज कुछ घंटों के इस कारोबार से वह आज हर महीने करीब 40 से 50 हजार रुपये तक की कमाई कर लेती हैं, जो किसी भी बड़े शहर की नौकरी की तुलना में कहीं ज्यादा सुकून देने वाली है।

मां को खोने के बाद भी नहीं हारी हिम्मत

अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में पिंकी भावुक होकर बताती हैं कि उनके पिता नौकरी करते हैं, जबकि कोरोना काल के कठिन दौर में उनकी मां का निधन हो गया था। मां के गुजर जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपने दम पर खड़े होकर आगे बढ़ने का फैसला किया। भविष्य में उनका इरादा अपने इस बांसा घर ब्रांड को और भी बड़े स्तर पर ले जाने का है।

ग्राहक भी हुए दीवाने

स्टॉल पर पहुंचीं ग्राहक इशिता ने बताया कि चंद्रपुरा जैसे छोटे इलाके में पहले अच्छी और हाइजीनिक फास्ट फूड वैरायटी मिलना बेहद मुश्किल था। जब से उन्होंने पिंकी के स्टॉल का फास्ट फूड चखा है, तब से वह इसकी दीवानी हो गई हैं। उन्हें यहां का स्वाद और वैरायटी खूब पसंद आ रही है, जिसके चलते अब इस स्टॉल पर हर उम्र के फूड लवर्स की भीड़ उमड़ रही है।

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