उत्तराखंड की सरोवर नगरी नैनीताल का ऐतिहासिक फ्लैट्स मैदान इन दिनों फिर से हॉकी के रोमांच से गुलजार है। यहां करीब 100 साल पुरानी एक प्रतिष्ठित हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन हो रहा है, जिसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से आई टीमें अपना दमखम दिखा रही हैं। इस मैदान का अतीत जितना दिलचस्प है, उतना ही गौरवशाली भी।
मलबे से बने मैदान की कहानी
फ्लैट्स मैदान का जन्म किसी सामान्य निर्माण से नहीं, बल्कि एक त्रासदी की राख से हुआ था। साल 1880 में नैनीताल में आए विनाशकारी भूस्खलन के बाद जो मलबा जमा हुआ, उसी पर आगे चलकर यह विशाल समतल मैदान आकार ले सका। यही वजह है कि यह स्थान शहर के इतिहास का एक जीवंत हिस्सा माना जाता है।
भारतीय हॉकी के सुनहरे दौर का केंद्र
समय के साथ यह मैदान भारतीय हॉकी के स्वर्णिम युग का अहम ठिकाना बन गया। यहां खेलकर निखरे कई खिलाड़ियों ने अपने हुनर के दम पर देश और दुनिया में पहचान बनाई और ओलंपिक के मंच तक का सफर तय किया। इसी कारण फ्लैट्स मैदान को उन ओलंपियनों की कर्मस्थली के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने यहीं अपनी स्टिक थामकर खेल की बारीकियां सीखीं।
सदियों पुराने टूर्नामेंट की विरासत
इस मैदान की पहचान ऑल इंडिया ट्रेडर्स हॉकी टूर्नामेंट से भी गहराई से जुड़ी है। दशकों पुरानी इस प्रतियोगिता ने नैनीताल को हॉकी के नक्शे पर एक खास स्थान दिलाया है। आज भी जब देशभर से टीमें यहां जुटती हैं, तो यह आयोजन न सिर्फ खेल का रोमांच लाता है, बल्कि उस गौरवशाली परंपरा को भी जीवित रखता है, जिसने भारतीय हॉकी को कई दिग्गज दिए।
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