सक्सेस स्टोरी: न नौकरी न दफ्तर, घर बैठे महीने में 2 लाख की कमाई; खुशबू ने 100 महिलाओं की बदली तकदीर

बिहार के मधुबनी की खुशबू चौधरी मिथिला पेंटिंग के दम पर घर से ही हर महीने 2 लाख रुपये तक कमाती हैं और अब तक 100 से ज्यादा महिलाओं व लड़कियों को मुफ्त प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बना चुकी हैं।

जहां ज्यादातर लोग सरकारी नौकरी या डॉक्टर-इंजीनियर बनने की दौड़ में लगे रहते हैं, वहीं बिहार के मधुबनी जिले की खुशबू चौधरी ने आत्मनिर्भरता की एक अलग ही मिसाल कायम की है। हरलाखी प्रखंड की रहने वाली खुशबू बीते करीब 10 वर्षों से मिथिला पेंटिंग कर रही हैं और इसी कला के सहारे घर बैठे हर महीने 2 लाख रुपये तक की कमाई कर रही हैं। इतना ही नहीं, वे अब तक 100 से ज्यादा महिलाओं और लड़कियों को मुफ्त में यह हुनर सिखाकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा कर चुकी हैं, जिससे उनकी पूरी पंचायत की तस्वीर बदल रही है।

कला बनी आत्मनिर्भरता का जरिया

मिथिला पेंटिंग आज सिर्फ एक कला भर नहीं रह गई है, बल्कि इसके जरिए सैकड़ों लोग अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। यह चित्रकला अब केवल बिहार या भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने वैश्विक स्तर पर भी अपनी जगह बना ली है। खुशबू इसी कला के बल पर न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अपने गांव और आसपास की लड़कियों व महिलाओं को भी इसका महत्व समझाकर सशक्त बना रही हैं।

2016 से मिथिला पेंटिंग में सक्रिय

मधुबनी जिले के हरलाखी प्रखंड की खुशबू चौधरी साल 2016 से मिथिला पेंटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं और इसके जरिए लाखों रुपये कमाकर अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। उनका कहना है कि यह काम पूरे साल चलता रहता है। वे खुद और अपने साथ जुड़े लोगों के साथ मिलकर उत्पाद तैयार करती हैं और उन्हें देश के किसी भी हिस्से में भेज देती हैं। उनके मुताबिक ऑनलाइन के मुकाबले ऑफलाइन बिक्री ज्यादा होती है, क्योंकि जिले और बाहर से सरकारी कार्यक्रमों से लेकर थोक और खुदरा खरीदार उनके उत्पाद ले जाते हैं।

लाखों में आमदनी, मगर तय नहीं

आमदनी के बारे में खुशबू कहती हैं कि गांव में रहकर, घर से काम करते हुए लाखों रुपये कमाना अपने आप में एक खास बात है। उनके अनुसार आय रोजाना होती है, लेकिन वह तय नहीं है और किसी भी कारोबार में ऐसा संभव भी नहीं है। फिर भी सीजन के दौरान एक महीने में 2 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई हो जाती है। शुभ कार्य, शादी-विवाह, लग्न या सांस्कृतिक आयोजन — हर जगह उनके बनाए मिथिला पेंटिंग वाले उत्पादों की मांग रहती है।

वे साड़ी, दुपट्टा, पाग, फोटो फ्रेम, चूड़ी, सूट और कुर्ता समेत कई चीजों पर ग्राहकों की पसंद के मुताबिक कस्टमाइज पेंटिंग करती हैं।

महिलाओं-लड़कियों को बना रहीं दक्ष

खुद के विकास के बाद अब खुशबू समाज को आगे बढ़ाने में जुटी हैं। बीते कुछ वर्षों से वे लोगों को मुफ्त में मिथिला पेंटिंग का प्रशिक्षण दे रही हैं। अपने घर पर ही वे आठवीं कक्षा की लड़कियों से लेकर शादीशुदा महिलाओं तक को छह महीने के कोर्स के रूप में पूरी कलाकार बनाती हैं और फिर उन्हें काम भी देती हैं, ताकि वे अपना खर्च खुद उठा सकें और इस क्षेत्र को भी करियर के रूप में अपनाकर आगे बढ़ सकें।

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