हरिद्वार में पितृ तर्पण का धार्मिक महत्व
पितृ पक्ष का समय पूर्वजों के प्रति आभार व्यक्त करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने का सबसे उपयुक्त अवसर माना जाता है। इस दौरान किए गए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान से पितृ तृप्त होते हैं और अपने वंशजों को सुख समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। यद्यपि हरिद्वार में हर की पौड़ी को सबसे प्रसिद्ध माना जाता है, लेकिन शहर में ऐसे कई अन्य गुप्त और पवित्र स्थान हैं जिनका उल्लेख प्राचीन धर्म ग्रंथों में मिलता है।
भगवान राम से जुड़ा पौराणिक घाट
ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री के अनुसार, हरिद्वार के कुछ घाट अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक गाथाओं के कारण विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। इनमें से एक घाट ऐसा भी है जहां मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने अपने पूर्वजों का श्राद्ध और पिंडदान किया था। इस विशेष स्थान पर तर्पण करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और कुल का कल्याण होता है।
प्रमुख स्थानों की मान्यता
हरिद्वार में मौजूद घाटों पर पिंडदान करने के पीछे ऋषियों और मुनियों द्वारा स्थापित कई मान्यताएं हैं। धर्म शास्त्रों में इन घाटों की महिमा का वर्णन करते हुए बताया गया है कि गंगा तट पर स्थित इन चुनिंदा स्थानों पर की गई पूजा का फल कई गुना अधिक होता है। पंडित श्रीधर शास्त्री का मानना है कि इन घाटों पर पूरी श्रद्धा के साथ पितृ कर्म करने से पितृ दोष से मुक्ति भी संभव है।
श्रद्धा का केंद्र है हरिद्वार
हरिद्वार को सप्तपुरियों में से एक माना गया है, जिसके कारण यहां आने वाले श्रद्धालु साल भर अपने पितरों के निमित्त अनुष्ठान करते हैं। हालांकि, पितृ पक्ष के दौरान इन विशिष्ट घाटों पर होने वाली भीड़ और श्रद्धालुओं की आस्था यह दर्शाती है कि सनातन परंपरा में पूर्वज पूजा का कितना गहरा स्थान है। यदि आप भी अपने पितरों के लिए श्राद्ध करना चाहते हैं, तो इन धार्मिक महत्व वाले घाटों का चयन करना विशेष रूप से फलदायी हो सकता है।
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