अफगानिस्तान पर यूएन में भारत की दहाड़: मिट गए मिटाने वाले, हमारा रिश्ता अटूट

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत ने अफगानिस्तान के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को दोहराया और मानवीय सहायता जारी रखने का संकल्प लिया।

अफगानिस्तान के लिए भारत का रुख

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में अफगानिस्तान के मौजूदा हालात पर हुई चर्चा के दौरान भारत ने अपना पक्ष मजबूती से रखा। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथनेनी हरीश ने इस बात पर जोर दिया कि अफगानिस्तान के साथ भारत के रिश्ते सदियों पुराने हैं, जिन्हें कोई भी ताकत कमजोर नहीं कर सकती। उन्होंने एक सशक्त संदेश देते हुए कहा कि जो लोग हमारे आपसी भाईचारे को मिटाने की कोशिश कर रहे थे, वे खुद मिट गए, लेकिन हमारे संबंधों का धागा आज भी मजबूती से जुड़ा हुआ है।

विकास और मानवीय मदद का सिलसिला

भारत अफगानिस्तान में बुनियादी ढांचे और मानवीय राहत के लिए लगातार काम कर रहा है। वर्तमान में भारत अफगानिस्तान के सभी 34 प्रांतों में फैली 500 से ज्यादा विकास परियोजनाओं के जरिए वहां के लोगों की मदद कर रहा है। स्वास्थ्य के मोर्चे पर भी भारत ने बड़ी भूमिका निभाई है। हाल ही में भारत ने अफगानिस्तान के बच्चों के टीकाकरण के लिए 33 टन वैक्सीन और उससे जुड़ी अन्य चिकित्सा सामग्री वहां भेजी है।

संकट के समय भारत का साथ

भारत ने स्पष्ट किया है कि अफगानिस्तान में जो मानवीय संकट है, उससे दुनिया मुंह नहीं मोड़ सकती। सुरक्षा, राजनीति और मानवीय हालात पर बोलते हुए पार्वथनेनी हरीश ने दोहराया कि भारत वहां के नागरिकों की बेहतरी के लिए अपना सहयोग और मदद का हाथ हमेशा आगे रखेगा। भारत के ये प्रयास अफगानिस्तान में जीवन स्तर सुधारने और सुरक्षा व्यवस्था के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

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