अमेरिकी रिपोर्ट ने बदली भू-राजनीतिक तस्वीर
हाल ही में सामने आई अमेरिकी राष्ट्रपति की वित्त वर्ष 2027 की प्रेसिडेंशियल डिटरमिनेशन रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चाओं को जन्म दिया है। इस रिपोर्ट के आने के बाद बीजिंग से लेकर इस्लामाबाद तक के गलियारों में खलबली मच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिक्स जैसे मंचों पर भारत के बढ़ते प्रभाव को देखकर वाशिंगटन में बैठे डोनाल्ड ट्रंप को शायद अब 'फोमो' यानी कुछ छूट जाने का डर सता रहा है। इसी के चलते ट्रंप ने अपने बयान में चीन को आड़े हाथों लेते हुए उसे दुनिया में खतरनाक रसायनों का सबसे बड़ा स्रोत करार दिया है।
चीन और पाकिस्तान पर बरसे डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिकी प्रशासन ने अपनी इस नई रिपोर्ट में चीन को मादक पदार्थों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की फैक्ट्री करार देकर उसे सरेआम निशाने पर लिया है। इतना ही नहीं, अफगानिस्तान और पाकिस्तान को भी वैश्विक स्तर पर टेरर-फंडिंग का केंद्र बताते हुए कड़ी आलोचना की गई है। ट्रंप प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि दुनिया में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार और उससे जुड़ी दहशतगर्दी के पीछे इन देशों की भूमिका संदिग्ध है। यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने इन देशों को नशीले पदार्थों के खिलाफ विफल राष्ट्रों की श्रेणी में रखा है, लेकिन इस बार की सख्ती काफी ज्यादा दिखाई दे रही है।
भारत के प्रति अमेरिकी नजरिया
इस पूरी रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाली बात भारत के संदर्भ में कही गई है। अमेरिका ने 23 ऐसे देशों की सूची जारी की है जो ड्रग ट्रांजिट या अवैध उत्पादन के लिए जाने जाते हैं। इस लिस्ट में भारत का नाम भी शामिल है, लेकिन व्हाइट हाउस ने इसके पीछे का कारण स्पष्ट करते हुए किसी भी तरह की नाकामी से इनकार किया है। अमेरिका का मानना है कि भारत को इस सूची में रखने के पीछे मुख्य कारण उसकी भौगोलिक स्थिति, भारत का विशाल व्यापारिक नेटवर्क और वे आर्थिक कारक हैं, जिनका गलत लाभ अंतरराष्ट्रीय तस्कर उठाने की कोशिश करते हैं।
पीएम नरेंद्र मोदी के विजन को मिला समर्थन
रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार द्वारा नशीले पदार्थों के खिलाफ उठाए गए कदमों की जमकर तारीफ की गई है। अमेरिका ने माना है कि भारत की वर्तमान सरकार ने ड्रग्स के खिलाफ बेहद सख्त और प्रभावी कानून लागू किए हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने स्वयं इस बात को स्वीकारा है कि अफीम की अवैध खेती को रोकने और सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने की दिशा में पीएम मोदी का विजन दुनिया के सबसे भरोसेमंद और पावरफुल मास्टरस्ट्रोक के रूप में काम कर रहा है। अमेरिका अब यूएस-इंडिया ड्रग पॉलिसी फ्रेमवर्क के माध्यम से इस लड़ाई में भारत के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह उत्सुक है।
सुरक्षा साझेदारी का नया अध्याय
दक्षिण एशिया में ड्रग्स और टेरर-फंडिंग के घातक गठजोड़ को समाप्त करने के लिए भारत और अमेरिका के बीच की यह बढ़ती साझेदारी एक गेमचेंजर साबित हो सकती है। जहां अफगानिस्तान, बर्मा, बोलीविया और कोलंबिया जैसे देशों को अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने में विफल माना गया है, वहीं भारत का रुख पूरी तरह से सकारात्मक और सहयोगपूर्ण आंका गया है। यह रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स में पीएम मोदी का एंटी-ड्रग रोडमैप और भारत की सुरक्षा नीति अब नई ऊंचाइयों पर है, जिसे विश्व की सुपरपावर भी स्वीकार कर रही है।
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