हिमाचल की बड़ी आर्थिक उपलब्धि
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हाल ही में राज्य के लिए एक ऐतिहासिक सफलता की घोषणा की है। किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के पूरा होने के बाद राज्य सरकार को हर साल करीब 1,200 करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति होने का अनुमान है। सबसे खास बात यह है कि इस परियोजना के निर्माण के लिए हिमाचल प्रदेश को अपने खजाने से एक रुपये का भी निवेश नहीं करना पड़ेगा। राज्य सरकार की जिद और कड़े रुख के बाद अब इस परियोजना की निर्माण लागत का 800 करोड़ रुपये का हिस्सा अन्य लाभार्थी राज्य वहन करेंगे।
समझौते का गणित और राज्यों की भागीदारी
नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान उत्तर भारत के छह राज्यों के बीच जल बंटवारे और बिजली उत्पादन को लेकर एक निर्णायक समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर किए गए। इस महत्वपूर्ण बैठक में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और हरियाणा के मुख्यमंत्री नयाब सिंह सैनी शामिल हुए। यह परियोजना न केवल हिमाचल, बल्कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के लिए भी जल और बिजली की जरूरतों को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगी।
बिना उत्पादन लागत के मिलेगी बिजली
मुख्यमंत्री सुक्खू ने मीडिया के सामने इस समझौते के मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के लिए यह एक बड़ी जीत है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना से उत्पन्न होने वाली 211 मेगावाट बिजली हिमाचल प्रदेश को बिना किसी उत्पादन लागत के प्राप्त होगी। बिजली बनाने में आने वाला भारी भरकम खर्च, जो हजारों करोड़ रुपये तक जा सकता था, उसे अब वे राज्य उठाएंगे जो इस परियोजना के पानी का उपयोग करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल के जल संसाधनों को हमेशा से ही बहता हुआ सोना माना गया है और अब राज्य सरकार इन संसाधनों का सही आर्थिक लाभ लेने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रही है।
परियोजना का स्वरूप और प्रभाव
यह बहुउद्देशीय किशाऊ बांध परियोजना हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर टोंस नदी पर बनाई जाएगी, जो यमुना की एक प्रमुख सहायक नदी है। यह प्रोजेक्ट पिछले 60 वर्षों से लंबित था, जिसे अब गति मिली है। परियोजना की कुल क्षमता 660 मेगावाट बिजली उत्पादन की है। इसमें करीब 1,324 मिलियन घन मीटर लाइव स्टोरेज क्षमता विकसित की जाएगी। इस बांध के निर्माण पर कुल 15,000 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इस विशालकाय परियोजना के कारण हिमाचल प्रदेश के 8 गांवों के 2,092 लोग और उत्तराखंड के 9 गांवों के 3,406 लोग प्रभावित होंगे। साथ ही, इसके तहत कुल 2,950 हेक्टेयर क्षेत्र जलमग्न हो जाएगा, जिसमें हिमाचल का 1,498 हेक्टेयर और उत्तराखंड का 1,452 हेक्टेयर हिस्सा शामिल है।
निष्कर्ष
लंबे समय से अधर में लटकी इस परियोजना को पटरी पर लाना सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। बिना किसी निवेश के हर साल 1,200 करोड़ रुपये की आय सुनिश्चित करके हिमाचल प्रदेश ने अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अब देखना यह है कि इस बड़े प्रोजेक्ट का काम धरातल पर कितनी तेजी से आगे बढ़ता है।
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