ब्रह्मांड के अंत का नया वैज्ञानिक अनुमान
हम हर दिन अपने आसपास प्रकृति में छोटे और बड़े बदलाव देखते हैं, लेकिन ब्रह्मांड के स्तर पर होने वाले बदलाव किसी के लिए भी कल्पना से परे हो सकते हैं। हाल ही में शोधकर्ताओं की एक टीम ने इस बात का अनुमान लगाया है कि आखिर कब यह पूरी दुनिया, यह विशाल ब्रह्मांड और इसमें मौजूद तमाम खगोलीय संरचनाएं अपना अस्तित्व खो देंगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि आज से ठीक 33.3 अरब साल बाद ब्रह्मांड का अंत हो सकता है, जिसे विज्ञान की भाषा में बिग क्रंच कहा जाता है। यह स्थिति इतनी भयावह हो सकती है कि न तो पृथ्वी का कोई नामोनिशान बचेगा, न सूरज का, और न ही उन अरबों आकाशगंगाओं का जिन्हें हम आज अनंत का हिस्सा मानते हैं।
कैसे काम करता है बिग क्रंच का सिद्धांत
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी, शंघाई जियाओ टोंग यूनिवर्सिटी और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के वैज्ञानिकों ने मिलकर इस विषय पर एक नया शोध पत्र जारी किया है। वर्तमान में हम जानते हैं कि हमारा ब्रह्मांड लगातार फैल रहा है, लेकिन यह नया अध्ययन कुछ अलग संकेत दे रहा है। वैज्ञानिकों का तर्क है कि ब्रह्मांड का यह विस्तार हमेशा एक जैसा नहीं रहेगा। एक समय ऐसा आएगा जब इस फैलाव की गति धीमी पड़ने लगेगी। अपने अधिकतम आकार को छूने के बाद, ब्रह्मांड वापस सिकुड़ना शुरू कर देगा। ठीक उसी तरह जैसे बिग बैंग के जरिए ब्रह्मांड की शुरुआत हुई थी, यह उसी की उल्टी प्रक्रिया में एक बिंदु पर सिमट जाएगा। इसी विपरीत प्रक्रिया को बिग क्रंच के नाम से जाना जा रहा है, जो अंततः ब्रह्मांड के विनाश का कारण बनेगा।
ब्रह्मांड का विस्तार और रबर बैंड का उदाहरण
अध्ययन के मुताबिक, सिकुड़ने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ब्रह्मांड अपने आज के आकार से लगभग 69 प्रतिशत और अधिक फैल सकता है। शोधकर्ताओं ने इसे समझने के लिए एक खींचे हुए रबर बैंड का उदाहरण दिया है। जैसे एक रबर बैंड को एक निश्चित सीमा तक खींचने के बाद वह वापस अपनी मूल स्थिति में आने की कोशिश करता है, ठीक वैसे ही ब्रह्मांड का फैलाव भी एक बिंदु के बाद अपनी दिशा बदल सकता है। विस्तार की यह गति जब पूरी तरह से थम जाएगी, तब संकुचन का दौर शुरू होगा, जो अंततः विनाश की ओर ले जाएगा।
डार्क एनर्जी की भूमिका
इस पूरी थ्योरी में डार्क एनर्जी की भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी गई है। वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, डार्क एनर्जी ब्रह्मांड के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से को प्रभावित करती है और पिछले कई दशकों से इसे ही ब्रह्मांड के निरंतर फैलते रहने का मुख्य कारण माना गया है। हालांकि, शोधकर्ताओं के सामने सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि क्या डार्क एनर्जी का स्वभाव हमेशा एक जैसा ही रहेगा? इस नवीनतम अध्ययन ने संभावना जताई है कि डार्क एनर्जी की प्रकृति समय के साथ बदल सकती है। यदि ऐसा होता है, तो ब्रह्मांड के विस्तार की गति तेज होने के बजाय धीमी हो जाएगी और अंततः संकुचन की स्थिति पैदा हो जाएगी।
पृथ्वी का भविष्य और अन्य खगोलीय घटनाएं
अब सवाल यह उठता है कि क्या पृथ्वी तब तक बची रहेगी? ब्रह्मांड की वर्तमान आयु करीब 13.8 अरब साल आंकी गई है, और बिग क्रंच की घटना को होने में अभी लगभग 20 अरब साल का लंबा समय बचा है। लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि पृथ्वी इस पूरे समय तक सुरक्षित रहने वाली है। वैज्ञानिकों के अन्य अनुमानों पर गौर करें तो करीब 20 अरब साल के भीतर हमारा सूरज अपना जीवन चक्र पूरा कर चुका होगा। इतना ही नहीं, हमारी आकाशगंगा मिल्की वे और हमारी पड़ोसी एंड्रोमेडा आकाशगंगा आपस में टकराकर एक नई और अलग खगोलीय संरचना का रूप ले लेंगी। यह स्पष्ट है कि जब ब्रह्मांड अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ेगा, तब तक पृथ्वी का अस्तित्व समाप्त हो चुका होगा।
क्या यह निश्चित है?
यह ध्यान रखना आवश्यक है कि बिग क्रंच केवल एक वैज्ञानिक मॉडल और एक संभावना है, इसे किसी भी तरह की निश्चित भविष्यवणी नहीं माना जाना चाहिए। ब्रह्मांड का असली भविष्य क्या होगा, क्या यह हमेशा फैलता रहेगा, या किसी अन्य अवस्था में परिवर्तित हो जाएगा, यह अभी भी विज्ञान जगत के सबसे जटिल और गहरे रहस्यों में से एक है। हालांकि, यह नया मॉडल सही साबित होता है तो यह निश्चित है कि अरबों साल बाद यह विशाल और रहस्यमय ब्रह्मांड एक दिन खुद की ओर सिमटना शुरू कर देगा और सब कुछ खत्म हो जाएगा।
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