BRICS सम्मेलन के बीच राष्ट्रपति पेजेश्कियान का 'ईरानी हॉल' दौरा: जानिए 1810 की इस दुर्लभ कलाकृति का भारत से नाता

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भारत के राष्ट्रपति भवन स्थित ऐतिहासिक अशोक मंडप का दौरा किया, जिसे ईरानी हॉल के नाम से जाना जाता है। यहाँ मौजूद 1810 की फारसी पेंटिंग दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों की गवाही देती है।

ऐतिहासिक अशोक मंडप में खास दौरा

BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भारत के राष्ट्रपति भवन का दौरा किया। इस दौरान उनका ध्यान विशेष रूप से राष्ट्रपति भवन के उस कक्ष ने खींचा, जिसे ईरानी हॉल या अशोक मंडप के नाम से पहचाना जाता है। राष्ट्रपति पेजेश्कियान का इस हॉल में जाना भारत और ईरान के बीच सदियों से चले आ रहे सांस्कृतिक और कूटनीतिक रिश्तों को नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है।

1810 की अनमोल फारसी पेंटिंग

इस हॉल की सबसे बड़ी विशेषता यहां की छत पर मौजूद एक बेहद दुर्लभ और ऐतिहासिक पेंटिंग है। 1810 के आसपास बनी इस प्रसिद्ध फारसी कलाकृति का शीर्षक फतह अली शाह एट द हंट है। यह पेंटिंग न केवल अपनी सुंदरता के लिए जानी जाती है, बल्कि यह उस दौर की ईरानी कला और सत्ता के प्रदर्शन का एक बड़ा प्रतीक भी है। इस उत्कृष्ट कृति को कजार दरबार के मशहूर चित्रकार मिहर अली ने तैयार किया था।

पेंटिंग में क्या खास है

इस पेंटिंग में ईरान के शासक फतह अली शाह को उनके 22 बेटों के साथ शिकार के दृश्यों में चित्रित किया गया है। यह पेंटिंग उस समय की राजशाही परंपराओं और कलात्मक शैली की झलक पेश करती है। कला प्रेमियों और इतिहासकारों के लिए यह पेंटिंग कजार वंश की भव्यता को समझने का एक मुख्य जरिया है।

कैसे भारत पहुंची यह कलाकृति

इस पेंटिंग का इतिहास काफी रोचक रहा है। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, यह कलाकृति मूल रूप से ब्रिटेन के शाही परिवार को उपहार के तौर पर भेंट की गई थी। समय के साथ यह कलाकृति भारत पहुंची और आज राष्ट्रपति भवन की शोभा बढ़ा रही है। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान का इस पेंटिंग को देखना भारत और ईरान की साझा विरासत और इतिहास के प्रति आपसी सम्मान को प्रदर्शित करता है। यह दौरा इस बात को रेखांकित करता है कि कैसे कला और संस्कृति के माध्यम से दो देश अपने पुराने रिश्तों को आज भी संजोए हुए हैं।

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