गणेश चतुर्थी 2026: देश के इन 5 प्रमुख गणेश मंदिरों में उमड़ती है सबसे ज्यादा भीड़, यहां दर्शन करना माना जाता है बेहद शुभ

कल यानी 14 सितंबर 2026 को पूरे देश में गणेश चतुर्थी का पावन त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा, जिसके लिए देशभर के प्रसिद्ध गणेश मंदिरों में विशेष तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

गणेश चतुर्थी का महापर्व और उल्लास

पूरे भारतवर्ष में गणेश चतुर्थी को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। ढोल-नगाड़ों की थाप, फूलों की आकर्षक सजावट और बप्पा के जयकारों से हर तरफ का वातावरण भक्तिमय हो गया है। कल यानी 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी का पावन पर्व है, जिसके तहत घरों और सार्वजनिक पंडालों में विधि-विधान के साथ भगवान गणेश की स्थापना की जाएगी। एक समय था जब यह उत्सव मुख्य रूप से महाराष्ट्र और उसके आसपास के क्षेत्रों तक सीमित था, लेकिन अब यह त्योहार पूरे भारत में भव्यता के साथ मनाया जाता है। यदि आप भी इस दिन को यादगार बनाना चाहते हैं, तो भारत के उन चुनिंदा पांच मंदिरों के बारे में जरूर जानें, जहां इस उत्सव का स्वरूप सबसे दिव्य और अलौकिक होता है।

मुंबई का सिद्धिविनायक मंदिर

मुंबई का सिद्धिविनायक मंदिर भगवान गणेश के सबसे प्रतिष्ठित और श्रद्धा के केंद्रों में से एक है। प्रभादेवी स्थित इस मंदिर में हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। गणेश चतुर्थी के दौरान यहां भक्तों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं। मंदिर में विशेष अनुष्ठान, वेदमंत्रों का पाठ और भव्य महाआरती का आयोजन किया जाता है। इस मंदिर की मुख्य विशेषता भगवान गणेश की मूर्ति है, जिसकी सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई है। चतुर्भुज धारी बप्पा के ऊपरी दाएं हाथ में कमल, बाएं हाथ में कुल्हाड़ी, निचले दाएं हाथ में माला और बाएं हाथ में मोदक से भरा कटोरा सुशोभित है। मोदक भगवान गणेश का अत्यंत प्रिय व्यंजन माना जाता है, जिसका भोग यहां विशेष रूप से अर्पित किया जाता है।

पुणे का श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति

पुणे में स्थित श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर न केवल अपनी भव्यता बल्कि अपनी समृद्ध विरासत के लिए भी विश्व प्रसिद्ध है। गणेश चतुर्थी के दौरान यहां हर साल किसी न किसी प्रसिद्ध मंदिर या महल की हूबहू प्रतिकृति तैयार की जाती है। वर्ष 2026 में यहां वृंदावन के प्रसिद्ध प्रेम मंदिर की अद्भुत झांकी सजाई जाएगी। सामान्य दिनों में मंदिर के दर्शन का समय सीमित रहता है, लेकिन गणेश उत्सव के दौरान यह मंदिर भक्तों के लिए 24 घंटे खुला रहता है। इस ऐतिहासिक मंदिर की स्थापना 19वीं सदी में एक मिठाई विक्रेता श्रीमंत दगडूशेठ और उनकी पत्नी लक्ष्मीबाई ने की थी। उन्होंने प्लेग महामारी में अपने एकमात्र पुत्र को खोने के बाद भगवान गणेश की शरण ली थी। रोचक बात यह है कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने यहीं के सार्वजनिक गणेशोत्सव से प्रेरित होकर देश को एक सूत्र में पिरोने के लिए बड़े पैमाने पर गणेश उत्सव मनाने की परंपरा शुरू की थी।

सवाई माधोपुर का रणथंभौर गणेश मंदिर

राजस्थान के ऐतिहासिक रणथंभौर दुर्ग में स्थित त्रिनेत्र गणेश मंदिर अपनी अनोखी मान्यताओं के लिए विख्यात है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर यहां एक विशाल लक्खी मेला आयोजित होता है, जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु दूर-दराज से पहुंचते हैं। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां भगवान गणेश तीन नेत्रों के साथ विराजमान हैं। यहाँ बप्पा को निमंत्रण भेजने की प्राचीन परंपरा है। यह उन चुनिंदा मंदिरों में से एक है जहाँ भगवान गणेश अपने पूरे परिवार यानी पत्नी रिद्धि-सिद्धि, पुत्र शुभ-लाभ और अपने वाहन मूषक के साथ मौजूद हैं। मान्यताओं के अनुसार, यहाँ की प्रतिमा किसी शिल्पकार द्वारा नहीं बनाई गई है, बल्कि यह स्वयं प्रकट यानी स्वयंभू है।

आंध्र प्रदेश का कनिपकम विनायक मंदिर

चित्तूर जिले में स्थित कनिपकम विनायक मंदिर में गणेश चतुर्थी के दिन से ही 20 दिनों तक चलने वाले भव्य वार्षिक ब्रह्मोत्सव का शुभारंभ होता है। इन दिनों भगवान गणेश की उत्सव मूर्ति को विभिन्न पारंपरिक वाहनों पर सजाकर भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है। यहाँ की स्वयंभू मूर्ति को लेकर एक अद्भुत मान्यता प्रचलित है कि इसका आकार लगातार बढ़ रहा है। कहा जाता है कि पचास साल पहले चढ़ाया गया चांदी का कवच अब मूर्ति पर फिट नहीं बैठता है। इसके अलावा, यह मंदिर आपसी विवादों को सुलझाने के लिए भी जाना जाता है, जहाँ भक्त भगवान की शपथ लेकर अपने पुराने मतभेद भुला देते हैं और सत्य की परख करते हैं।

महाराष्ट्र की अष्टविनायक यात्रा

महाराष्ट्र में अष्टविनायक यात्रा को भारत की सबसे प्रमुख धार्मिक यात्राओं में गिना जाता है। इस यात्रा के अंतर्गत भक्त भगवान गणेश के आठ पवित्र प्राचीन मंदिरों के दर्शन करते हैं। इन आठ मंदिरों में मोरेश्वर, सिद्धटेक का सिद्धिविनायक, पाली का बल्लालेश्वर, महड का वरदविनायक, थेऊर का चिंतामणि, लेण्याद्री का गिरिजात्मज, ओझर का विघ्नेश्वर और राजणगांव का महागणपति मंदिर शामिल हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन सभी आठ तीर्थस्थलों के दर्शन करने मात्र से ही भक्त के जीवन के सभी विघ्न दूर हो जाते हैं और बप्पा की विशेष कृपा प्राप्त होती है। गणेश उत्सव के दौरान इन मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, जो इस यात्रा को और भी अधिक महत्वपूर्ण बना देती है।

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