नेपाल में पिछले दिनों प्राकृतिक आपदा ने जो कहर बरपाया है, उससे उबरने के लिए देश को एक विशाल वित्तीय सहयोग की आवश्यकता होगी। सरकारी स्तर पर किए गए एक प्रारंभिक आकलन के अनुसार, प्रभावित बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण और प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए करीब 7.23 लाख करोड़ नेपाली रुपये की जरूरत पड़ने का अनुमान लगाया गया है। सरकार की ओर से जारी रैपिड डैमेज एंड नीड्स असेसमेंट (RDNA) रिपोर्ट के मुताबिक, भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए भौतिक ढांचे को दोबारा खड़ा करने के लिए कुल 7 खरब 23 अरब 31 करोड़ 52 लाख रुपये का भारी-भरकम बजट आवश्यक होगा।
इस भीषण प्राकृतिक आपदा ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग सहित नेपाल के कई प्रमुख जिलों में अभूतपूर्व तबाही मचाई है, जिसमें अब तक 1,377 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इस प्रलयकारी बाढ़ में न केवल लोगों के आशियाने उजड़ गए, बल्कि उनके खेत, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, मुख्य सड़कें, पुल, ड्राई पोर्ट और सीमा चौकियों पर खड़े मालवाहक कंटेनर तथा गाड़ियां भी बह गईं।
इस भारी नुकसान का आकलन राष्ट्रीय योजना आयोग और राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा प्रबंधन प्राधिकरण सहित कई विभागों की एक संयुक्त तकनीकी टीम ने तैयार किया है। रिपोर्ट के अनुसार, सबसे बड़ी चुनौती देश के क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को बहाल करने की है, जिसके लिए अकेले 4 खरब 3 अरब 57 करोड़ 19 लाख रुपये की दरकार होगी। यह राशि पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक कुल बजट का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा है।
बिजली और परिवहन ढांचे को सबसे अधिक क्षति
इस प्राकृतिक आपदा में नेपाल के ऊर्जा और परिवहन तंत्र को बहुत गहरी चोट पहुंची है। आंकड़ों के अनुसार, कुल 759 मेगावाट क्षमता वाली 13 जलविद्युत परियोजनाएं और 24 मेगावाट क्षमता वाले कुल 5 सौर ऊर्जा संयंत्र इस बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। पूरे बिजली और ग्रिड सिस्टम को दोबारा दुरुस्त करने के लिए ही अकेले 3 खरब 90 अरब 62 करोड़ 30 लाख 40 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।
यातायात और संपर्क मार्गों की बात करें तो कुल 69 किलोमीटर लंबी सड़कें पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं। इसके अलावा 33 मोटरेबल पुल पानी के तेज बहाव में बह गए हैं, जबकि चार पुलों को आंशिक रूप से क्षति पहुंची है। पहाड़ों की जीवनरेखा कहे जाने वाले झूला पुलों को भी इस आपदा में भारी नुकसान हुआ है; क्षेत्र के कुल 64 झूला पुलों में से 53 पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। पूरे परिवहन ढांचे को फिर से सुचारू बनाने के लिए करीब 73 अरब 34 करोड़ 29 लाख 60 हजार रुपये की आवश्यकता होगी।
हजारों घर मलबे में तब्दील, सामाजिक क्षेत्र भी प्रभावित
बाढ़ की मार आम नागरिकों के आशियानों पर भी पड़ी है। रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन जैसे पहाड़ी और तराई के क्षेत्रों में करीब 7,570 निजी घर ढह गए हैं या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके साथ ही सामाजिक सेवाओं से जुड़े 48 सरकारी भवन, 18 स्कूल, 7 स्वास्थ्य केंद्र और देश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े 30 ऐतिहासिक स्थल भी इस आपदा की चपेट में आए हैं। इन क्षेत्रों की मरम्मत और दोबारा निर्माण के लिए कुल 1 खरब 3 अरब 54 करोड़ 99 लाख रुपये के बजट का अनुमान है।
स्थानीय स्तर पर नुवाकोट की विदुर नगरपालिका में सबसे ज्यादा तबाही देखने को मिली है, जहां अकेले ही 3,026 घरों को भारी नुकसान हुआ है। व्यापार, कृषि और बैंकिंग क्षेत्र के पुनरुद्धार के लिए 50 अरब 77 करोड़ 49 लाख रुपये खर्च करने होंगे। इस आपदा के कारण करीब 1,806 हेक्टेयर क्षेत्र में खड़ी फसलें नष्ट हो गई हैं, 17 बैंक शाखाएं बंद पड़ी हैं और 4,800 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। आपदा जोखिम को कम करने और नदी प्रबंधन के लिए 94 अरब 75 करोड़ 31 लाख रुपये और जमा हुए कीचड़ व मलबे को हटाने के लिए 51 करोड़ 54 लाख रुपये की जरूरत बताई गई है।
दो चरणों में पूरा होगा पुनर्निर्माण का काम
रिपोर्ट के अनुसार, पुनर्निर्माण की इस विशाल कार्ययोजना को दो अलग-अलग चरणों में बांटा गया है। अगले छह महीनों के भीतर तत्काल राहत पहुंचाने और अल्पकालिक पुनर्निर्माण कार्यों को पूरा करने के लिए 8 अरब 73 करोड़ 50 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं, दीर्घकालिक विकास और स्थायी पुनर्निर्माण कार्यों को पूरा करने के लिए 7 खरब 14 अरब 58 करोड़ 2 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा प्रबंधन प्राधिकरण के वरिष्ठ डिविजनल इंजीनियर सुशील कुमार श्रेष्ठ ने बताया कि प्रभावित मंत्रालयों, विभागों और स्थानीय स्तर के निकायों से विस्तृत आंकड़े जुटाकर उनका गहन विश्लेषण किया गया है, जिसके आधार पर ही यह प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की गई है।
तीन महीने में आएगी विस्तृत PDNA रिपोर्ट
प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार होने के बाद अब सरकार ने अधिक विस्तार से आकलन करने के लिए पोस्ट-डिजास्टर Needs Assessment (PDNA) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राष्ट्रीय योजना आयोग के प्रवक्ता हरिशरण पुडासैनी के अनुसार, इस विस्तृत PDNA रिपोर्ट को तैयार होने में करीब तीन महीने का समय लग सकता है। आयोग इसके लिए प्रश्नावली तैयार करने और प्रभावित क्षेत्रों में जाकर जमीनी स्तर पर व्यापक अध्ययन करने की तैयारी कर रहा है। शुरुआती रैपिड असेसमेंट का काम पूरा हो चुका है, जिसके आधार पर आगे की बड़ी योजना तैयार की जाएगी।
पुनर्निर्माण बजट का क्षेत्रवार वर्गीकरण
विभिन्न क्षेत्रों में बहाली के लिए आवश्यक अनुमानित बजट इस प्रकार है:
- ऊर्जा और ग्रिड प्रणाली: बिजली क्षेत्र के पुनर्निर्माण के लिए 3 खरब 90 अरब 62 करोड़ 30 लाख 40 हजार रुपये।
- परिवहन और सड़कें: सड़क और पुलों की मरम्मत के लिए 73 अरब 34 करोड़ 29 लाख 60 हजार रुपये।
- आवास और सामाजिक क्षेत्र: निजी मकानों, सरकारी भवनों, स्कूलों और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए 1 खरब 3 अरब 54 करोड़ 99 लाख रुपये।
- व्यापार और कृषि क्षेत्र: उत्पादक क्षेत्रों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और कृषि के लिए 50 अरब 77 करोड़ 49 लाख रुपये।
- आपदा प्रबंधन और नदी नियंत्रण: सुरक्षात्मक उपायों और नदी तटबंधों के लिए 94 अरब 75 करोड़ 31 लाख रुपये।
- कीचड़ और मलबा हटाना: जमा मलबे को साफ करने के लिए 51 करोड़ 54 लाख रुपये।
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