रामलीला मैदान के पास चल रही थी नकली नोटों की फैक्ट्री
कानपुर में अपराध का एक नया और चौंकाने वाला तरीका सामने आया है, जहां अपराधी आधुनिक तकनीक का सहारा लेकर कानून की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश कर रहे थे। रेल बाजार पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो किराए के मकान को एक मिनी प्रिंटिंग प्रेस में बदल चुका था। यहाँ से तैयार होने वाले नकली नोटों को शहर के व्यस्त रेलवे स्टेशनों और बाजारों में खपाया जा रहा था। पुलिस की कार्रवाई में गिरोह के तीन शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। एडिशनल पुलिस कमिश्नर मुख्यालय संकल्प शर्मा के अनुसार, रेल बाजार थाना क्षेत्र के अंतर्गत रामलीला मैदान के पास एक कमरे में यह अवैध काम चल रहा था। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी जिसके बाद टीम ने वहां छापेमारी की।
कौन हैं ये अपराधी और इनका कनेक्शन
पकड़े गए आरोपियों में उन्नाव के बांगरमऊ निवासी 52 वर्षीय शेर सिंह मुख्य मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। वह वर्तमान में चकेरी इलाके में संजू पुलिया के पास किराए के कमरे में रह रहा था। उसके साथ गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में 24 वर्षीय रोशन अली और जालौन के उरई थाना क्षेत्र स्थित गड़र बिनौर निवासी 36 वर्षीय सोमिल गुप्ता शामिल हैं। पांचवीं पास शेर सिंह ही प्रिंटर और अन्य उपकरणों की मदद से नकली नोटों की छपाई का पूरा काम संभाल रहा था। पुलिस ने जब कमरे की तलाशी ली, तो वहां नोटों की खेप के अलावा प्रिंटिंग मशीन और कच्चा माल भी बरामद हुआ।
कैसे काम करता था जालसाजों का गिरोह
पुलिस पूछताछ में इस गिरोह के काम करने के तरीके के बारे में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। ये अपराधी बाजार में 1 के बदले 3 का लालच देकर नकली नोट चलाते थे। इसका सीधा सा मतलब है कि कोई व्यक्ति यदि उन्हें असली मुद्रा देता था, तो उसे उसके बदले तिगुनी राशि के नकली नोट दिए जाते थे। गिरोह का मुख्य निशाना रेलवे स्टेशन के आसपास की छोटी दुकानें, फेरीवाले और भीड़भाड़ वाले बाजार थे, जहां नोटों की बारीकी से जांच करना कठिन होता था। इन नोटों को यात्रियों और छोटे दुकानदारों के बीच आसानी से खपाया जा सकता था।
बरामदगी: नोटों का हिसाब और उपकरणों का जखीरा
पुलिस द्वारा की गई छापेमारी में कुल 2,04,650 रुपये के नकली नोट बरामद किए गए हैं। इन नोटों का विवरण कुछ इस प्रकार है: 100 रुपये के 1991 नोट, 50 रुपये के 71 नोट और 500 रुपये के 4 नोट। बरामदगी के आधार पर यह स्पष्ट है कि गिरोह का पूरा ध्यान छोटे मूल्य के नोटों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में तैयार करने पर था। इसके अलावा पुलिस को मौके से प्रिंटर, कैंची, दो पेपर कटर, दो स्केल, स्याही की पांच भरी और चार खाली बोतलें, कागज का एक पूरा रिम, कपड़े और ट्रॉली बैग जैसी सामग्रियां मिली हैं, जो साबित करती हैं कि वे व्यवस्थित तरीके से इस गोरखधंधे में लगे थे।
क्या ये पेशेवर अपराधी हैं?
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, गिरफ्तार किए गए तीनों व्यक्ति आदतन अपराधी हैं। सोमिल गुप्ता के खिलाफ 5, रोशन अली के खिलाफ 7 और शेर सिंह के खिलाफ पहले से 4 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस अब इन पुराने मामलों की फाइलें खोल रही है ताकि यह पता चल सके कि क्या वे पहले भी इसी तरह के अपराधों में शामिल रहे हैं। जांच अधिकारी अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इस गिरोह का विस्तार कानपुर के बाहर के जिलों तक फैला था और उन्हें इस धंधे के लिए तकनीकी सहायता कौन मुहैया करा रहा था।
जांच का दायरा और पुलिस की अगली कार्रवाई
पुलिस के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि इस गिरोह ने अब तक कुल कितनी नकली मुद्रा बाजार में उतारी है। साथ ही, यह जांच भी की जा रही है कि नोट छापने के लिए विशेष कागज और कच्चा माल कहां से लाया जाता था। कोर्ट में पेशी के बाद तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। पुलिस की विशेष टीम अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित संदिग्धों की तलाश में जुटी है ताकि नकली नोटों की सप्लाई चेन को पूरी तरह से नष्ट किया जा सके। इलाके के रेलवे स्टेशन और आस-पास के बाजारों में भी पुलिस सतर्कता बरत रही है।
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