कचरे से कमाल
फरीदाबाद निवासी सुचिता साहू के लिए फलों के छिलके कभी भी बेकार कचरा नहीं रहे हैं। वे फलों के छिलकों का इस्तेमाल करके शानदार और असरदार बायो एंजाइम बना रही हैं। सुचिता की इस अनूठी पहल ने बाजार में मिलने वाले रसायनों से भरे क्लीनर का एक प्राकृतिक विकल्प पेश किया है।
13 तरह के उत्पाद और बनाने की तकनीक
सुचिता नींबू, संतरा, आम और केले जैसे फलों के छिलकों का उपयोग करके सफाई से संबंधित 13 अलग तरह के उत्पाद तैयार करती हैं। इनमें मुख्य रूप से टॉयलेट क्लीनर, ग्लास क्लीनर और सरफेस क्लीनर शामिल हैं। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से प्राकृतिक है और इसका पर्यावरण पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है।
दूसरों के लिए भी मिसाल
सुचिता का यह काम अब उनके घर की दहलीज पार कर चुका है। वे न केवल खुद इन उत्पादों को बनाकर कमाई कर रही हैं, बल्कि अन्य लोगों को भी यह तकनीक सिखा रही हैं। कई लोग उनसे जुड़कर अपना खुद का छोटा व्यवसाय शुरू कर रहे हैं। सुचिता मानती हैं कि अगर मन में सीखने का जज्बा हो, तो नई शुरुआत करने के लिए उम्र कभी आड़े नहीं आती। मेहनत और सही सोच के साथ कोई भी व्यक्ति किसी भी पड़ाव पर अपनी एक अलग पहचान कायम कर सकता है।
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