कोडरमा का होनहार कलाकार: ऑटो चालक का बेटा अपनी जादुई पेंटिंग से बटोर रहा है सुर्खियां

झारखंड के कोडरमा में रहने वाले 21 वर्षीय पवन कुमार अपनी अद्भुत लाइव स्केचिंग और पेंटिंग कला से लोगों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं। एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले पवन अब फाइन आर्ट के क्षेत्र में अपना भविष्य संवारने की कोशिश में जुटे हैं।

हुनर की मिसाल बने पवन कुमार

कोडरमा जिले के बरसोतियाबर निवासी 21 वर्षीय पवन कुमार आज अपनी अद्भुत कलाकारी के दम पर स्थानीय स्तर पर एक चर्चित चेहरा बन गए हैं। एक ऑटो चालक के घर जन्में पवन ने साबित कर दिया है कि अगर व्यक्ति के भीतर जुनून हो और मेहनत करने की इच्छाशक्ति हो, तो परिस्थितियां कभी भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बनती हैं। पवन अपनी पेंटिंग और स्केच बनाने की बारीक कला के कारण पूरे क्षेत्र में प्रशंसा बटोर रहे हैं।

बचपन का शौक अब बना जुनून

पवन के साथ हुई विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि उन्हें चित्रकारी का शौक बचपन से ही था। जब अन्य बच्चे खेलों में व्यस्त रहते थे, तब पवन कागज और पेंसिल के साथ अपनी कल्पनाओं को धरातल पर उतारने का प्रयास करते थे। समय के साथ यह शौक एक गहरे जुनून में तब्दील हो गया और अब वे इसे पूरी गंभीरता के साथ एक करियर के रूप में देख रहे हैं। अपनी इस कला को और अधिक निखारने और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए पवन ने 10वीं कक्षा के बाद फाइन आर्ट का कोर्स करना शुरू किया है।

लाइव पेंटिंग का जादू

पवन की सबसे बड़ी विशेषता उनकी लाइव पेंटिंग करने की शैली है। वे केवल बंद कमरे में बैठकर चित्र नहीं बनाते, बल्कि समाज और प्रकृति के बीच जाकर जीवंत दृश्य तैयार करते हैं। कोडरमा के विभिन्न स्थानों पर पवन को अक्सर सड़क किनारे बैठकर अपनी कला के साथ रूबरू होते देखा जा सकता है। उनकी पेंटिंग की खूबसूरती इतनी आकर्षक होती है कि वहां से गुजरने वाले लोग खुद को रोक नहीं पाते और उनकी कला को देखने के लिए भीड़ जमा हो जाती है। वे अपने आस-पास के प्राकृतिक दृश्यों, आकर्षक इमारतों और मंदिरों को अपनी पैनी नजरों से देखकर बेहद खूबसूरती के साथ कागज पर उतार देते हैं।

पेंटिंग के प्रकार और समय की दरकार

पवन के पिता मनोज दास एक ऑटो चालक हैं और उनकी माता कुंती देवी एक कुशल गृहिणी हैं। मध्यम वर्गीय परिवार से होने के बावजूद पवन ने अपनी प्रतिभा को ही अपना सबसे बड़ा संबल बनाया है। वे पेंटिंग के लिए कई माध्यमों का उपयोग करते हैं, जिनमें मुख्य रूप से:

  • वॉटर कलर
  • ऑयल कलर
  • एक्रेलिक कलर
  • चारकोल

पवन बताते हैं कि काम की जटिलता के आधार पर समय अलग-अलग लगता है। यदि किसी व्यक्ति का विस्तृत पोर्ट्रेट स्केच तैयार करना हो, तो इसमें करीब 5 से 6 घंटे का समय लग जाता है। वहीं, अगर कोई व्यक्ति अपना त्वरित या रैपिड स्केच बनवाना चाहता है, तो पवन उसे आधे से एक घंटे के भीतर पूरा कर देते हैं।

कला और संघर्ष की कहानी

पवन ने कोडरमा की कई प्रसिद्ध जगहों और व्यक्तित्वों को अपनी कला के माध्यम से अमर किया है। उन्होंने कोडरमा बाजार स्थित चर्च की खूबसूरत ऑयल पेंटिंग, चाराडीह के राधा-कृष्ण मंदिर का स्केच और जेजे कॉलेज की शानदार तस्वीर बनाई है। साथ ही, उन्होंने ध्वजाधारी धाम के महामंडलेश्वर सुखदेव दास जी महाराज का भी स्केच तैयार किया है। इसके अलावा वे कई स्थानीय लोगों के व्यक्तिगत लाइव स्केच भी बना चुके हैं।

संसाधनों की कमी का दर्द

अपनी सफलता की राह में आने वाली चुनौतियों का जिक्र करते हुए पवन कहते हैं कि झारखंड में फाइन आर्ट को प्रोत्साहन देने के लिए सरकारी शिक्षण संस्थानों का अभाव है। कला के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने के इच्छुक विद्यार्थियों को निजी संस्थानों में भारी-भरकम फीस भरनी पड़ती है, जो हर किसी के बस की बात नहीं है। उनका मानना है कि यदि सरकार राज्य में फाइन आर्ट के लिए सरकारी संस्थान खोले और बेहतर सुविधाएं प्रदान करे, तो आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के सैकड़ों युवाओं को अपनी छिपी हुई प्रतिभा दिखाने का एक बेहतरीन मंच प्राप्त होगा। पवन अब इसी उम्मीद के साथ अपनी कला को लगातार ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मेहनत कर रहे हैं।

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