बंजर जमीन पर मखाने की बंपर पैदावार
बिहार के छपरा जिले के जलालपुर प्रखंड में खेती की एक नई तस्वीर उभरकर सामने आई है। यहां की एक ऐसी जमीन, जिसे लंबे समय से बेकार और अनुपयोगी माना जा रहा था, वहां अब मखाने की लहलहाती फसल देखी जा सकती है। स्थानीय किसानों ने कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन और विशेष प्रशिक्षण के बाद इस बंजर भूमि को सोना उगलने वाली जमीन में बदल दिया है। जलालपुर प्रखंड के मंगोलपुर गांव के पास स्थित चवर क्षेत्र में जंगल की अधिकता और बरसात के दौरान जलभराव की समस्या के कारण लंबे समय से कोई भी फसल नहीं उग पा रही थी।
कृषि वैज्ञानिकों की सलाह से बदली किस्मत
जब कृषि वैज्ञानिक इस क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे, तो उन्होंने मिट्टी और जल की उपलब्धता का बारीकी से निरीक्षण किया। विशेषज्ञों ने इस स्थान को मखाने की खेती के लिए सबसे उपयुक्त माना। उनकी सलाह पर किसानों ने इसे एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया और 20 एकड़ से अधिक जमीन पर मखाने का ट्रायल शुरू किया। अब यह ट्रायल पूरी तरह से सफल रहा है और मखाने की फसल तैयार हो चुकी है। किसानों का मानना है कि आने वाले समय में वे बड़े पैमाने पर मखाने की खेती करेंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आएगा।
सरकारी सहायता और रोजगार की संभावना
इस नई कृषि पहल का निरीक्षण करने स्वयं जिला अधिकारी भी पहुंचे। फसल की गुणवत्ता और सफलता को देखते हुए शासन की ओर से किसानों को सरकारी लाभ व सब्सिडी देने का भी आश्वासन दिया गया है। यदि इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर मखाने की खेती का विस्तार होता है, तो इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि सैकड़ों मजदूरों और स्थानीय लोगों के लिए भी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। मखाने की बुवाई और कटाई की प्रक्रिया में मजदूरों की भारी आवश्यकता होती है, जिससे क्षेत्र में रोजगार का संकट दूर होने की उम्मीद है।
किसानों में खुशी और भविष्य की योजना
स्थानीय निवासी और किसान आशु कुमार ने बताया कि इस क्षेत्र में दशकों से खेती का काम बंद पड़ा था, लेकिन पहली बार मखाने की सफल खेती ने सबको हैरान कर दिया है। उन्होंने कहा कि अब हर साल किसान मखाने की फसल उगाएंगे, जिससे न केवल किसानों की कमाई में वृद्धि होगी बल्कि खेतिहर मजदूरों के लिए भी आजीविका का साधन सुनिश्चित हो सकेगा।
किसान रवींद्र चौहान ने अपनी खुशी साझा करते हुए कहा कि 20 एकड़ में किया गया यह परीक्षण पूरी तरह सफल रहा है। मखाने की फसल पककर तैयार हो चुकी है और कुछ ही दिनों में इसकी कटाई कर ली जाएगी। सरकार द्वारा सब्सिडी देने की घोषणा ने किसानों का हौसला और बढ़ा दिया है। अब यह जमीन कभी वीरान नहीं रहेगी, बल्कि यहां हमेशा किसानों की चहल-पहल रहेगी और यह क्षेत्र लाखों की कमाई का केंद्र बनेगा।
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