रोज की सामान्य सब्जियों से हो गए हैं बोर, तो ट्राई करें बघेलखंडी स्टाइल की चटपटी करौंदे की सब्जी

अगर आप रोज़ाना की आलू-टमाटर वाली बोरियत भरी डाइट से थक चुके हैं, तो बघेलखंड की पारंपरिक रसोई से आई करौंदे की यह खास रेसिपी आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। इसे बनाना बेहद आसान है और यह कम मसालों के साथ ही एक जबरदस्त स्वाद देती है।

पारंपरिक स्वाद की तलाश

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर वही पुरानी और सामान्य सब्जियां खाकर बोर हो जाते हैं। अगर आप अपने खाने की थाली में कुछ देसी, चटपटा और अलग स्वाद ढूंढ रहे हैं, तो बघेलखंडी रसोई की पारंपरिक करौंदे की सब्जी आपके लिए एकदम सही विकल्प है। करौंदा नाम सुनते ही कई लोगों को उसके खट्टेपन की याद आ जाती है, लेकिन जब इसे सही तरीके से मसालों के साथ पकाया जाता है, तो यह एक बेहद लाजवाब सब्जी बनकर तैयार होती है।

तैयारी की शुरुआत

सतना निवासी अंजलि चतुर्वेदी ने इस खास सब्जी को बनाने की विधि साझा करते हुए बताया कि सबसे पहले आपको ताजे करौंदे खरीदने होंगे। इन्हें घर लाने के बाद अच्छी तरह से साफ पानी में धो लें। इसके बाद चाकू की मदद से प्रत्येक करौंदे को दो बराबर हिस्सों में काट लें और उनके अंदर मौजूद बीजों को निकालकर अलग कर दें। इसके साथ ही, आप अपनी पसंद और तीखेपन की क्षमता के अनुसार हरी मिर्च लें और उन्हें बीच से चीरा लगाकर तैयार कर लें। यह ध्यान रखना जरूरी है कि करौंदे का खट्टापन और हरी मिर्च का तीखापन ही इस सब्जी के स्वाद को मुख्य रूप से संतुलित करता है। अगर आपको अधिक तीखा पसंद है, तो आप मिर्च की संख्या बढ़ा सकते हैं।

सरसों के तेल का जादुई तड़का

बघेलखंड के खानपान में सरसों के तेल का एक विशेष स्थान है, जो हर व्यंजन में एक सौंधी और देसी खुशबू जोड़ देता है। इस सब्जी को बनाने के लिए सबसे पहले गैस पर एक कड़ाही रखें और उसमें दो बड़े चम्मच सरसों का तेल डालें। जब तेल अच्छी तरह गर्म हो जाए और उसमें से धुआं उठने लगे, तो उसमें तड़के की तैयारी करें। तड़के के लिए आप आधा चम्मच जीरा, आधा चम्मच राई, एक चौथाई चम्मच मेथी दाना और एक चुटकी हींग डालें। जब ये मसाले कड़ाही में चटकने लगें और एक सोंधी खुशबू आने लगे, तो समझ लीजिए कि तड़का पूरी तरह तैयार है।

करौंदे और मिर्च को भूनने की प्रक्रिया

जैसे ही तड़का तैयार हो जाए, इसमें चीरा लगाई हुई हरी मिर्च और कटे हुए करौंदे डाल दें। अब मध्यम आंच पर इन्हें लगभग दो मिनट तक अच्छी तरह से भूनें। करौंदों को चलाते समय सावधानी बरतें और उन्हें हल्के हाथों से मिलाएं ताकि वे तेल और मसालों के साथ अच्छी तरह से घुल-मिल जाएं। इस प्रक्रिया में आंच को ज्यादा तेज रखने की जरूरत नहीं है, क्योंकि करौंदों को धीमी गति से भूनने पर ही उनका वास्तविक स्वाद उभरकर सामने आता है।

मसालों का सामंजस्य

एक बार जब करौंदे और मिर्च भुन जाएं, तो अब इसमें सूखे मसाले मिलाने का समय आता है। इसमें आधा चम्मच हल्दी पाउडर, एक चम्मच धनिया पाउडर, आधा चम्मच सौंफ का पाउडर और स्वादानुसार नमक डालें। इन मसालों को करौंदों के साथ अच्छी तरह से मिलाएं और कुछ देर तक चलाएं ताकि हर टुकड़े पर मसालों की एक समान परत चढ़ जाए। यह सुनिश्चित करता है कि सब्जी का स्वाद अंत तक बरकरार रहे।

धीमी आंच पर पकाने की कला

मसाले अच्छी तरह मिल जाने के बाद, कड़ाही को एक ढक्कन से ढक दें और गैस की आंच को एकदम धीमा कर दें। अब करौंदों को 4 से 5 मिनट तक पकने के लिए छोड़ दें। बीच-बीच में ढक्कन हटाकर एक बार सब्जी को हल्के हाथों से चला दें ताकि यह नीचे से जले नहीं। जब करौंदे नरम हो जाएं और मसाले उनमें पूरी तरह रच-बस जाएं, तो समझ लीजिए कि आपकी सब्जी बनकर तैयार हो गई है।

परतने का तरीका

अंत में गैस बंद कर दें। आपकी बघेलखंडी अंदाज की चटपटी, तीखी और मसालेदार करौंदे की सब्जी परोसने के लिए तैयार है। आप इसे गरमागरम दाल-चावल के साथ खा सकते हैं, या फिर पूरी और पराठे के साथ भी इसका आनंद ले सकते हैं। यह रेसिपी उन लोगों के लिए बहुत कारगर है जो रोज की सामान्य सब्जियों से इतर कुछ पारंपरिक और चटपटा खाना पसंद करते हैं। कम सामग्री, आसान प्रक्रिया और देसी मसालों का मेल इसे बघेलखंडी रसोई की एक खास पहचान बनाता है।

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