अनियमित खानपान से हो सकता है गट जेट लैग, पाचन तंत्र पर पड़ते हैं गंभीर असर

क्या आप भी अपने खाने के समय को लेकर गंभीर नहीं हैं? वैज्ञानिकों के अनुसार, खाने-पीने का अनियमित समय शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी को बिगाड़ सकता है, जिसे 'गट जेट लैग' कहा जाता है।

क्या आपका पेट भी है कन्फ्यूज्ड

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार हम सुबह का नाश्ता छोड़ देते हैं, तो कभी दोपहर का भोजन बहुत देर से करते हैं। इसके अलावा रात के समय सोने से ठीक पहले भारी भोजन करना आजकल एक आम बात हो गई है। अगर आप भी अपनी दिनचर्या में ऐसी ही गलतियां दोहरा रहे हैं, तो सावधान हो जाएं। आपकी यह आदतें न केवल आपकी भूख और पाचन को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि आपके शरीर की अंदरूनी घड़ी यानी सर्केडियन रिदम को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को समझने के लिए गट जेट लैग जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है।

जैविक घड़ी और पाचन का तालमेल

हमारे शरीर के भीतर एक विशेष जैविक घड़ी काम करती है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में सर्केडियन रिदम कहा जाता है। यह घड़ी हमें यह संकेत देती है कि कब हमें जागना है, कब सोना है और शरीर की महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाएं किस समय सक्रिय होनी चाहिए। ऋषिकेश के डॉक्टर राजकुमार आयुष के अनुसार, हमारा पाचन तंत्र इसी जैविक लय के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। जब हम अपने खाने और सोने के समय में बार-बार बदलाव करते हैं, तो शरीर के अंदर का रूटीन पूरी तरह से असंतुलित हो जाता है। इसका सीधा असर हमारे पेट की कार्यप्रणाली पर पड़ता है।

खाने के समय का महत्व

आंतों की सक्रियता और उनसे जुड़े विभिन्न हार्मोन का स्राव दिन और रात के चक्र पर निर्भर करता है। इसके साथ ही आंतों में रहने वाले सूक्ष्मजीव, जिन्हें माइक्रोबायोम कहा जाता है, वे भी इस लय से प्रभावित होते हैं। यही कारण है कि भोजन करने का सही समय निर्धारित करना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत अनिवार्य है। यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन एक निश्चित समय पर भोजन करने की आदत डाल ले, तो उसका शरीर उस रूटीन के अनुसार खुद को बेहतर तरीके से अनुकूलित कर लेता है। इसके विपरीत, कभी सुबह के समय नाश्ता करना, तो कभी दोपहर तक भूखे रहना और रात को देर से भारी भोजन करना पाचन तंत्र के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन जाता है। विशेष रूप से रात के समय भोजन की अनियमितता आंतों की कार्यक्षमता को बुरी तरह प्रभावित करती है।

क्या है गट जेट लैग का कनेक्शन

गट जेट लैग को आप सामान्य जेट लैग की तरह ही समझ सकते हैं। जैसे जब हम लंबी हवाई यात्रा के दौरान एक टाइम जोन से दूसरे टाइम जोन में जाते हैं, तो समय परिवर्तन के कारण हमारे शरीर की घड़ी कुछ समय के लिए गड़बड़ा जाती है और हम थकान व सुस्ती महसूस करते हैं। ठीक इसी प्रकार, दैनिक जीवन में भी जब हम अनियमित खानपान और सोने के गलत समय को अपनाते हैं, तो हमारी आंतों की अपनी आंतरिक लय भी असंतुलित हो जाती है। हालांकि, यह किसी विशेष बीमारी का मेडिकल नाम नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों द्वारा इसका उपयोग इस तरह की शारीरिक अव्यवस्था को सरल भाषा में समझाने के लिए किया जाता है। इसका प्रभाव हर व्यक्ति पर भिन्न हो सकता है, लेकिन स्वास्थ्य के लिए यह एक संकेत है कि आपकी दिनचर्या में सुधार की आवश्यकता है।

पाचन संबंधी समस्याएं

अनियमित दिनचर्या के कारण लोगों को कई तरह की शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसमें पेट फूलना, गैस बनना, कब्ज की समस्या, अपच या पेट में भारीपन महसूस होना शामिल है। कई बार देर रात तक भारी भोजन करने की वजह से नींद भी पूरी नहीं हो पाती है, जिससे अगले दिन की कार्यक्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है। इस समस्या के पीछे हमारे गट माइक्रोबायोम की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। ये सूक्ष्मजीव पाचन तंत्र को सुचारू रखने के लिए जिम्मेदार होते हैं, लेकिन जब आप खाने के समय के साथ छेड़छाड़ करते हैं, तो ये माइक्रोबायोम भी सही ढंग से काम नहीं कर पाते, जिससे पूरा मेटाबॉलिज्म प्रभावित हो जाता है।

स्वस्थ रूटीन कैसे अपनाएं

एक स्वस्थ जीवन शैली जीने के लिए सबसे सरल तरीका है कि खाने का एक निश्चित रूटीन बनाया जाए। यह जरूरी नहीं है कि आप हर दिन बिल्कुल एक ही मिनट पर भोजन करें, लेकिन कोशिश करें कि समय में बहुत ज्यादा अंतर न आए। रात का भोजन सोने से कम से कम कुछ घंटे पहले कर लेना पाचन के लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है। साथ ही पर्याप्त नींद लेना भी अनिवार्य है, क्योंकि पाचन और नींद दोनों ही हमारे शरीर की आंतरिक घड़ी से जुड़े हुए हैं। जिन लोगों की शिफ्ट में नौकरी होती है या जिनकी दिनचर्या में अचानक बदलाव आते हैं, उनके लिए रूटीन बनाना कठिन हो सकता है। फिर भी, उन्हें प्रयास करना चाहिए कि खाने और सोने के बीच एक निश्चित पैटर्न बना रहे। बहुत लंबे समय तक भूखे रहने के बाद एकदम से अधिक मात्रा में भोजन करना भी पेट की सेहत के लिए हानिकारक है।

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