रतलाम में नर्सिंग छात्राओं का अनोखा प्रदर्शन: 15 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचीं कलेक्ट्रेट, कॉलेज पर लगाया भविष्य बर्बाद करने का आरोप

मध्य प्रदेश के रतलाम में नर्सिंग की छात्राओं ने अपने भविष्य को लेकर गंभीर चिंता जताई है। सैलाना से रतलाम कलेक्ट्रेट तक 15 किलोमीटर की लंबी पैदल यात्रा कर उन्होंने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।

शिक्षा के भविष्य पर संकट के बादल

मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसे देखकर हर कोई हैरान है। नर्सिंग की पढ़ाई कर रही छात्राएं अपने हाथों में तख्तियां थामे हुए सड़कों पर उतरीं और 15 किलोमीटर की लंबी दूरी पैदल तय करते हुए सैलाना से सीधे रतलाम कलेक्ट्रेट पहुंच गईं। इन छात्राओं का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन की लापरवाही और मनमानी के चलते उनका शैक्षणिक करियर दांव पर लगा है।

साढ़े तीन साल की डिग्री छह साल में भी अधूरी

प्रदर्शनकारी छात्राओं का कहना है कि उन्होंने कॉलेज में एक नर्सिंग डिग्री के लिए दाखिला लिया था जिसका निर्धारित समय साढ़े तीन साल था। छात्राओं ने कॉलेज प्रबंधन को मोटी फीस भी चुकाई, लेकिन विडंबना यह है कि प्रवेश लिए हुए छह साल बीत चुके हैं और अब तक उनकी परीक्षाएं पूरी नहीं हो सकी हैं। अपनी इसी व्यथा को लेकर सैलाना स्थित माही नर्सिंग कॉलेज की ये छात्राएं कलेक्ट्रेट पहुंचीं और जिलाधिकारी से मिलकर अपनी समस्या रखी।

प्रशासन के सामने रखी मांगें

कलेक्ट्रेट परिसर में छात्राओं को भारी संख्या में हाथों में तख्तियां लिए देखकर वहां मौजूद लोग दंग रह गए। छात्राओं का मुख्य दर्द यह है कि डिग्री पूरी न होने की वजह से उनका भविष्य पूरी तरह से अधर में लटका हुआ है। वे न तो आगे की उच्च शिक्षा के लिए आवेदन कर पा रही हैं और न ही किसी सरकारी या निजी नौकरी के लिए अपनी योग्यता साबित कर पा रही हैं।

  • परीक्षाओं में हो रही अत्यधिक देरी का समाधान किया जाए।
  • कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही की निष्पक्ष जांच हो।
  • प्रशासन हस्तक्षेप कर छात्राओं के भविष्य को सुरक्षित करे।

कॉलेज प्रबंधन का पक्ष

जब इस मामले में कॉलेज प्रशासन से बात की गई, तो उन्होंने अपनी सफाई में एक अलग तर्क रखा। कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि यह पूरा मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। प्रबंधन का दावा है कि वे खुद भी कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद ही कोई आगे की प्रक्रिया संभव हो सकेगी।

क्या होगा छात्राओं का भविष्य?

फिलहाल, छात्राओं के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि जो पढ़ाई उन्हें कुछ वर्षों में पूरी कर लेनी चाहिए थी, उसके लिए उन्हें कब तक संघर्ष करना पड़ेगा। छह साल का लंबा समय बीत जाने के बाद भी डिग्री का हाथ में न होना उनके मनोबल को तोड़ रहा है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और इन छात्राओं को राहत कब तक मिल पाती है। प्रशासन ने फिलहाल मामले को संज्ञान में लिया है और जांच का आश्वासन दिया है।

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