भारत-बेल्जियम की नई रक्षा साझेदारी: 15 दिग्गज कंपनियां और 10 बड़े समझौते, भारत में बनेगा गोला-बारूद और रॉकेट

भारत और बेल्जियम के बीच रक्षा सहयोग अब नई ऊंचाइयों पर है। बेल्जियम की 15 प्रमुख रक्षा कंपनियां भारत में अत्याधुनिक हथियारों, ड्रोन, रडार और रॉकेट के निर्माण के लिए 10 बड़े समझौतों पर काम शुरू कर रही हैं।

रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय

भारत और बेल्जियम के रक्षा संबंध अब केवल कूटनीतिक बैठकों और औपचारिक बातचीत तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि यह साझेदारी सीधे तौर पर युद्धक्षेत्र की मारक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर के नेतृत्व में आया एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भारत में 10 बड़े रक्षा समझौतों पर मुहर लगाने की तैयारी कर चुका है। इस दौरे में बेल्जियम की 15 शीर्ष रक्षा कंपनियां शामिल हैं, जिनके सीईओ भारत में 'मेक इन इंडिया' के तहत तकनीक हस्तांतरण और संयुक्त उत्पादन को लेकर ठोस कदम उठाने जा रहे हैं। इन समझौतों का उद्देश्य भारत को केवल रक्षा उपकरणों का उपभोक्ता बनाए रखना नहीं, बल्कि उन्हें भारत की ही धरती पर तैयार करना है, जिसमें 70 एमएम रॉकेट्स, रडार सिस्टम, ड्रोन और सालाना 10 करोड़ राउंड गोला-बारूद का निर्माण प्रमुख है।

वैश्विक सुरक्षा समीकरण और भारत की भूमिका

बेल्जियम के रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रांकेन ने इस यात्रा को काफी महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र की एक उभरती हुई सैन्य और आर्थिक शक्ति बताते हुए कहा कि यूरोप और एशिया की सुरक्षा को अब अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। उन्होंने यूक्रेन-रूस युद्ध का जिक्र करते हुए चिंता जताई कि कैसे ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देश सैन्य गठबंधन बना रहे हैं और चीन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आक्रामक रवैया अपना रहा है। फ्रांकेन का मानना है कि बेल्जियम जैसे मुक्त व्यापार को बढ़ावा देने वाले देशों के लिए समुद्र मार्गों की सुरक्षा अनिवार्य है। भारत के साथ औद्योगिक स्तर पर सहयोग करना समय की मांग है ताकि वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित और मजबूत बनाया जा सके।

संस्थागत सहयोग और रक्षा रोडमैप

भारत और बेल्जियम के बीच इस बढ़ती साझेदारी की नींव पिछले आर्थिक मिशन के दौरान रखी गई थी। अब इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की बैठक के जरिए संस्थागत रूप दिया जा रहा है। दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने एक 'लेटर ऑफ इंटेंट' पर हस्ताक्षर किए हैं, जो भविष्य में सैन्य प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं विकास, संयुक्त सैन्य अभ्यास, अधिकारियों के आदान-प्रदान और समुद्री सुरक्षा के लिए एक साझा ढांचा तैयार करेगा। इसके अतिरिक्त, बेल्जियम डिफेंस कॉलेज वर्ष 2027 में अपनी 'वर्ल्ड स्टडी ट्रिप' के लिए भारत को मेजबान के रूप में चुनने की योजना बना रहा है। सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैनुफैक्चर्स और बेल्जियन सिक्योरिटी एंड डिफेंस इंडस्ट्री के बीच होने वाला सहयोग समझौता दोनों देशों की कंपनियों के लिए भारत की 'मेक इन इंडिया' नीति के अंतर्गत उत्पादन परियोजनाओं में शामिल होना आसान बनाएगा।

समुद्री सुरक्षा और आधुनिक तकनीकी क्षमताएं

समुद्री सुरक्षा इस साझेदारी का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। भारतीय नौसेना अपनी माइन काउंटरमेजर्स क्षमता, स्वायत्त समुद्री प्रणालियों और अंडरवाटर रोबोटिक्स को अत्याधुनिक बनाने पर जोर दे रही है। बंदरगाहों की सुरक्षा, समुद्र के नीचे बिछी डेटा केबल और पाइपलाइनों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की निगरानी के लिए बेल्जियम की तकनीक अहम भूमिका निभाएगी। इसके अलावा इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम और काउंटर-ड्रोन तकनीक में भी बेल्जियम की कंपनियों के साथ मिलकर संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

ठोस औद्योगिक परियोजनाएं और उत्पादन लक्ष्य

समझौतों के तहत कुछ परियोजनाएं बेहद ठोस हैं, जिनमें से प्रमुख न्यू लाचौसे और टेंबो क्लासिक इंजीनियरिंग के बीच का सहयोग है। इस परियोजना के तहत दो तरह के गोला-बारूद के लिए पूरी उत्पादन लाइन भारत में स्थापित की जाएगी, जिसकी कुल क्षमता सालाना 10 करोड़ राउंड होगी। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 5 करोड़ यूरो है और डिलीवरी 2028-2029 तक की जानी है। साथ ही, बेल्जियम के 70 मिमी रॉकेटों को भारत में असेंबल किया जाएगा, और भारत में पूरी तरह से निर्मित पहला रॉकेट 2027 की शुरुआत में आने की उम्मीद है।

नौसेना से लेकर बख्तरबंद वाहनों तक विस्तार

एक्सैल बेल्जियम और लार्सन एंड टुब्रो के बीच हुआ समझौता माइन काउंटरमेजर वेसल्स के लिए स्वायत्त प्रणालियां उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। फिलहाल 12 जहाजों का लक्ष्य है, जिसे भविष्य में 59 तक बढ़ाया जा सकता है। एफएन हर्स्टल और कल्याणी स्ट्रेटजिक सिस्टम्स हथियार एवं काउंटर-ड्रोन प्रणालियों के निर्माण पर काम करेंगी। वहीं, अर्जुन एमके-I टैंक के लिए ओआईपी सेंसर सिस्टम्स ने पहले ही 130 से अधिक साइट उपलब्ध कराई हैं, और अब वे अर्जुन एमके-II के लिए नया फायर-कंट्रोल सिस्टम विकसित कर रहे हैं, जो लेजर-गाइडेड मिसाइलें दागने में सक्षम है। जोरावर टैंक कार्यक्रम के लिए जॉन कॉकेरिल डिफेंस की टरेट तकनीक को शामिल करने पर भी चर्चा चल रही है, जो भारत की चीन सीमा पर सैन्य ताकत को एक नई मजबूती प्रदान करेगी। इसके अतिरिक्त, पिटागन की मोबाइल बैरियर तकनीक के लिए क्रिशना एलिड के साथ मिलकर 51 प्रतिशत हिस्सेदारी वाला संयुक्त उद्यम तैयार किया जा रहा है, जिससे भारत दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों के लिए भी एक हब बन सके। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के साथ ऑक्टेव का सहयोग पहले से ही आकाश तीर और अरुधरा जैसे कार्यक्रमों में प्रभावी है। साथ ही, 6 मेगावाट के स्वदेशी समुद्री डीजल इंजन के लिए भी बेल्जियम की तकनीक पर बातचीत जारी है।

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