खेती का नया फॉर्मूला: ओल जैसी दिखने वाली 'अरु' की फसल बनी किसानों की FD, जानिए कैसे होती है बंपर कमाई

झारखंड के रांची में किसान चारु मंडल 'अरु' नाम की एक अनोखी फसल उगा रहे हैं जो कम लागत और नाममात्र की देखभाल में सालाना डेढ़ लाख रुपये तक का मुनाफा देती है।

पारंपरिक खेती के दौर में अब देश के किसान नए-नए प्रयोग कर रहे हैं जिससे वे अपनी आय को कई गुना बढ़ा रहे हैं। झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले एक प्रगतिशील किसान चारु मंडल इन दिनों एक खास तरह की फसल उगाकर चर्चा में हैं। चारु मंडल जिस फसल की खेती कर रहे हैं उसका नाम 'अरु' है। यह दिखने में बिल्कुल ओल यानी सूरन की तरह ही होती है। लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि स्थानीय किसान इसे अपनी मेहनत का FD मान रहे हैं। इसका कारण यह है कि इस फसल को एक बार बोने के बाद साल भर किसी विशेष देखभाल की जरूरत नहीं होती और यह किसानों को बंपर मुनाफा देती है।

मिट्टी तैयार करने और बुवाई का विशेष तरीका

अरु की खेती के बारे में जानकारी देते हुए किसान चारु मंडल बताते हैं कि इस फसल में सबसे अधिक मेहनत केवल इसकी बुवाई के समय ही लगती है। एक बार सही तरीके से बुवाई हो जाने के बाद किसान को बार-बार इसके पीछे समय बर्बाद नहीं करना पड़ता। खेती की शुरुआत करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन किया जाता है:

  • सबसे पहले जमीन में लगभग 4 फीट गहरा गड्ढा खोदा जाता है।
  • बुवाई करने से करीब 15 दिन पहले मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाने के लिए उसमें गोबर की खाद, केंचुआ खाद और थोड़ी मात्रा में चूना मिलाया जाता है।
  • इसके साथ ही फसल को बीमारियों से बचाने के लिए मिट्टी में कीटनाशक दवाइयां भी मिलाई जाती हैं।
  • पूरी तरह से तैयार इस उपजाऊ मिट्टी को गड्ढे में भरने के बाद बीज बो दिया जाता है।

इस विधि की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि बुवाई के समय सिर्फ एक बार ही सिंचाई करने की जरूरत होती है। इसके बाद फसल को बार-बार पानी देने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती क्योंकि यह पौधा जमीन के भीतर गहराई से ही प्राकृतिक नमी और पानी को आसानी से सोख लेता है।

कम लागत में 1.5 लाख रुपये तक की शानदार कमाई

अरु की खेती उन किसानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है जो कम लागत और कम पानी में बड़ी कमाई करना चाहते हैं। इस फसल की उत्पादकता बेहद शानदार है। अरु का सिर्फ एक कंद ही वजन में लगभग 15 से 20 किलोग्राम तक का हो जाता है। अगर पैदावार की बात करें तो:

  • एक एकड़ जमीन में लगभग 30 क्विंटल तक अरु का उत्पादन बहुत ही आसानी से मिल जाता है।
  • बाजार में इस पूरी फसल को बेचने पर किसानों को कुल मिलाकर लगभग 1.5 लाख रुपये तक की पक्की कमाई होती है।

इस खेती में सिंचाई, खाद और दैनिक रख-रखाव का अतिरिक्त खर्च लगभग शून्य यानी न के बराबर होता है। यही कारण है कि यह फसल किसानों के लिए बेहद कम निवेश में भारी बचत और शुद्ध मुनाफा देने वाली साबित हो रही है।

पत्तों से भी होती है सब्जी और कंद की पहचान

अरु की उपयोगिता सिर्फ जमीन के अंदर उगने वाले कंद तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके पत्तों का भी अपना एक विशेष महत्व है। स्थानीय लोग इसके पत्तों की बेहद स्वादिष्ट सब्जी बनाते हैं, जिससे किसानों को अतिरिक्त लाभ मिलता है। इसके अलावा, पौधे के पत्तों का आकार देखकर ही किसान इस बात का अंदाजा लगाते हैं कि जमीन के भीतर छिपा कंद कितना बड़ा हो चुका है। जब अरु के पत्ते काफी बड़े और परिपक्व हो जाते हैं, तब समझा जाता है कि फसल खुदाई के लिए पूरी तरह तैयार है और फिर इसे जमीन से सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाता है।

https://hindi.news18.com/photogallery/agriculture/aru-resembling-elephant-foot-yam-becomes-a-fixed-deposit-for-farmers-plant-once-earn-all-year-round-local18-10803749.html