वोटर लिस्ट में नाम को लेकर सियासी बवंडर
पंजाब की आगामी मतदाता सूची के ड्राफ्ट संस्करण से बीजेपी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम नदारद होने से राज्य की राजनीति गरमा गई है। चुनाव आयोग के आधिकारिक दस्तावेजों में चड्ढा के नाम के आगे 'पर्मानेंटली शिफ्टेड' यानी स्थायी रूप से स्थानांतरित होने का उल्लेख किया गया है। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए राघव चड्ढा ने इसे मात्र कोई लिपिकीय या प्रशासनिक त्रुटि मानने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर पंजाब में सत्तासीन आम आदमी पार्टी यानी आप पर राजनीतिक बदले की भावना से काम करने का आरोप मढ़ा है।
राघव चड्ढा का सोशल मीडिया पर दावा
इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए अपनी बात रखते हुए चड्ढा ने कहा कि वे पंजाब से राज्यसभा के मौजूदा सदस्य हैं और उनका मतदाता पहचान पत्र मोहाली में ही पंजीकृत है। सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने साल 2024 के लोकसभा चुनाव में मोहाली में ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। बावजूद इसके, हालिया ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल में उनके नाम को शिफ्टेड के रूप में चिह्नित कर दिया गया है, जो बेहद हैरान करने वाला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभी केवल ड्राफ्ट सूची है और अंतिम सूची का प्रकाशन अक्टूबर 2026 में होना है। फिलहाल, वे नाम को पुन: शामिल करवाने के लिए चुनाव आयोग की दावे और आपत्ति प्रक्रिया का सहारा ले रहे हैं और विशेष सघन पुनरीक्षण यानी SIR की कानूनी प्रक्रियाओं का पालन कर रहे हैं।
प्रशासनिक मिलीभगत का आरोप
राघव चड्ढा ने अपने तीखे तेवर दिखाते हुए आरोप लगाया कि उनके नाम को शिफ्टेड घोषित करने से लेकर उसके सत्यापन और उच्च स्तरीय प्रोसेसिंग तक की पूरी प्रक्रिया में पंजाब सरकार के अधिकारियों की सक्रिय भूमिका रही है। उन्होंने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जैसे कि किस सरकारी अधिकारी ने उन्हें शिफ्टेड के तौर पर मार्क किया, इसका सत्यापन किसके द्वारा किया गया और अंतिम प्रोसेस में कौन शामिल था। चड्ढा का तर्क है कि चुनाव ड्यूटी पर तैनात पंजाब सरकार के अधिकारियों पर राज्य सरकार का सीधा नियंत्रण रहता है। ऐसे में तबादलों, पोस्टिंग और भविष्य की संभावनाओं के कारण उन पर राजनीतिक दबाव बनाकर इस प्रकार की कार्रवाई करवाना आसान हो जाता है।
आम आदमी पार्टी का पलटवार
वहीं, इस पूरे प्रकरण पर आम आदमी पार्टी ने भी अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट किया है। पार्टी ने कहा कि एक प्रमुख अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में यह सामने आया है कि राघव चड्ढा ने दिल्ली में बैकडेटेड प्रक्रिया के जरिए अपना वोटर रजिस्ट्रेशन कराने का प्रयास किया था। आप ने उन पर उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली स्थिति उत्पन्न करने का आरोप लगाया है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि SIR का पूरा संचालन और देखरेख चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि राज्य सरकार के। इसलिए, मतदाता सूची से नाम हटाने या शामिल करने में पंजाब सरकार की कोई भूमिका नहीं है और राघव चड्ढा बेवजह सरकार को बदनाम कर रहे हैं।
राजनीतिक मतभेदों की परिणति
बीजेपी सांसद ने यह दावा किया कि जब से उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़ी है, तब से पार्टी नेतृत्व उनसे गहरी नाराजगी रखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब पुलिस और राज्य की पूरी प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल उनके खिलाफ किया जा रहा है। चड्ढा के अनुसार, आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए अन्य सांसदों को भी इसी तरह निशाना बनाया गया है और यह घटना उसी राजनीतिक प्रतिशोध का एक हिस्सा है।
नियमों की अनदेखी का तर्क
अंत में, चड्ढा ने चुनाव आयोग की SIR गाइडलाइंस के पैराग्राफ 4(d) का हवाला देते हुए बताया कि इसमें प्रोटेक्टेड लिस्ट का प्रावधान है। इस नियम के तहत सांसद, विधायक, न्यायपालिका के सदस्य और सार्वजनिक जीवन से जुड़े विशिष्ट व्यक्तियों के नामों को ड्राफ्ट लिस्ट में ही रखा जाना अनिवार्य है ताकि दावे-आपत्तियों के दौरान उन्हें दस्तावेज जुटाने का अवसर मिल सके। चड्ढा ने आरोप लगाया कि जानबूझकर इन निर्देशों की उपेक्षा की गई है। उन्होंने अंत में यह तल्ख टिप्पणी की कि भले ही आम आदमी पार्टी पंजाब की सत्ता चला रही हो, लेकिन राज्य की मतदाता सूची उसकी निजी संपत्ति नहीं है जिसे वे अपने हिसाब से बदल सकें।
https://www.indiatv.in/punjab/raghav-chadha-name-missing-from-punjab-draft-voter-list-said-this-political-vendetta-2026-09-03-1241015