बरसात के मौसम में निमाड़ की खास रेसिपी: गेहूं के आटे का गरमा-गरम हलवा, जानिए बनाने का सही तरीका

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में बारिश के दौरान गेहूं के आटे का हलवा खूब पसंद किया जाता है, जो न केवल स्वाद में लाजवाब है बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है।

पारंपरिक स्वाद का जादू

मध्य प्रदेश का निमाड़ अंचल अपनी अनूठी खानपान संस्कृति के लिए मशहूर है। जैसे ही क्षेत्र में मानसून की दस्तक होती है और बारिश के चलते हल्की ठंडक महसूस होने लगती है, घरों में लजीज और गर्म पकवानों का दौर शुरू हो जाता है। बुरहानपुर की गलियों में इन दिनों एक ऐसी मिठाई की खुशबू खूब महक रही है, जो बरसों से लोगों की पहली पसंद बनी हुई है। हम बात कर रहे हैं गेहूं के आटे के हलवे की। यह न केवल स्वाद से भरपूर है, बल्कि इसे बनाना भी बेहद आसान है।

सेहत और गर्माहट का मेल

बुरहानपुर की रहने वाली फुला बाई बताती हैं कि इस हलवे को बनाने के लिए किसी महंगे या जटिल सामान की आवश्यकता नहीं होती। रसोई में मौजूद साधारण सामग्री से ही यह तैयार हो जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह शरीर को अंदर से गर्माहट प्रदान करता है। बारिश के मौसम में जब वायरल संक्रमण और सर्दी का डर होता है, तब यह हलवा एक पौष्टिक विकल्प के रूप में उभरता है। यही वजह है कि घर के बड़े-बुजुर्ग इसे खाने की सलाह देते हैं।

जरूरी सामग्री

इस पारंपरिक हलवे को बनाने के लिए आपको नीचे दी गई चीजों की जरूरत होगी:

  • मोटा पिसा हुआ गेहूं का आटा (जाड़ा आटा)
  • शुद्ध घी
  • चीनी या शक्कर
  • काजू, बादाम और किशमिश जैसे ड्राई फ्रूट्स
  • इलायची (वैकल्पिक, स्वाद के अनुसार)

बनाने की विधि: स्टेप-बाय-स्टेप

इस स्वादिष्ट हलवे को तैयार करने की प्रक्रिया बहुत सरल है, बशर्ते आप इसे धैर्य के साथ पकाएं।

  • सबसे पहले एक भारी तले वाली कड़ाही लें और उसमें पर्याप्त मात्रा में शुद्ध घी गरम करें।
  • घी पिघलने के बाद इसमें मोटा पिसा हुआ गेहूं का आटा डालें। अब आंच को धीमा कर दें और आटे को लगातार चम्मच से चलाते हुए भूनें।
  • आटे को तब तक भूनना है जब तक कि उसमें से एक सौंधी खुशबू न आने लगे और उसका रंग बदलकर हल्का सुनहरा न हो जाए। इसे लगातार चलाना बहुत जरूरी है, ताकि आटा कड़ाही की तली में चिपके नहीं और हर तरफ से समान रूप से भुन सके।
  • जब आटा अच्छी तरह भुन जाए, तो इसमें आवश्यकतानुसार पानी मिलाएं। ध्यान रहे कि गांठें न बनें और मिश्रण को अच्छी तरह मिलाते रहें।
  • इसके बाद इसमें मिठास के लिए शक्कर डालें। अब मिश्रण को तब तक पकाएं जब तक कि हलवा गाढ़ा न हो जाए और घी न छोड़ने लगे।
  • अंत में, कटे हुए ड्राई फ्रूट्स जैसे काजू, बादाम और किशमिश ऊपर से डालें। आपकी गरमा-गरम रेसिपी तैयार है।

इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 30 से 40 मिनट का समय लगता है। जब हलवा पूरी तरह तैयार हो जाए, तो इसे गर्मा-गर्म ही परोसें। बारिश की बूंदों के बीच परिवार के साथ बैठकर इस पारंपरिक मिठाई का आनंद लेने का अनुभव ही अलग होता है। चाहे बच्चे हों या घर के बुजुर्ग, यह सभी के लिए एक परफेक्ट स्वीट डिश है। अगर आप भी इस मानसून सीजन में कुछ नया और पारंपरिक आजमाना चाहते हैं, तो बुरहानपुर की इस खास रेसिपी को जरूर ट्राई करें। यह न केवल आपके बचपन की यादें ताजा कर देगा, बल्कि आपकी रसोई में एक नए स्वाद को भी शामिल करेगा।

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