मानसून और नींबू की सेहत
बरसात के खुशनुमा मौसम में जहां पेड़-पौधे लहलहा उठते हैं, वहीं बागवानों और किसानों के लिए यह सीजन नींबू के पौधों के मामले में चुनौतीपूर्ण भी साबित होता है। इस दौरान अक्सर यह शिकायत सुनने को मिलती है कि नींबू के फल बीच से फट रहे हैं। जिला उद्यान अधिकारी डॉ पुनीत कुमार पाठक का कहना है कि यह समस्या मुख्य रूप से मिट्टी में नमी के अचानक असंतुलन, पानी के प्रबंधन में कमी और आवश्यक पोषक तत्वों के अभाव के कारण पैदा होती है। नींबू के फलों को फटने से बचाने के लिए और उन्हें स्वस्थ रखने के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
फल क्यों फटते हैं
नींबू के फल फटने के पीछे की वैज्ञानिक प्रक्रिया को समझना आसान है। जब लंबे समय तक सूखा रहने के बाद अचानक भारी बारिश होती है, तो नींबू का पौधा मिट्टी से बहुत अधिक पानी सोख लेता है। यह पानी तेजी से फल के अंदर पहुंचता है, जिससे अंदर का गूदा बहुत तेजी से फैलने लगता है। इसके विपरीत, फल का छिलका उतनी गति से नहीं बढ़ पाता है। इस दबाव के चलते छिलका फट जाता है। इसके अलावा, यदि मिट्टी में कैल्शियम और बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी हो, तो भी फल के छिलके कमजोर हो जाते हैं और वे अपना आकार बनाए रखने में असमर्थ हो जाते हैं।
फलों को फटने से बचाने के 5 उपाय
- मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन: कैल्शियम फल के छिलके को मजबूती प्रदान करता है, जबकि बोरॉन इसे लचीला और मजबूत बनाए रखता है। मानसून शुरू होने से पहले ही पौधे की जड़ों के पास इन तत्वों वाली खाद का प्रयोग करें। बरसात के दौरान ये पोषक तत्व मिट्टी से बह जाते हैं, इसलिए सही समय पर इनकी पूर्ति करना अनिवार्य है।
- जल निकासी और जलभराव से बचाव: बगीचे या गमले में पानी का जमाव होना पौधे के लिए घातक हो सकता है। यदि जड़ों के आसपास पानी भरा रहेगा, तो पौधा सांस नहीं ले पाएगा और पोषक तत्वों को सोखना बंद कर देगा। सुनिश्चित करें कि पौधे के तने के आसपास की मिट्टी का स्तर ऊंचा हो ताकि अतिरिक्त पानी बिना रुके बाहर निकल सके।
- नियमित छंटाई (Pruning): मानसून के दौरान घनी झाड़ियों में नमी अधिक समय तक बनी रहती है, जिससे फंगस और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। पौधे की सूखी, बीमार और घनी टहनियों की हल्की छंटाई करें। इससे धूप और हवा का संचार पौधे के अंदर तक होता है, जिससे फल स्वस्थ रहते हैं और उन्हें पर्याप्त पोषण मिलता है।
- जैविक खाद का सही उपयोग: रासायनिक उर्वरकों का उपयोग इस मौसम में कम करना चाहिए क्योंकि ये पानी के साथ बह जाते हैं। इसके बजाय, सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट का उपयोग करें। ये खाद मिट्टी की जल धारण क्षमता को सुधारती हैं, जिससे नमी में आने वाले अचानक बदलावों का असर कम हो जाता है और फल सुरक्षित रहते हैं।
- मल्चिंग की तकनीक: मिट्टी में नमी के उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए मल्चिंग सबसे प्रभावी तरीका है। पौधे के तने के चारों ओर सूखी घास, पुआल या सूखे पत्तों की एक परत बिछा दें। यह परत मिट्टी को बारिश की सीधी मार से बचाती है और नमी के स्तर को स्थिर बनाए रखती है।
अतिरिक्त सावधानियां और रखरखाव
मल्चिंग और पोषण के अलावा भी कुछ छोटी सावधानियां बड़े परिणाम देती हैं। चूंकि बरसात के मौसम में कीटों और फंगस का हमला बढ़ जाता है, इसलिए यह बहुत जरूरी है कि हर 15 से 20 दिन में नीम के तेल के घोल का छिड़काव किया जाए। यह फल की त्वचा को सुरक्षित रखता है। इसके अलावा, जैसे ही फल पूरी तरह पक जाएं, उन्हें पौधे पर ज्यादा देर तक न छोड़ें। पके हुए फल पानी सोखकर बहुत जल्दी फट सकते हैं। अपनी बागवानी के दौरान नियमित रूप से निरीक्षण करते रहें, ताकि किसी भी समस्या की शुरुआत होते ही आप उसका उचित समाधान कर सकें। सही देखभाल से आप न केवल फसल को फटने से बचा सकते हैं, बल्कि नींबू के पैदावार की गुणवत्ता भी बढ़ा सकते हैं।
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