चीन के लिए जासूसी का मामला: अमेरिकी पत्रकार थॉमस पॉकन को 2 साल की सजा, जानिए क्या-क्या काम करता था

चीन की खुफिया एजेंसियों के लिए विदेशी एजेंट के रूप में काम करने के आरोपी अमेरिकी पत्रकार थॉमस वीर पॉकन द्वितीय को अदालत ने दो साल कैद की सजा सुनाई है।

चीन के लिए जासूसी करने का मामला

वॉशिंगटन में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां एक अमेरिकी पत्रकार को चीन के लिए गुप्त रूप से काम करने के जुर्म में 2 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, 51 वर्षीय थॉमस वीर पॉकन द्वितीय ने इस वर्ष के आरंभ में अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार कर लिया था। पॉकन के बचाव पक्ष के वकील चार्ल्स बर्नहैम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनका मुवक्किल अदालत के इस फैसले के खिलाफ किसी भी तरह की अपील दायर नहीं करेगा।

न्याय विभाग ने मंगलवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि जेल की अवधि पूरी होने के बाद पॉकन को 36 महीने की सख्त निगरानी में रखा जाएगा। इस निगरानी अवधि के दौरान उसे देश से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी। गौरतलब है कि इस पत्रकार को इसी वर्ष फरवरी के महीने में हिरासत में लिया गया था।

चीन के इशारे पर कर रहा था गद्दारी

यह कानूनी कार्यवाही ऐसे दौर में हुई है जब अमेरिका और चीन के मध्य कूटनीतिक और रणनीतिक तनाव चरम पर है। यह उन तमाम संघीय मामलों में से एक है जिनमें अमेरिकी नागरिकों पर अपने देश के अधिकारियों को सूचित किए बिना चीनी प्रशासन के लिए काम करने का आरोप लगा है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नियुक्त सहायक अटॉर्नी जनरल जॉन ए. आइजनबर्ग ने इस मामले पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि पॉकन ने चंद पैसों की खातिर अपने ही देश के साथ विश्वासघात किया है।

अमेरिकी अधिकारियों के दावों के मुताबिक, पॉकन चीन के मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी के विभिन्न अभियानों में सक्रिय सहयोग दे रहा था। उसका काम न केवल चीनी प्रशासन के लिए लोगों को भर्ती करना था, बल्कि संभावित सहयोगियों के माध्यम से संवेदनशील और खुफिया जानकारी जुटाना भी था।

साल 2010 से चीन में था सक्रिय

जांच में यह सामने आया है कि पॉकन साल 2010 में चीन जाकर बस गया था। वहां उसने लंबे समय तक चीनी मीडिया संस्थानों के साथ पत्रकार के तौर पर अपनी पहचान बनाई। इन संस्थानों में चीन का सरकारी टेलीविजन नेटवर्क CCTV भी प्रमुखता से शामिल था। इसके बाद वह साल 2024 में चीन की आधिकारिक समाचार एजेंसी शिन्हुआ के साथ संपादक के रूप में जुड़ा, जो उसकी अंतिम ज्ञात नौकरी थी।

इस मामले पर वकील चार्ल्स बर्नहैम ने कहा कि पॉकन ने अपने किए को मान लिया है और वे न्यायपालिका के निर्णय का पूर्ण सम्मान करते हैं। वकील ने तर्क दिया कि सरकार ने भी अदालत के समक्ष यह स्वीकार किया है कि पॉकन ने चीन को कोई भी गोपनीय या क्लासिफाइड जानकारी साझा नहीं की थी।

पैसे के बदले जमीर का सौदा

अदालती दस्तावेजों के अनुसार, कम से कम साल 2019 से लेकर फरवरी 2026 तक पॉकन चीनी एजेंटों के सीधे निर्देशों पर काम करता रहा। उसे बखूबी पता था कि उसके हैंडलर चीनी सरकार के लिए काम करते हैं। इन लोगों में एक महिला भी शामिल थी, जिससे पॉकन की मुलाकात साल 2017 में हुई थी और दस्तावेजों में उसे 'कैथी' नाम दिया गया है।

FBI के विशेष एजेंट टिमोथी जे. हीली द्वारा 27 फरवरी को दाखिल किए गए हलफनामे के मुताबिक, 'कैथी' ने ही पॉकन को यह विश्वास दिलाया था कि उसके द्वारा तैयार की गई रिपोर्टों को खुद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पढ़ते हैं। न्याय विभाग का आरोप है कि इस 'कैथी' के साथ काम करने के बदले पॉकन को कुल 1 लाख अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 95 लाख रुपये का भुगतान किया गया था।

नेटवर्क विस्तार और भर्ती का जाल

पॉकन केवल खबरें लिखने तक सीमित नहीं था। उसे 'कैथी' ने ऐसे लोगों को ढूंढकर भर्ती करने का काम सौंपा था जो गोपनीय जानकारी मुहैया करा सकें। एक विशेष मामले में उसे 'पर्सन 1' नामक व्यक्ति से संपर्क करने का जिम्मा मिला था। निर्देश के अनुसार उसे उस व्यक्ति को एक सैमसंग फोन, एक कंप्यूटर और सिग्नल तथा टेलीग्राम जैसे एप्स के एक्सेस कोड देने थे। उसे नेटडिस्क का विवरण भी साझा करने के लिए कहा गया था।

पत्नी के खाते में पहुंचता था पैसा

जनवरी 2025 में जब पॉकन अमेरिका लौटा, तो सीमा सुरक्षा अधिकारियों यानी CBP ने उसे रोक लिया था। पूछताछ के दौरान उसने स्वीकार किया कि उसे 80 प्रतिशत यकीन था कि ट्रंप प्रशासन में नौकरी की जुगत लगा रहा एक व्यक्ति चीन को गुप्त सूचनाएं दे सकता है। हालांकि उसने दावा किया कि उसने उस व्यक्ति को ऐसा करने से मना किया था। जांच के दौरान यह भी पता चला कि पॉकन की विदेश यात्राओं का सारा खर्च 'कैथी' उठाती थी और अक्सर पैसे सीधे उसकी पत्नी के बैंक खातों में भेजे जाते थे।

नाम बदलकर की थी किताबें प्रकाशित

टेक्सास के मूल निवासी पॉकन ने पत्रकारिता के दौरान 'टॉम मैकग्रेगर' नाम का सहारा लिया था। दस्तावेजों में दर्ज है कि उसने अपने पिता की सलाह पर यह उपनाम रखा था, ताकि चीन में उसके काम की पहचान उसके पिता की साख से न जुड़े। हालांकि उसने अपने वास्तविक नाम 'थॉमस डब्ल्यू. पॉकन द्वितीय' से 2019 और 2023 में दो किताबें भी प्रकाशित कीं, जो क्रमशः अमेरिका-चीन संबंधों और शेनझेन शहर पर आधारित थीं। पॉकन के पिता टेक्सास रिपब्लिकन पार्टी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इस गिरफ्तारी ने अमेरिका में चीन के बढ़ते प्रभाव और जासूसी के खतरों पर नई बहस छेड़ दी है।

https://www.indiatv.in/world/us/us-journalist-sentenced-to-2-years-in-prison-for-spying-for-china-received-thousands-of-dollars-2026-09-03-1240983