पाकिस्तान के अस्पताल में आग का मंजर: 8 सेकंड की जानलेवा दौड़, एक बच्चे को तो बचाया पर 14 मासूमों का दर्द रह गया

इस्लामाबाद के अस्पताल की नर्सरी में लगी भीषण आग के बीच नर्स रजिया नूरिन ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक नवजात की जान बचाई, लेकिन बाकी 14 बच्चों को खोने का मलाल उन्हें जिंदगी भर कचोटता रहेगा।

भयानक हादसा और नर्स की दिलेरी

पाकिस्तान के इस्लामाबाद स्थित पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के नर्सरी वार्ड में घटी एक घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। रूटीन ड्यूटी के दौरान जब रजिया नूरिन वहां भर्ती 15 नवजात शिशुओं की देखभाल कर रही थीं, तभी अचानक आग ने विकराल रूप ले लिया। आग की लपटों को देखते ही रजिया ने अपने हाथ में पकड़ी हुई सिरिंज फेंक दी और बिना किसी डर के मौत के मुंह में कूद पड़ीं। धुएं के गुबार के बीच उन्होंने एक नवजात को अपने सीने से मजबूती से चिपका लिया, मानो वह खुद को ढाल बनाकर उस मासूम की रक्षा करना चाहती हों।

मात्र 8 सेकंड में बचाई जिंदगी

सीसीटीवी फुटेज में कैद हुई घटना के अनुसार, रजिया नूरिन नर्सरी के अंदर प्रवेश करने के महज आठ सेकंड के भीतर एक नवजात को गोद में लिए सुरक्षित बाहर निकल आईं। उन्होंने बच्चे को पास ही मौजूद डॉक्टर को सौंप दिया। लेकिन एक बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद भी रजिया थमी नहीं। उनका जज्बा देखिए कि उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए वापस उसी जलती हुई नर्सरी की ओर कदम बढ़ा दिए। वह चाहती थीं कि बाकी 14 बच्चों को भी सुरक्षित बाहर निकाला जा सके, लेकिन तब तक आग और धुएं ने अपना शिकंजा इतना कस लिया था कि आगे बढ़ना लगभग नामुमकिन हो गया था।

मौत की दहलीज पर संघर्ष

नर्सरी के भीतर धुएं का स्तर इतना अधिक हो चुका था कि सांस लेना दूभर था। रजिया नूरिन और वहां मौजूद एक अन्य नर्स ने बचने के लिए जमीन पर लेटकर रेंगते हुए आगे बढ़ने का प्रयास किया। रजिया बताती हैं कि उस वक्त उन्हें कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था और धुएं के कारण लगातार हो रही खांसी से उनकी सांसें अटकी जा रही थीं। उन्होंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की, लेकिन आग की भीषण लपटों ने उन्हें मजबूरन पीछे हटने पर विवश कर दिया। वह क्षण रजिया के जीवन का सबसे दुखद क्षण बन गया, जब उन्हें पता चला कि नर्सरी में मौजूद बाकी 14 नवजात शिशुओं की जान नहीं बचाई जा सकी।

जांच और प्रशासनिक कार्रवाई

26 अगस्त को हुई इस दर्दनाक घटना की जांच में सामने आया कि रजिया नूरिन ने महज 8 सेकंड के अंदर अपनी जान पर खेलकर एक बच्चे को निकाला था, जबकि पूरे हादसे ने 2 मिनट के भीतर भयावह रूप ले लिया था। सरकार द्वारा की गई जांच में अस्पताल की सुरक्षा प्रणालियों में भारी खामियां पाई गई हैं। शुरुआत में अस्पताल प्रबंधन ने एसी यूनिट में धमाके की बात कही थी, जबकि बाद में नेबुलाइज़र में विस्फोट होने का दावा किया गया। इस लापरवाही के चलते 8 अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है।

इनाम और सेवा का सम्मान

अपनी बहादुरी के लिए रजिया नूरिन को पाकिस्तान के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में से एक, सितारा-ए-खिदमत (सेवा का सितारा) देने की घोषणा की गई है। उन्हें नकद इनाम भी दिया जाएगा। रजिया का मानना है कि उन्होंने जो किया, वह महज एक नर्स और एक मां होने के नाते उनका फर्ज था। वह कहती हैं, मांएं अपने बच्चों पर कोई उपकार नहीं करतीं, यह उनका दायित्व है। रजिया एक ईसाई समुदाय से ताल्लुक रखती हैं, लेकिन उनकी इस बहादुरी ने पूरे देश के लोगों को धर्म की दीवारें लांघकर उनकी सराहना करने पर मजबूर कर दिया है।

सदमे और यादों का बोझ

हादसे के बाद रजिया नूरिन गहरे मानसिक और शारीरिक सदमे से जूझ रही हैं। उन्होंने बताया कि इस घटना के बाद से वह ठीक से सो नहीं पाई हैं और जब भी नर्सरी के पास जाती हैं, तो उन मासूमों की चीखें उन्हें सुनाई देती हैं। रजिया ने 103 डिग्री फारेनहाइट (लगभग 39.4 डिग्री सेल्सियस) बुखार होने के बावजूद मीडिया से बात की। वह कहती हैं कि नर्सें माताओं जैसी होती हैं, जो बच्चों को दवा देती हैं और उन्हें अपना मानकर देखभाल करती हैं। उनके लिए उन 14 बच्चों को खोना जीवन भर का दर्द बन गया है।

पीड़ित परिवारों के लिए संदेश

इनाम और प्रशंसा मिलने के बावजूद रजिया का दिल उन बच्चों के लिए रोता है जिन्हें वह बचा नहीं सकीं। वह बेहद भावुक होकर कहती हैं, उन माताओं को बस यही संदेश देना चाहती हूं कि कृपया मुझे माफ कर दें कि मैं आपके बच्चों को नहीं बचा सकी। रजिया का कहना है कि उस वक्त उनके मन में सिर्फ जान बचाने का मकसद था और उन्होंने एक पल के लिए भी अपनी सुरक्षा के बारे में नहीं सोचा। यह घटना 8 सेकंड की बहादुरी और एक मां की ममता की ऐसी गाथा बन गई है, जिसे पाकिस्तान कभी नहीं भूलेगा।

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