सिनेमाई सफलता का नया पैमाना
किसी भी फिल्म की लोकप्रियता का आकलन करने के लिए आज केवल उसका बॉक्स ऑफिस कलेक्शन ही एकमात्र आधार नहीं रह गया है। कई बार ऐसी फिल्में भी होती हैं जो किसी बड़े स्टारडम, भारी भरकम बजट या प्रचार के शोर-शराबे के बिना भी दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बना लेती हैं। फिल्म 'हनुमान अंश' इसी श्रेणी की एक ऐसी कहानी बनकर उभरी है, जिसने लोगों को प्रभावित किया है। नीम करोली बाबा के जीवन और उनके सिद्धांतों पर आधारित यह फिल्म शुरुआती धीमी शुरुआत के बाद अब चर्चा का विषय बन गई है। 7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई इस फिल्म का कुल बजट लगभग 2 करोड़ रुपये था, लेकिन इसने बॉक्स ऑफिस पर 50 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई का शानदार आंकड़ा पार कर लिया है।
सांस्कृतिक प्रभाव और जुड़ाव
फिल्म की चर्चा केवल इसकी कहानी या व्यावसायिक सफलता तक ही सीमित नहीं है। 'मैंने तेरे ही भरोसे' जैसे भक्तिपूर्ण गीतों और बुंदेलखंड के प्रसिद्ध लोकगायक सुनील लोधी की आवाज ने इस फिल्म को जन-जन से जोड़ दिया है। एक छोटी फिल्म ने वह कर दिखाया है जो कई बार करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी बड़े बजट की फिल्में हासिल नहीं कर पातीं। फिल्म की इस अनपेक्षित सफलता और जनता के बीच बढ़ती चर्चा के बाद अब एक महत्वपूर्ण सवाल उठना लाजिमी है। जब फिल्म का संदेश इतना सकारात्मक है और यह लगातार अपनी पकड़ मजबूत कर रही है, तो इसे अब तक किसी भी राज्य सरकार द्वारा टैक्स फ्री क्यों नहीं घोषित किया गया है? रिपोर्ट के अनुसार, 2 सितंबर 2026 तक किसी भी राज्य से इसे टैक्स फ्री करने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, हालांकि मध्य प्रदेश में एक संगठन ने 29 अगस्त को राज्य सरकार के समक्ष इसे कर मुक्त करने की मांग जरूर रखी है।
टैक्स फ्री का मानक क्या है?
क्या केवल व्यावसायिक सफलता या सोशल मीडिया पर वायरल होने के आधार पर किसी फिल्म को टैक्स फ्री कर दिया जाना चाहिए? निश्चित रूप से नहीं। सरकारें इस फैसले को लेने के लिए स्वतंत्र होती हैं, लेकिन कर में छूट देने के कुछ निश्चित आधार होने चाहिए। आम तौर पर सरकारें ऐसी फिल्मों को कर राहत देती हैं जो ऐतिहासिक घटनाओं, सामाजिक सरोकारों, राष्ट्रीय सुरक्षा, कला संस्कृति, शिक्षा या जन जागरूकता का प्रसार करती हैं। सवाल यह है कि क्या नीम करोली बाबा के जीवन, सेवा, आध्यात्मिकता और सामाजिक समरसता पर आधारित 'हनुमान अंश' उन पैमानों पर खरी नहीं उतरती? आखिर सरकारें इसे सार्वजनिक नीति के दायरे में क्यों नहीं देख पा रही हैं ताकि आम दर्शकों के लिए टिकट की कीमतें सस्ती हो सकें?
टैक्स फ्री प्रक्रिया की हकीकत
सिनेमा प्रेमियों के बीच एक बड़ी गलतफहमी यह है कि 'टैक्स फ्री' का मतलब पुराने समय की तरह मनोरंजन कर का पूरी तरह खत्म हो जाना है। जीएसटी व्यवस्था के लागू होने के बाद स्थितियां बदल गई हैं। दिसंबर 2018 में जीएसटी काउंसिल ने 100 रुपये तक के टिकट पर जीएसटी दर को 18 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत और 100 रुपये से ऊपर के टिकट पर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया था। किसी भी फिल्म को टैक्स फ्री करने के लिए सरकार को एक कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए अधिसूचना या विशेष आदेश जारी करना पड़ता है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, सीजीएसटी एक्ट की धारा 11 के तहत सार्वजनिक हित में कर में आंशिक या पूर्ण छूट दी जा सकती है, लेकिन इसके लिए जीएसटी काउंसिल की सिफारिश जरूरी होती है। यह फैसला कोई निर्माता या थिएटर मालिक स्वयं नहीं ले सकता।
टिकट पर बचत का गणित
अक्सर दर्शक 'टैक्स फ्री' सुनकर सोचते हैं कि 100 रुपये का टिकट सीधा 88 या 94 रुपये का हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं है। उदाहरण के लिए, यदि किसी टिकट की अंतिम कीमत 100 रुपये है जिस पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगा है, तो उसमें टैक्स का हिस्सा लगभग 10.71 रुपये होता है। चूंकि जीएसटी केंद्र और राज्य में बंटता है, इसलिए राज्य का हिस्सा लगभग 5.36 रुपये होगा। अगर कोई राज्य केवल अपना हिस्सा माफ करता है, तो दर्शक को अधिकतम 5.36 रुपये की ही राहत मिलेगी। वास्तविक बचत हमेशा टिकट की मूल कीमत और अन्य थिएटर शुल्कों पर निर्भर करती है।
हाल के उदाहरण और तुलना
अगर हम पिछले एक साल (2 सितंबर 2025 से 2 सितंबर 2026) के दौरान की स्थिति देखें, तो कई फिल्मों को अलग-अलग राज्यों में कर राहत प्रदान की गई है:
- 120 बहादुर को दिल्ली और राजस्थान में टैक्स फ्री का दर्जा मिला। राजस्थान में इसे 6 महीने के लिए एसजीएसटी (SGST) में छूट दी गई थी।
- धुरंधर फिल्म को जनवरी 2026 में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में कर मुक्त किया गया, जहां शूटिंग और पर्यटन को बढ़ावा देने का तर्क दिया गया।
- शतक: संघ के 100 वर्ष को मध्य प्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में टैक्स फ्री किया गया।
- कृष्णावतारम पार्ट 1 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशेष स्क्रीनिंग के बाद टैक्स फ्री घोषित किया।
- भारत भाग्य विधाता को दिल्ली और हरियाणा में कर राहत मिली, जिसकी घोषणा हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने फिल्म देखने के बाद की थी।
- आफा नामक ओडिशा की फिल्म को जुलाई 2026 में अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए राज्य सरकार ने टैक्स फ्री किया था।
इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि जब सरकारें सामाजिक संदेश वाली फिल्मों को प्रोत्साहित कर सकती हैं, तो 'हनुमान अंश' जैसी फिल्म को अनदेखा करना तर्कसंगत नहीं लगता।
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