राहुल गांधी का सनातन और सवर्णों से किनारा, मनुस्मृति से लेकर दलित उत्पीड़न के बयानों पर मचा बवाल

राहुल गांधी के हालिया बयानों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, जिसमें मनुस्मृति पर टिप्पणी और दलित छात्रों के साथ भेदभाव के दावों को लेकर सनातनी समाज में भारी नाराजगी है। इन बयानों को कांग्रेस की कथित हिंदू-विरोधी मानसिकता के रूप में देखा जा रहा है, जिससे उनकी राजनीतिक छवि पर भी सवाल उठ रहे हैं।

राहुल गांधी की बयानबाजी और राजनीतिक विवाद

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की हालिया टिप्पणियां एक बार फिर से गहन चर्चा का विषय बन गई हैं। विशेष रूप से 2000 साल पुरानी मनुस्मृति पर पुणे में दिए गए उनके बयान के बाद सनातनी समाज में गहरा आक्रोश है। इसके अलावा, उन्होंने 3 दिन पूर्व दलित छात्रों के साथ स्कूलों में हो रहे भेदभाव को लेकर जो दावे किए, उन्हें लेकर लोग सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर उनकी आलोचना कर रहे हैं। राहुल गांधी के बयानों का इतिहास रहा है कि वे अक्सर विवादों के केंद्र में रहते हैं, और अक्सर ये टिप्पणियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को घेरने के प्रयास में की जाती हैं।

विवादित बयानों की लंबी फेहरिस्त

भाजपा और संघ की आलोचना करना कांग्रेस की राजनीति का मूल हिस्सा रहा है, लेकिन राहुल गांधी कई बार अपनी बातों के कारण हंसी का पात्र भी बन जाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत आलोचना उनका पसंदीदा विषय रहा है। वर्ष 2018 में चौकीदार चोर का उनका तंज काफी चर्चित रहा था, जिसका असर 2019 के चुनाव परिणामों में देखने को मिला। इसी तरह, वर्ष 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को वोट चोर कहना कांग्रेस को भारी पड़ा था, और कांग्रेस मात्र 6 तथा उनके सहयोगी दल कुल 29 सीटों पर सिमट गए थे।

आलू से सोना बनाने का पुराना विवाद

राहुल गांधी के बयानों को लेकर मजाक उड़ने का सिलसिला नया नहीं है। वर्ष 2017 में उनका एक संपादित वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने आलू से सोना बनाने वाली मशीन की बात की थी। हालांकि, राहुल ने स्पष्ट किया था कि यह विचार उनका नहीं बल्कि प्रधानमंत्री मोदी का है और वह केवल उन पर तंज कस रहे थे। उन्होंने कहा था कि वे ऐसी मशीन लाएंगे जिससे एक तरफ आलू घुसेगा और दूसरी तरफ से सोना निकलेगा, ताकि लोगों के पास अपार धन हो। लेकिन भाजपा के सोशल मीडिया हैंडलर्स ने उस बयान को एक अलग रूप देकर राहुल गांधी की काफी फजीहत कराई थी, जिससे वे देश भर में ट्रोल हुए।

दलित छात्रों पर राहुल के दावे

बीते 29 अगस्त 2026 को पुणे में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने दलितों के साथ भेदभाव का मुद्दा उठाया। उत्तराखंड के हलद्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष के कार्यक्रम के बाद कथित शुद्धिकरण की घटना पर चर्चा करते हुए उन्होंने स्कूलों में दलित छात्रों के साथ हो रहे कथित भेदभाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि स्कूलों में दलित बच्चों को शौचालय साफ करने और सफाई कार्य करने के लिए मजबूर किया जाता है। उन्होंने चाय की दुकानों का भी उदाहरण दिया, जहां कथित तौर पर दलितों के लिए अलग प्यालों और डिस्पोजेबल ग्लास का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि अन्य के लिए कांच या चीनी मिट्टी के बर्तनों का उपयोग होता है। राहुल के इस दावे को जमीनी हकीकत से परे बताते हुए लोग उनकी कड़ी आलोचना कर रहे हैं, क्योंकि ऐसी व्यवस्था आज के दौर में कहीं देखने को नहीं मिलती।

मनुस्मृति और सनातन पर घमासान

मनुस्मृति को लेकर राहुल के हालिया बयान को भी पूरी तरह अप्रासंगिक और विवादित माना जा रहा है। 1800-2000 साल पहले लिखी गई मनुस्मृति तत्कालीन सामाजिक संरचना, वर्ण व्यवस्था और आश्रम व्यवस्था पर आधारित थी। आज की परिस्थितियां उस कालखंड से पूर्णतः भिन्न हैं। वर्तमान में सभी जातियों और धर्मों के लोग हर प्रकार के कार्यों में संलग्न हैं और महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। इसके बावजूद, कांग्रेस के कई नेता सनातन परंपराओं को निशाना बनाकर वोट बैंक को लामबंद करने का प्रयास करते हैं, जो उल्टा उनके खिलाफ ही चला जाता है। सवर्ण समाज, विशेष रूप से ब्राह्मण वर्ग, राहुल गांधी के इन बयानों से बेहद खफा है।

भाजपा और अन्य नेताओं का हमला

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और सुधांशु त्रिवेदी जैसे नेताओं ने राहुल गांधी की कड़ी निंदा की है। भाजपा का स्पष्ट आरोप है कि राहुल गांधी हिंदू धर्म और उसके ग्रंथों को ही निशाना क्यों बनाते हैं, जबकि हिजाब, तीन तलाक और शरिया जैसी अन्य पंथों की प्रथाओं पर वे चुप्पी साधे रहते हैं। सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल पर आरोप लगाया कि वे विदेशी और मार्क्सवादी एजेंडे के तहत भारतीय संस्कृति और विरासत को बदनाम करने का काम कर रहे हैं।

शंकराचार्य की नाराजगी

इस विवाद में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की टिप्पणी भी महत्वपूर्ण है, जो अक्सर प्रधानमंत्री मोदी और योगी आदित्यनाथ के फैसलों की आलोचना के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने भी राहुल गांधी के बयान को गलत बताया और उन्हें मनुस्मृति के श्लोकों की गलत व्याख्या करने के लिए सार्वजनिक माफी मांगने की चेतावनी दी है। यह दर्शाता है कि राहुल गांधी के बयानों ने किस तरह से सभी वर्गों के बीच असंतोष पैदा कर दिया है।

सवर्ण वोटों से मोहभंग की राजनीति

आंकड़ों के अनुसार, 1931 के बाद देश में जातीय जनगणना नहीं हुई है, लेकिन राष्ट्रीय परिवार सर्वेक्षण-4 के अनुसार ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार और कायस्थ जैसी सवर्ण जातियों की कुल जनसंख्या लगभग 27.2 प्रतिशत है। एक समय था जब सवर्ण मतदाता कांग्रेस का आधार माने जाते थे, लेकिन मुसलमानों की ओर अत्यधिक झुकाव के कारण सवर्ण वर्ग कांग्रेस से दूर होता चला गया। आज भाजपा का हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का एजेंडा सवर्णों को अधिक लुभाता है। इसके बावजूद, कांग्रेस अपने सामान्य वर्ग के वोट बैंक को वापस लाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाने के बजाय उनके खिलाफ बयानबाजी कर रही है। राहुल गांधी का सवर्णों और सनातनियों के प्रति यह बेपरवाह रवैया कांग्रेस के लिए भविष्य में और अधिक नुकसानदेह साबित हो सकता है।

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