पाकिस्तान की नापाक साजिश और जासूसी का नया तरीका
देश की सुरक्षा को चुनौती देने वाली एक बेहद शातिराना साजिश का पर्दाफाश हुआ है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और मिलिट्री इंटेलिजेंस (एमआई) ने एक संयुक्त ऑपरेशन को अंजाम देते हुए आईएसआई (ISI) के एक बड़े जासूसी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस पूरे मामले में एक विवाहित जोड़े, साहिल और समीरा को गिरफ्तार किया गया है। देखने में तो ये लोग एक सामान्य दंपत्ति की तरह दिखते थे, लेकिन जांच एजेंसियों ने जब इनके फोन, सोशल मीडिया चैट्स और वॉयस नोट्स की गहराई से पड़ताल की, तो जो सच सामने आया उसने सुरक्षा महकमे को हिलाकर रख दिया। ये दोनों आरोपी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के इशारे पर भारतीय सेना की संवेदनशील जानकारी और देश के सैन्य ठिकानों का डेटा सीमा पार भेजने का काम कर रहे थे।
मोबाइल फोन पर बजती वह मीठी घंटी
इस पूरे जासूसी खेल की शुरुआत एक फोन कॉल से होती थी। अक्सर देर रात मोबाइल फोन की घंटी बजती और स्क्रीन पर प्लस 91 से शुरू होने वाला भारतीय कोड वाला नंबर दिखाई देता। जब जवान उस कॉल को उठाते, तो दूसरी तरफ से एक बेहद सलीकेदार, मीठी और हमदर्द आवाज सुनाई देती। यह आवाज किसी अनजान महिला की होती थी, जो बड़े प्यार और अपनापन जताते हुए हाल-चाल पूछती। देखते ही देखते यह बातचीत दोस्ती में बदल जाती और यही उस जाल की शुरुआत होती, जिसे पाकिस्तान की आईएसआई ने बेहद चालाकी से बुना था। कॉल करने वाला नंबर भले ही भारतीय दिखाई देता था, लेकिन वास्तव में वह कॉल पाकिस्तान के किसी खुफिया अड्डे से आ रहा होता था। इस आवाज के पीछे कोई आम महिला नहीं, बल्कि आईएसआई के शातिर हैंडलर्स होते थे जो जवानों को भावनात्मक रूप से फंसाकर उनका विश्वास जीतते थे।
फर्जी सिम कार्ड और हनीट्रैप का गहरा जाल
जांच में पता चला है कि साहिल और समीरा का काम मुख्य रूप से फर्जी और अवैध सिम कार्ड जुटाना था। वे भारत में इन सिम कार्ड्स को हासिल करते और किसी न किसी माध्यम से पाकिस्तान भेज देते। पाकिस्तान में बैठे आका इन्हीं भारतीय सिम कार्ड्स का इस्तेमाल करके व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर खाते सक्रिय करते थे। जब हमारे देश के जवान अपने फोन पर भारतीय नंबर देखते, तो उन्हें शक की गुंजाइश भी नहीं होती थी कि वे किसी दुश्मन से बात कर रहे हैं। इसके बाद शुरू होता था हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग का दौर। सोशल मीडिया पर फर्जी ग्रुप्स बनाए जाते थे, जहां आईएसआई एजेंट खुद को सेना का शुभचिंतक और मददगार बताते थे। इन ग्रुप्स में शामिल जवानों को धीरे-धीरे व्यक्तिगत बातचीत और वीडियो कॉल्स के जरिए फंसाया जाता था, ताकि भविष्य में उन्हें ब्लैकमेल करके सेना की गुप्त गतिविधियों और दस्तावेजों की जानकारी हासिल की जा सके।
पूर्व सैनिकों पर आईएसआई की खास नजर
इस पूरे सिंडिकेट ने अपनी रणनीति के तहत सेवानिवृत्त हो चुके सैनिकों और आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल (AFT) के चक्कर काटने वाले सैन्यकर्मियों को निशाना बनाया। साहिल और समीरा को बाकायदा ट्रिब्यूनल के आसपास सक्रिय रहने का काम सौंपा गया था। वे उन पूर्व सैनिकों की तलाश करते थे जो पेंशन, प्रमोशन, कोर्ट-मार्शल या कानूनी विवादों से जूझ रहे होते थे। परेशान और हताश व्यक्ति को जब कोई सहारा देने का नाटक करता है, तो वह आसानी से अपना भरोसा खो बैठता है। समीरा इसी मौके का फायदा उठाती थी। वह मेनका की तरह बेहद शातिराना अंदाज में उनसे मिलती, उनकी समस्याओं में हमदर्दी जताती और मदद के नाम पर उनका मोबाइल नंबर ले लेती थी। ये नंबर तुरंत पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को भेज दिए जाते थे।
रेकी और गोपनीय जानकारी जुटाने का काम
एजेंसियों को दोनों आरोपियों के फोन से ऐसे कई वॉयस नोट्स हाथ लगे हैं, जिनमें पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स उन्हें स्पष्ट निर्देश दे रहे थे। इन निर्देशों में देश के करीब 7 से 8 प्रमुख कैंटोनमेंट इलाकों की सूची शामिल थी। उन्हें इन इलाकों की रेकी करने और वहां के सुरक्षा तंत्र की थाह लेने के कड़े निर्देश दिए गए थे। इतना ही नहीं, यह गिरोह स्थानीय स्तर पर बेरोजगार लड़कों की भर्ती करने की योजना बना रहा था। इन लड़कों को पैसों का लालच देकर कैंटोनमेंट के रास्तों, सेना की बैरकों, वाहनों की आवाजाही और सुरक्षा चौकियों का डेटा जुटाने का काम सौंपा जाने वाला था। जो भी जानकारी वे जुटाते, उसे गुप्त रूप से पाकिस्तान भेज दिया जाता था ताकि वे उसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ कर सकें।
तकनीकी निगरानी और गिरफ्तारी
मिलिट्री इंटेलिजेंस को इस पूरे नेटवर्क की भनक वक्त रहते लग गई थी। एजेंसियों ने तकनीकी निगरानी और जमीन पर तैनात अपने मुखबिरों के जाल के जरिए साहिल और समीरा की हर एक हरकत पर पैनी नजर रखी। जब पर्याप्त सबूत जुटा लिए गए, तो दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर एक साझा कार्रवाई की गई और दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि दुश्मन देश किस तरह से आधुनिक तकनीक, हनीट्रैप और मानवीय कमजोरियों का इस्तेमाल करके हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां इस मामले से जुड़े अन्य संपर्कों और नेटवर्क की भी जांच कर रही हैं ताकि इस खतरे की जड़ तक पहुंचा जा सके।
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