बिहार के जल हितों पर केंद्र का बड़ा आश्वासन
भारत और बांग्लादेश के बीच होने वाली महत्वपूर्ण फरक्का जल संधि को लेकर बिहार के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि संधि से जुड़े किसी भी निर्णय को लेते समय बिहार के जल हितों को पूरी प्राथमिकता दी जाएगी। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने जनता दल यूनाइटेड यानी जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा को इस संबंध में एक लिखित आश्वासन दिया है। इस आश्वासन में कहा गया है कि राज्य की पेयजल संबंधी आवश्यकताओं और औद्योगिक जल की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही भविष्य की रणनीति तय की जाएगी।
संजय झा की पहल और विदेश मंत्री का जवाब
यह पूरा मामला 6 अगस्त 2026 को राज्यसभा में शुरू हुआ था, जब संजय कुमार झा ने विशेष उल्लेख के जरिए फरक्का जल संधि के नवीनीकरण का मुद्दा सदन में उठाया था। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की थी कि संधि के आगामी दौर में बिहार के जल अधिकारों की रक्षा की जाए। इस मांग पर संज्ञान लेते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 28 अगस्त 2026 को एक पत्र के माध्यम से अपना आधिकारिक जवाब भेजा है। विदेश मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सरकार को गंगा जल संधि से जुड़ी उन चिंताओं का भली-भांति ज्ञान है जो संजय झा ने व्यक्त की हैं।
अंतर-मंत्रालयी विमर्श में बिहार की भागीदारी
विदेश मंत्री के अनुसार, केंद्र सरकार इस विषय पर पहले से ही सक्रिय है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 और 2024 के दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने इस मसले पर कई दौर की बैठकें की हैं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य जल संधि के क्रियान्वयन और भविष्य की रूपरेखा तैयार करने से जुड़ा था। इन चर्चाओं को केवल केंद्रीय स्तर तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसमें संबंधित पक्षों की भागीदारी को सुनिश्चित किया गया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इन महत्वपूर्ण बैठकों में बिहार सरकार के अधिकृत प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया था और अपने राज्य का पक्ष मजबूती से रखा था।
बैठकों का विवरण और बिहार का पक्ष
विदेश मंत्री द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, बिहार सरकार के प्रतिनिधियों ने कुल चार प्रमुख बैठकों में सक्रिय रूप से भाग लिया था। इन बैठकों की तारीखें 22 अगस्त 2023, 30 अक्टूबर 2023, 15 मार्च 2024 और 31 मई 2024 हैं। इन चर्चाओं में बिहार की पेयजल और औद्योगिक जरूरतों को केंद्र बिंदु में रखा गया था। केंद्र सरकार का यह कहना है कि सभी संबंधित पक्षों के दृष्टिकोणों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और बिहार की जल सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह सजग है।
संजय झा ने जताई उम्मीद
विदेश मंत्री से मिले इस सकारात्मक आश्वासन पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय कुमार झा ने इसे बिहार की जनता के लिए एक बड़ी उम्मीद बताया है। उन्होंने विदेश मंत्री के प्रति अपना आभार प्रकट करते हुए कहा कि उन्हें केंद्र सरकार से न्यायोचित फैसले की पूरी अपेक्षा है। संजय झा ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने पहले कार्यकाल से ही इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि फरक्का बराज की वजह से गंगा नदी के प्रवाह और बिहार को मिलने वाले पानी के हक में जो विसंगतियां पैदा हुई हैं, उन्हें दूर किया जाए।
वैज्ञानिक आधार पर वाजिब हक की मांग
संजय झा ने स्पष्ट किया कि बिहार सरकार केंद्र से किसी भी प्रकार की विशेष रियायत या कृपा की मांग नहीं कर रही है। उनका तर्क है कि बिहार केवल अपने वैज्ञानिक आकलन के आधार पर अपना वाजिब हक मांग रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में राज्य की बढ़ती आबादी को सिंचाई, पीने के पानी और उद्योगों के लिए पर्याप्त जल की आवश्यकता होगी। यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में राज्य को जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। जदयू की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि वे गंगा और उसकी सहायक नदियों में राज्य की हिस्सेदारी सुनिश्चित कराने के लिए अपना प्रयास जारी रखेंगे।
फरक्का संधि की समय-सीमा और भविष्य
भारत और बांग्लादेश के बीच फरक्का जल संधि का समझौता दिसंबर 1996 में संपन्न हुआ था। इस संधि की कुल अवधि 30 वर्षों के लिए तय की गई थी। इस लिहाज से संधि के समाप्त होने की तिथि 12 दिसंबर 2026 है। अब जैसे-जैसे यह तारीख करीब आ रही है, संधि के नवीनीकरण को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। बिहार के लिए यह मुद्दा जीवन रेखा की तरह है क्योंकि गंगा का जल प्रवाह राज्य की कृषि और आर्थिक गतिविधियों का मुख्य आधार है। विदेश मंत्री के इस ताजा बयान के बाद राज्य की राजनीति में जल अधिकारों को लेकर चल रही मुहिम को एक नया संबल मिला है।
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