पटाया में अमेरिकी नौसैनिकों के उतरते ही पुलिस ने तेज की कार्रवाई
थाईलैंड के मशहूर शहर पटाया में इस समय एक अजीब सी हलचल और बेचैनी का माहौल है। इस हलचल के केंद्र में समंदर का एक विशालकाय दैत्य है, जो हाल ही में थाईलैंड के लाम चाबांग बंदरगाह पर आकर लंगर डाल चुका है। यह कोई और नहीं, बल्कि अमेरिकी नौसेना का शक्तिशाली विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन है। इस युद्धपोत के साथ लगभग 5,000 अमेरिकी नाविक और मरीन कमांडो थाईलैंड की सरजमीं पर उतरे हैं। जैसे ही इस जहाज के लंगर डालने की खबर सामने आई, थाई पुलिस ने पटाया की नाइटलाइफ और रेड-लाइट इलाकों में अपनी गश्त बढ़ा दी है और ताबड़तोड़ छापेमारी का सिलसिला शुरू हो गया है। प्रशासन की इस घबराहट और सख्ती के पीछे एक गहरा और काला इतिहास छिपा है, जो वियतनाम युद्ध के दिनों से जुड़ा है।
286 दिनों की थकान उतारने के लिए तैयार हैं 5,000 सैनिक
इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे मुड़कर देखना होगा। USS अब्राहम लिंकन की यात्रा बेहद चुनौतीपूर्ण रही है। यह युद्धपोत अपने गृह बंदरगाह सैन डिएगो से दूर पिछले 286 दिनों से समुद्र में तैनात था। इसने लगातार 250 से अधिक दिन बिना किसी पोर्ट विजिट के समुद्र की लहरों के बीच गुजारे हैं। नवंबर 2025 में जब यह जहाज रवाना हुआ था, तो इसे प्रशांत महासागर में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी थी, लेकिन मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध के कारण इसे तुरंत अरब सागर की तरफ मोड़ दिया गया। इन महीनों के दौरान सैनिकों ने ईरान की नाकेबंदी और अन्य युद्ध अभियानों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान जहाज से आई खबरें काफी परेशान करने वाली थीं, जिनमें खराब भोजन, टूटते हुए टॉयलेट्स और सबसे चिंताजनक सैनिकों के गिरते मानसिक स्वास्थ्य का जिक्र था। यहां तक कि अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों ने भी इस तैनाती के दौरान सैनिकों की बिगड़ती मानसिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अब जब 286 दिनों तक युद्ध के तनाव और समुद्र की कैद में रहने के बाद 5,000 नौसैनिक अचानक थाईलैंड की धरती पर कदम रख रहे हैं, तो थाईलैंड प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती है।
मछुआरों के गांव से अय्याशी के हब तक का सफर
पटाया और अमेरिकी सैनिकों का रिश्ता दशकों पुराना है। इस संबंधों की जड़ें 1960 के दशक के वियतनाम युद्ध के दौर में मिलती हैं। उन दिनों पटाया एक बेहद शांत और गुमनाम मछुआरों का गांव हुआ करता था, लेकिन वियतनाम युद्ध की विभीषिका के बीच अमेरिकी सेना ने इस जगह को अपने थके-हारे सैनिकों के लिए मनोरंजन और आराम के केंद्र के रूप में चुन लिया। लाखों अमेरिकी सैनिक जंग की खूनी यादों से दूर कुछ पल बिताने के लिए पटाया का रुख करने लगे। सैनिकों की इन जरूरतों को पूरा करने के लिए बार, क्लब और देह व्यापार का पूरा कारोबार पनपने लगा। धीरे-धीरे एक साधारण गांव दुनिया के सबसे बड़े सेक्स-टूरिज्म केंद्रों में तब्दील हो गया। यह एक विडंबना ही है कि आज भी थाईलैंड को एडल्ट सर्विसेज के आकर्षण के साथ प्रमोट किया जाता है, जबकि हकीकत में थाई कानूनों के अनुसार वेश्यावृत्ति पूरी तरह से गैर-कानूनी है। अनुमान के मुताबिक, सिर्फ पटाया शहर में ही 25,000 से लेकर 50,000 तक सेक्स वर्कर सक्रिय हैं।
अमेरिकी सैनिकों का डरावना अतीत और प्रशासन की तैयारी
थाईलैंड की पुलिस और अमेरिकी सैन्य कमान इस बात से बखूबी वाकिफ है कि इतने लंबे समय तक युद्ध के तनाव में रहने के बाद जब ये 5,000 सैनिक आजाद माहौल में निकलेंगे, तो हालात बेकाबू हो सकते हैं। अतीत में ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं जब नशे में धुत अमेरिकी सैनिकों ने हिंसा फैलाई, स्थानीय कानूनों का उल्लंघन किया और यौन शोषण जैसी घटनाओं को अंजाम दिया। यही कारण है कि सैनिकों के तट पर उतरने से पहले ही पुलिस ने 'सोई 6' (Soi 6) जैसे बदनाम इलाकों में सख्त चेकिंग अभियान शुरू कर दिया है। प्रशासन ने सुरक्षा जोखिम को कम करने और मानव तस्करी को रोकने के लिए कुछ कड़े नियम भी लागू किए हैं:
- नो-गो जोन: सैनिकों के लिए पटाया के कई चुनिंदा रेड-लाइट गलियारों और देह व्यापार के लिए बदनाम इलाकों में जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
- जोखिम भरे खेलों पर बैन: अमेरिकी कमान ने अपने नौसैनिकों के लिए गांजा बेचने वाली दुकानों पर जाने के अलावा जेट स्कीइंग, बंजी जंपिंग, रेसलिंग और मुक्केबाजी जैसे जोखिम भरे खेलों में भाग लेने पर रोक लगा दी है।
- सुरक्षा घेरा: सेलर्स को बंदरगाह से शहर तक लाने और ले जाने के लिए करीब 40 बसों का इंतजाम किया गया है और उन्हें केवल दो तय होटलों में ही रात बिताने की अनुमति दी गई है।
- निगरानी: शहर के नाइटलाइफ इलाकों में सैकड़ों अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति पर नजर रखी जा सके।
मंदी की मार झेल रहे कारोबारियों की उम्मीद
एक तरफ जहां थाई प्रशासन और अमेरिकी सेना कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर है, वहीं दूसरी ओर पटाया के स्थानीय कारोबारी अमेरिकी सैनिकों के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। सच तो यह है कि ईरान युद्ध की वजह से पटाया के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। शहर की मशहूर 'वॉकिंग स्ट्रीट' भले ही रोशनी से जगमगा रही हो, लेकिन पर्यटकों की भारी कमी ने स्थानीय दुकानदारों की कमर तोड़ दी है। ऐसे में 5,000 अमेरिकी सैनिकों का आगमन स्थानीय दुकानदारों के लिए किसी लॉटरी से कम नहीं है, भले ही इसके बदले में उन्हें अपनी सुरक्षा और नैतिकता की कीमत ही क्यों न चुकानी पड़े।
https://hindi.news18.com/world/rest-of-world-uss-abraham-lincoln-lands-in-pattaya-thai-police-raided-red-light-zones-over-us-military-dark-history-10801987.html