IMD का अलर्ट: बंगाल की खाड़ी में बना नया दबाव, इन राज्यों में अगले 48 घंटों में भारी बारिश का खतरा

भारतीय मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि बंगाल की खाड़ी में बन रहे नए दबाव के कारण अगले दो दिनों में पूर्वी और मध्य भारत के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश होगी। सितंबर की शुरुआत में मानसून की वापसी से उत्तर भारत को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

मानसून की नई करवट और मौसम का मिजाज

देश के विभिन्न हिस्सों में कमजोर पड़ चुका मानसून एक बार फिर से अपनी पूरी लय में लौटने को तैयार है। मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में एक नया मौसमी सिस्टम सक्रिय हो गया है, जो आने वाले समय में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है। इस नए दबाव के क्षेत्र के कारण पश्चिम बंगाल से लेकर बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तक मूसलाधार बारिश होने की प्रबल संभावना है। यह मौसमी बदलाव सितंबर महीने के पहले सप्ताह में मानसून की सक्रियता को नई गति देगा, जिससे फसलों और जलाशयों के लिए पानी की उपलब्धता में सुधार हो सकता है।

अगले 48 घंटों में भारी बारिश का अनुमान

मौसम वैज्ञानिकों ने भविष्यवाणी की है कि अगले 48 घंटों के भीतर बंगाल की खाड़ी में बना यह कम दबाव का क्षेत्र और अधिक गहरा हो जाएगा, जिसका सीधा असर तटवर्ती इलाकों पर पड़ेगा। इस सिस्टम के प्रभाव से पश्चिम बंगाल और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। साथ ही, झारखंड और बिहार के मैदानी इलाकों में भी बारिश का दायरा बढ़ने की पूरी उम्मीद है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने स्पष्ट किया है कि 31 अगस्त को पश्चिम बंगाल और झारखंड के कई स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। इसके बाद, 1 सितंबर 2026 तक इसका व्यापक असर ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिलेगा। विशेष रूप से ओडिशा में 30 और 31 अगस्त को अत्यंत भारी बारिश होने की चेतावनी दी गई है, जबकि छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में 31 अगस्त को भारी जलवृष्टि की स्थिति बनी रह सकती है।

उत्तर भारत में मानसून की वापसी

सितंबर के पहले सप्ताह में उत्तर भारत के निवासियों के लिए राहत भरी खबर है। मौसम के जानकारों के अनुसार, मानसून की धुरी (Monsoon Trough) धीरे-धीरे उत्तर भारत के मैदानी इलाकों की ओर खिसक सकती है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो 2 और 3 सितंबर के आसपास दिल्ली, पूर्वी हरियाणा, पूर्वी पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में झमाझम बारिश शुरू हो सकती है। अगस्त के अंतिम दिनों में गर्मी और उमस से जूझ रहे इन राज्यों के लिए यह बारिश एक बड़ी राहत साबित हो सकती है। दिल्ली-एनसीआर (NCR) में भी इन तारीखों के आसपास मध्यम से लेकर भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।

पूर्वी और मध्य भारत में हालिया स्थिति

पिछले 24 घंटों के दौरान मौसम का मिजाज काफी आक्रामक रहा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा, झारखंड, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में बहुत भारी बारिश के समाचार हैं। बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और कोंकण एवं गोवा के क्षेत्रों में भी भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है। यह आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि मानसून की गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं, बल्कि वे एक नए चक्र में प्रवेश कर रही हैं।

किन इलाकों में अभी भी सूखे जैसे हालात?

जहां पूर्वी और मध्य भारत में बारिश की वापसी से खुशी का माहौल है, वहीं देश के कुछ अन्य हिस्सों के लिए चिंताएं बरकरार हैं। पश्चिमी पंजाब, पश्चिमी हरियाणा, पश्चिमी और मध्य राजस्थान तथा गुजरात के अधिकांश हिस्सों में शुष्क मौसम बना रह सकता है। इन क्षेत्रों में मानसून की धुरी प्रभावी नहीं हो पा रही है, जिसके चलते वहां बारिश की भारी कमी देखी जा रही है। इन इलाकों में पहले से ही सूखे जैसे हालात हैं और सितंबर की शुरुआत में भी इनमें किसी बड़े बदलाव या सुधार की उम्मीद कम है।

दक्षिण भारत में कमजोर मानसून

क्षेत्रीय स्तर पर मानसून की गतिविधियों में भारी असमानता देखने को मिल रही है। एक तरफ जहां बंगाल की खाड़ी से उठा सिस्टम पूर्वी और मध्य भारत को भिगोने की तैयारी में है, वहीं दूसरी तरफ प्रायद्वीपीय भारत में अगले एक सप्ताह तक बारिश का जोर काफी कम रहने वाला है। इससे स्पष्ट होता है कि आने वाले कुछ दिन उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के लिए तो सक्रिय रहेंगे, लेकिन दक्षिण भारत में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी बनी रहेगी।

क्या हैं चुनौतियां?

मानसून की इस नई लहर से एक ओर कृषि क्षेत्र में खरीफ की फसलों को फायदा मिलने की उम्मीद है, तो दूसरी ओर उन क्षेत्रों के लिए यह चिंता का विषय भी है जहां नदियां पहले से ही उफान पर हैं। अतिरिक्त बारिश के कारण जलस्तर और बढ़ सकता है, जिससे निचले इलाकों में गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। प्रशासन को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भारी बारिश के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा सकें।

कुल मिलाकर, सितंबर का पहला सप्ताह भारत के बड़े हिस्से के लिए मौसम के लिहाज से काफी उतार-चढ़ाव भरा रहने वाला है। एक तरफ जहां भारी बारिश से कई इलाकों को जलभराव का सामना करना पड़ सकता है, तो वहीं सूखा झेल रहे क्षेत्रों को अभी भी अच्छी बारिश के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

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