आरक्षण पर एनडीए के भीतर मची रार
केंद्र सरकार में शामिल दो प्रमुख सहयोगी दलों के नेताओं के बीच आरक्षण के मुद्दे पर छिड़ा विवाद अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के भीतर उप-वर्गीकरण तथा क्रीमी लेयर को लागू करने के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद उपजी बहस ने एनडीए के दो कद्दावर मंत्रियों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर दिया है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान और हम पार्टी के प्रमुख जीतन राम मांझी के बीच जारी यह जुबानी जंग अब इस्तीफे की मांग तक पहुंच चुकी है। इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में भी खलबली मचा दी है।
विवाद की जड़ और दोनों नेताओं का रुख
यह पूरा विवाद सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हाल ही में दिए गए उस निर्णय के इर्द-गिर्द घूम रहा है, जिसमें दलितों और आदिवासियों के भीतर उप-वर्गीकरण की अनुमति दी गई है। इसके साथ ही क्रीमी लेयर का मुद्दा भी इस बहस का अहम हिस्सा बन गया है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का मानना है कि दलित समुदाय के भीतर भी कई ऐसी उप-जातियां हैं जो वर्षों से आरक्षण के लाभ से वंचित हैं। मांझी के अनुसार, समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों तक हक पहुंचाने के लिए उप-वर्गीकरण और क्रीमी लेयर का प्रावधान अत्यंत आवश्यक है। उनका तर्क है कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो वंचित वर्गों का सही विकास संभव नहीं हो पाएगा।
दूसरी ओर, चिराग पासवान इस कदम का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। चिराग पासवान का स्पष्ट स्टैंड है कि इस तरह के प्रावधान दलित समुदाय की एकजुटता को कमजोर कर सकते हैं। वे इसे आरक्षण के मूल उद्देश्य के खिलाफ मानते हैं। चिराग पासवान के अनुसार, इस प्रकार का विभाजन समाज के ताने-बाने को नुकसान पहुंचा सकता है। यही वैचारिक मतभेद अब व्यक्तिगत हमले और इस्तीफे की मांग में तब्दील हो चुका है।
चिराग पासवान का आक्रामक तेवर
जीतन राम मांझी के बयानों से खफा चिराग पासवान ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह मांग की है कि जो नेता दलित समुदाय के हितों के विरुद्ध विभाजनकारी बातें कर रहे हैं, उन्हें मंत्रिमंडल में रहने का कोई हक नहीं है। इसी कड़ी में चिराग पासवान ने जीतन राम मांझी और उनके बेटे संतोष सुमन से केंद्रीय और राज्य मंत्री पद से इस्तीफा देने की मांग कर दी। चिराग के समर्थकों का मानना है कि आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सरकार के अंदर रहते हुए ऐसा रुख अपनाना गठबंधन की मर्यादा के खिलाफ है।
जीतन राम मांझी का पलटवार
इस्तीफे की मांग पर जीतन राम मांझी ने भी पीछे हटने से इनकार कर दिया है। उन्होंने चिराग पासवान के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक बचकानी मांग करार दिया है। मांझी ने स्पष्ट रूप से कहा कि जो लोग गरीबों के उत्थान और सामाजिक न्याय के बड़े उद्देश्य को नहीं समझ पा रहे हैं, उन्हें अपने सोचने के तरीके पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वे समाज के सबसे कमजोर और दबे-कुचले वर्ग के हक के लिए अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें किसी भी हद तक जाना पड़े। मांझी ने भी पलटवार करते हुए चिराग पासवान से इस्तीफे की मांग कर डाली है, जिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई है।
राजनीतिक भविष्य और एनडीए की चिंता
एनडीए के दो मंत्रियों का इस प्रकार सार्वजनिक मंचों से एक-दूसरे को चुनौती देना विपक्षी दलों के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया है। विपक्ष इस कलह को एनडीए की अंदरूनी कमजोरी के रूप में देख रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस विवाद को समय रहते नहीं सुलझाया गया, तो यह गठबंधन के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। अब सभी की निगाहें भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या हस्तक्षेप करते हैं और इस विवाद को शांत करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहार की सियासत में अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश में जुटे ये दोनों नेता अपनी मांगों पर कितने समय तक अडिग रहते हैं।
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