मजदूर पिता की बेटी सुशीला प्रजापत का कमाल, 10 हजार मीटर दौड़ में जीता 8वां स्वर्ण पदक

राजस्थान की सुशीला प्रजापत ने एथलेटिक्स चैंपियनशिप में अपनी दौड़ से सबका दिल जीत लिया है। बीएसएफ में नौकरी करने के साथ ही वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने की तैयारी कर रही हैं।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के अंतर्गत आने वाले हीरावती गांव की रहने वाली सुशीला प्रजापत ने अपनी मेहनत के दम पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में संपन्न हुई राजस्थान स्टेट अंडर-23 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इस प्रतियोगिता में सुशीला ने 10 हजार मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक यानी गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इसके अलावा उन्होंने 5 हजार मीटर की दौड़ में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता है।

साधारण शुरुआत और असाधारण अनुशासन

सुशीला का जीवन संघर्ष और दृढ़ संकल्प की एक प्रेरणादायक कहानी है। एक मजदूर पिता की बेटी होने के नाते उन्होंने अभावों को कभी अपनी प्रगति के आड़े नहीं आने दिया। अपने खेल के सफर की शुरुआत उन्होंने गांव में अपनी सहेलियों के साथ दौड़कर की थी। धीरे-धीरे यह शौक उनके जुनून में बदल गया और आज वह एक कुशल लंबी दूरी की धाविका के रूप में जानी जाती हैं। उनकी मेहनत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह प्रतिदिन 15 से 18 किलोमीटर तक का अभ्यास करती हैं।

बीएसएफ की वर्दी और ऊंचे लक्ष्य

सुशीला ने अपनी मेहनत के बलबूते सरकारी नौकरी भी हासिल की है। लगभग छह महीने पहले उन्होंने सीमा सुरक्षा बल यानी BSF ज्वाइन किया था। नौकरी की जिम्मेदारियों और कड़े अनुशासन के बीच भी उन्होंने अपने खेल के प्रति समर्पण को कम नहीं होने दिया और ट्रेनिंग लगातार जारी रखी है।

अगला लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय मंच

सुशीला प्रजापत के लिए यह स्वर्ण पदक उनके करियर का 8वां गोल्ड मेडल है। फिलहाल उनका पूरा ध्यान आगामी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर टिका है। उनकी भविष्य की योजना के बारे में बात करें तो वह राष्ट्रीय स्तर पर और पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना देख रही हैं। उनकी यह यात्रा उन सभी युवाओं के लिए मिसाल है जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने का हौसला रखते हैं।

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