नेपाल में प्रलयकारी बाढ़ का कहर: 288 भारतीय नागरिक लापता, विदेश मंत्रालय ने सक्रिय किया विशेष कंट्रोल रूम

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही मची है, जिसमें 178 लोगों की मौत हो चुकी है। लापता लोगों में 288 भारतीय भी शामिल हैं, जिनकी सुरक्षा और मदद के लिए भारत सरकार ने विशेष हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम स्थापित किया है।

पड़ोसी देश नेपाल में कुदरत का भयंकर कहर देखने को मिल रहा है। वहां आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें अब तक 178 लोगों की मौत हो चुकी है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि 700 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। इस भीषण प्राकृतिक आपदा के बीच बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के भी फंसे होने की खबर है, जिसके बाद भारत सरकार पूरी तरह सक्रिय हो गई है।

विदेश मंत्रालय का एक्शन और लापता भारतीयों का आंकड़ा

नेपाल में पैदा हुए इस गंभीर संकट को देखते हुए भारत के विदेश मंत्रालय ने एक विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किया है, ताकि प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद की जा सके। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जानकारी दी है कि भारत के PM ने नेपाल के प्रधानमंत्री से फोन पर बात कर एकजुटता प्रकट की है और इस कठिन समय में हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, नेपाल में आई इस आपदा के बाद कुल 288 भारतीय नागरिक लापता बताए जा रहे हैं। लापता भारतीयों का विवरण इस प्रकार है:

  • नेपाल की त्रिशूली परियोजना में काम करने वाले 73 भारतीय नागरिक लापता हैं।
  • कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तमिलनाडु के श्रद्धालुओं के दो अलग-अलग जत्थे लापता हैं, जिनमें एक समूह में 37 और दूसरे समूह में 49 लोग शामिल हैं।
  • पश्चिम बंगाल के रहने वाले 32 लोग लापता बताए जा रहे हैं।
  • देश के अन्य अलग-अलग राज्यों से आए करीब 61 लोग भी बाढ़ प्रभावित इलाकों से लापता हैं।

मृतकों का आंकड़ा बढ़ा, बहकर दूर पहुंचे शव

नेपाल की रेस्क्यू एजेंसियों के लिए मलबे से शवों को निकालना और लापता लोगों को ढूंढना बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। अब तक मिले शवों में सबसे अधिक 64 शव चितवन से बरामद किए गए हैं। इसके अलावा, धादिंग से 27 शव, नवलपरासी पूर्व से 26 शव, गोरखा जिले से 20 शव और नुवाकोट से 12 शव मिले हैं।

पानी का बहाव इतना तेज था कि रसुवा के इलाके में बाढ़ की चपेट में आए लोगों के शव करीब 150 किलोमीटर दूर चितवन में मिल रहे हैं। खराब मौसम और टूटी हुई सड़कों की वजह से राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस त्रासदी में भारतीय नागरिकों के साथ-साथ सैकड़ों अन्य विदेशी पर्यटक भी लापता हैं।

ग्लेशियर फटने से मची तबाही का खौफनाक मंजर

इस प्रलयकारी सैलाब का मुख्य कारण तिब्बत में ग्लेशियर फटना बताया जा रहा है। ग्लेशियर फटने की वजह से भारी मात्रा में पानी और मलबा नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आ गया। इसके बाद नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा और अचानक आई बाढ़ ने भयानक रूप ले लिया। पानी की लहरें करीब 30 फीट ऊंचाई तक उठ रही थीं, जिसने रास्ते में आने वाली हर चीज को तबाह कर दिया।

इस तबाही की चपेट में आकर कई घर और गाड़ियां ताश के पत्तों की तरह बह गए। बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है, जिसमें 19 पुल, करीब 40 किलोमीटर लंबा हाईवे और 9 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पूरी तरह जमींदोज हो गए हैं। प्रशासन लगातार मलबे में दबे जीवित लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिशों में जुटा हुआ है।

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