धान की खेती पर बीमारियों का साया
वर्तमान में धान की फसल अपनी विकास अवस्था में है और किसान अपनी फसलों की देखभाल और निराई-गुड़ाई के काम में व्यस्त हैं। हालांकि, इस समय मौसम की परिस्थितियों के कारण खेतों में विभिन्न प्रकार के रोगों के फैलने की पूरी संभावना बनी हुई है। कृषि विज्ञान केंद्र बालोद की प्लांट पैथोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. भीमेश्वरी साहू ने किसानों को आगाह करते हुए कहा है कि इस चरण में लापरवाही महंगी साबित हो सकती है। धान की फसल को मुख्य रूप से ब्लास्ट, जीवाणु झुलसा और शीथ ब्लाइट जैसी बीमारियों से बचाने की तत्काल आवश्यकता है।
ब्लास्ट रोग: पहचान और उपचार
डॉ. साहू के अनुसार, धान में ब्लास्ट रोग का मुख्य कारण फफूंद है। इस बीमारी की शुरुआत पत्तियों पर हल्के मटमैले रंग के छोटे धब्बों के रूप में होती है। समय के साथ ये धब्बे गहरे भूरे रंग के हो जाते हैं और धीरे-धीरे पूरे पत्तों पर फैल जाते हैं। यदि सही समय पर नियंत्रण न किया जाए, तो यह पूरी फसल को प्रभावित कर सकता है। इसके प्रभावी नियंत्रण के लिए किसान एजोक्सीस्ट्रोबिन और टेबुकोनाजोल के मिश्रण वाली दवा का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए दवा को 1.5 एमएल प्रति लीटर पानी की दर से घोलकर छिड़काव करना चाहिए। बेहतर परिणाम के लिए आवश्यकतानुसार 10 से 15 दिन के अंतराल पर दोबारा छिड़काव करना उचित रहता है।
जीवाणु झुलसा से बचाव के उपाय
जीवाणु झुलसा धान की एक गंभीर समस्या है जो फसल को भीतर से खोखला कर देती है। इस रोग के लक्षण पत्तियों के ऊपरी भाग से शुरू होते हैं, जहां से पीलापन धीरे-धीरे पूरी पत्ती में नीचे की ओर बढ़ने लगता है। अंत में पूरी पत्ती सूख जाती है और पौधा झुलसा हुआ नजर आता है। डॉ. साहू ने स्पष्ट किया है कि यह जीवाणु जनित संक्रमण है। इससे निपटने के लिए खेत में यूरिया के प्रयोग को नियंत्रित रखना बहुत आवश्यक है। रोग का प्रकोप दिखने पर यूरिया का उपयोग पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। इसके अलावा, खेत में लगातार पानी भरने से बचना चाहिए। उपचार हेतु स्ट्रेप्टोमाइसिन को 3 ग्राम प्रति स्प्रे कैन की मात्रा में इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
शीथ ब्लाइट: पत्तियों पर धब्बों का खतरा
धान के खेतों में अक्सर शीथ ब्लाइट का प्रभाव भी देखा जाता है। यह बीमारी फफूंद के कारण फैलती है। इसमें जल स्तर से ऊपर के तने और पत्तियों पर अनियमित आकार के धब्बे दिखाई देने लगते हैं। यदि किसान इसे समय रहते नहीं पहचानते, तो यह तने को कमजोर कर देता है। इसके समाधान के लिए हेक्साकोनाजोल का उपयोग करना सबसे प्रभावी माना गया है। किसान इसे 1.5 से 2 एमएल या ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे कर सकते हैं। यदि संक्रमण अधिक हो, तो 10 से 12 दिन के अंतर पर इसका दोबारा छिड़काव करना फसल के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है।
कृषि विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण सलाह
कृषि विशेषज्ञ ने समस्त किसानों से अपील की है कि वे नियमित रूप से अपने खेतों का मुआयना करें। यदि पत्तियों पर किसी भी तरह के असामान्य धब्बे, पीलापन, या झुलसने के लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत कृषि विशेषज्ञों से संपर्क करें। किसी भी रासायनिक उपचार से पहले रोग की सही पहचान करना और विशेषज्ञ की सलाह लेना फसल की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। सही समय पर लिया गया निर्णय और सटीक दवा का छिड़काव ही आपकी मेहनत को बर्बाद होने से बचा सकता है।
https://hindi.news18.com/news/agriculture/paddy-crop-these-3-diseases-prevention-tips-local18-10779060.html