जयपुर की ऐतिहासिक पहचान के लिए जन आक्रोश
राजस्थान की राजधानी जयपुर के प्रसिद्ध परकोटा क्षेत्र में अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोने और वहां से हो रहे बड़े पैमाने पर पलायन के खिलाफ समाज में भारी आक्रोश देखने को मिला है। अपनी जड़ों को बचाने और शहर के मूल स्वरूप को सुरक्षित रखने की मांग को लेकर जयपुर की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। युवा शक्ति मंच राजस्थान के आह्वान पर निकाली गई इस विशाल भगवा आक्रोश रैली में हजारों की संख्या में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पूरा शहर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा और चारों तरफ भगवा रंग की छटा दिखाई दी।
2100 महिलाओं की अगुवाई में निकला विशाल जुलूस
इस रैली की सबसे बड़ी विशेषता इसका अनुशासित और सशक्त नेतृत्व रहा। भगवा वस्त्र धारण किए हुए 2100 महिलाएं हाथों में धर्मध्वजा थामे इस रैली के सबसे आगे चल रही थीं। यह दृश्य महिला शक्ति के साथ-साथ धर्म के प्रति उनकी गहरी निष्ठा का प्रमाण था। महिलाओं की इस टुकड़ी के ठीक पीछे जनसमूह का ऐसा विशाल हुजूम था कि जहां तक नजर जाए, वहां तक केवल लोग ही दिखाई दे रहे थे। रैली के साथ सैकड़ों की तादाद में दोपहिया और चौपहिया वाहन भी शामिल थे, जिनमें सवार युवा लगातार अपने जोश भरे नारों से वातावरण को गुंजायमान कर रहे थे।
खुले के हनुमान जी से रामलीला मैदान तक का सफर
दिल्ली रोड स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल खोले के हनुमान जी मंदिर से शुरू होकर यह रैली शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए पुलिस द्वारा कड़े इंतजाम किए गए थे और कई मार्गों पर रूट डायवर्ट किए गए थे। बावजूद इसके, जनता का उत्साह पुलिस की व्यवस्थाओं से कहीं अधिक प्रबल था। रैली जिस-जिस मार्ग से गुजरी, वहां के स्थानीय निवासियों और दुकानदारों ने पुष्प वर्षा कर रैली में शामिल लोगों का अभिनंदन किया। यह पूरा मार्ग भगवा झंडों से पट गया था। अंत में, यह विशाल रैली एमआई रोड स्थित ऐतिहासिक रामलीला मैदान में पहुंची, जहां यह एक बड़ी जनसभा में परिवर्तित हो गई।
संतों का संबोधन और सांस्कृतिक संरक्षण की पुरजोर मांग
रामलीला मैदान में पहुंचकर देश के विभिन्न कोनों से आए संतों और महात्माओं ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। अपने ओजस्वी वचनों के माध्यम से उन्होंने जयपुर के प्राचीन वैभव को अक्षुण्ण रखने की अपील की। युवा शक्ति मंच राजस्थान के प्रदेश संयोजक सुनील सिंह शेखावत ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जयपुर की सांस्कृतिक विरासत केवल एक शहर की धरोहर नहीं है, बल्कि यह पूरे देश और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य थाती है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि परकोटे के भीतर से जिस तरह बहुसंख्यक समाज का पलायन हो रहा है, वह एक गंभीर संकट है जिसे रोकना अब अनिवार्य हो गया है। इस धरोहर को बचाना और इसके मूल स्वरूप को सुरक्षित रखना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है।
प्रशासन और सरकार को स्पष्ट संदेश
यह भगवा आक्रोश रैली महज एक प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि समाज की ओर से अपनी सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए उठाई गई एक सामूहिक आवाज थी। रैली के माध्यम से शासन और प्रशासन को यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि जयपुर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक वैभव को धूमिल होने से बचाने के लिए अब ठोस कदम उठाने की जरूरत है। इस आयोजन ने यह साबित कर दिया है कि जयपुर की जनता अपनी संस्कृति और अस्तित्व की रक्षा के लिए एकजुट है और किसी भी स्थिति में अपनी विरासत के साथ समझौता करने को तैयार नहीं है। इस रैली के कारण शहर के कई हिस्सों में यातायात प्रभावित रहा, लेकिन लोगों का उत्साह अंत तक बना रहा।
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