बाब अल-मंदेब में दिखा भारतीय नौसेना का दम, समुद्री लुटेरों के गढ़ से सुरक्षित निकला भारत का तेल टैंकर

लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच मौजूद बेहद खतरनाक समुद्री क्षेत्र बाब अल-मंदेब से भारतीय नौसेना ने अपने तेल टैंकर को सुरक्षित निकाला है, जबकि इसी इलाके में लुटेरों ने तुर्की के हथियारों से लदे जहाज समेत दो जहाजों को बंधक बना रखा है।

बाब अल-मंदेब में सुरक्षा का कड़ा पहरा

दुनिया भर में समुद्री व्यापार के लिए सबसे संवेदनशील माने जाने वाले समुद्री मार्गों में से एक, बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य, इन दिनों भारी उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला यह मार्ग ऊर्जा आपूर्ति के नजरिए से भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बाद, अब अधिकांश तेल और गैस की खेप इसी रास्ते से होकर आ रही है। हाल ही में, एक भारतीय तेल टैंकर ने इसी हाई-रिस्क जोन से अपनी यात्रा सुरक्षित पूरी की है। इस पूरे सफर के दौरान भारतीय नौसेना की मुस्तैदी ने किसी भी अप्रिय घटना को टाल दिया, जिससे समुद्री लुटेरों और हूती विद्रोहियों का दुस्साहस धरे का धरा रह गया।

भारतीय नौसेना की निगरानी में सुरक्षित सफर

इस पूरे ऑपरेशन की जानकारी देते हुए भारतीय नौसेना ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है कि क्रूड ऑयल टैंकर एमटी सनमार हेराल्ड (MT Sanmar Herald) को इस चुनौतीपूर्ण समुद्री गलियारे से सुरक्षित निकाला गया। नौसेना ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर इस सफलता का ब्योरा साझा करते हुए बताया कि 20 अगस्त 2026 को मिशन पर तैनात उनकी एक यूनिट ने इस पूरे ट्रांजिट की बारीकी से निगरानी की। नौसेना का स्पष्ट संदेश था कि भारत अपने समुद्री हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। यही कारण है कि जहां लुटेरों ने अन्य जहाजों को निशाना बनाया, वहीं भारतीय टैंकर बिना किसी बाधा के अपनी मंजिल की ओर आगे बढ़ गया।

क्षेत्र में फैला है समुद्री लुटेरों का खौफ

बाब अल-मंदेब क्षेत्र की स्थिति इन दिनों बेहद नाज़ुक बनी हुई है। यमन और सोमालिया के तटों के पास समुद्री लुटेरों और हूती विद्रोहियों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। हूती विद्रोही जहां ईरान के समर्थन में सऊदी अरब के हितों को सीधे निशाना बना रहे हैं, वहीं पंटलैंड तट के आसपास सक्रिय समुद्री लुटेरे मौका मिलते ही वाणिज्यिक जहाजों को अपना शिकार बना लेते हैं। पिछले कुछ दिनों में हुई घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। इन लुटेरों ने हाल ही में दो बड़े मालवाहक जहाजों को अपने कब्जे में लिया है, जिनमें कुल 22 भारतीय नागरिक सवार थे। यह घटनाक्रम क्षेत्र में बढ़ती असुरक्षा की गंभीरता को दर्शाता है।

बंधक जहाजों की भयावह स्थिति

समुद्री लुटेरों के बढ़ते आतंक का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 17 अगस्त और 20 अगस्त को दो अलग-अलग जहाजों पर अपना कब्जा जमा लिया। पहली घटना में कैमरून के झंडे वाला एक मालवाहक जहाज शामिल है, जिसे 17 अगस्त को सोमालिया के पंटलैंड तट के निकट बंधक बनाया गया। इस जहाज पर 10 सदस्यीय चालक दल मौजूद था, जिसमें से 6 भारतीय नाविक हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एम/वी लुतुफ नामक इस जहाज को तट से महज साढ़े तीन नॉटिकल मील दूर रोका गया था। हैरान करने वाली बात यह है कि इस जहाज पर तुर्की के हथियार लदे हुए थे, जिन्हें मोगादिशु ले जाया जा रहा था। लुटेरों ने जहाज को नूगाल तट की दिशा में अगवा कर लिया है।

इरिट्रिया के झंडे वाले टैंकर पर भी हमला

दूसरी घटना 20 अगस्त को सामने आई, जहां इरिट्रिया के झंडे वाले ऑयल प्रोडक्ट्स टैंकर एमटी सिबू-1 (MT Sibu 1) को यमन के तट से करीब 30 नॉटिकल मील दूर गल्फ ऑफ एडन में हथियारबंद समुद्री लुटेरों ने घेर लिया। इस टैंकर पर कुल 20 चालक दल के सदस्य तैनात थे, जिनमें 16 भारतीय नागरिक शामिल हैं। एक ओर जहां बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य का यह मार्ग भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति की जीवन रेखा है, वहीं इन घटनाओं ने समुद्री व्यापार में काम करने वाले भारतीयों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन तमाम चुनौतियों के बीच, भारतीय नौसेना द्वारा एमटी सनमार हेराल्ड को सुरक्षित निकालना एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जिसने यह साबित कर दिया है कि सुरक्षा का घेरा होने पर समुद्री लुटेरे भारतीय जहाजों की तरफ आंख उठाकर देखने की हिम्मत भी नहीं कर सकते।

https://hindi.news18.com/news/nation/indian-navy-successfully-escort-crude-oil-tanker-mt-sanmar-herald-bab-el-mandeb-strait-red-sea-gulf-of-aden-10774552.html