दार्जिलिंग की राजनीति में केंद्र का बड़ा दखल
पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग के पहाड़ी इलाकों में लंबे समय से चली आ रही गोरखा पहचान और प्रशासनिक अधिकारों की मांग को लेकर केंद्र सरकार ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में सुकना में दार्जिलिंग हिल्स से जुड़े राजनीतिक नेताओं के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक की है। इस दौरान उन्होंने आश्वासन दिया है कि केंद्र सरकार इस जटिल विवाद का एक स्थायी राजनीतिक समाधान निकालने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
संविधान के दायरे में होगा समाधान
सुकना में आयोजित इस बैठक के दौरान गृह मंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि इस पूरे मसले का हल देश के संविधान के दायरे के भीतर रहकर ही निकाला जाएगा। उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल के विभाजन के किसी भी विकल्प पर विचार नहीं करेगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि गोरखा समुदाय की राजनीतिक आकांक्षाओं, उनकी विशिष्ट पहचान और प्रशासनिक स्वायत्तता की मांगों को तो सुना जाएगा, लेकिन राज्य की भौगोलिक अखंडता से कोई समझौता नहीं होगा।
हाईलेवल कमेटी तैयार करेगी रोडमैप
इस स्थायी समाधान की प्रक्रिया को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने एक हाईलेवल कमेटी का गठन करने का निर्णय लिया है। इस महत्वपूर्ण समिति की कमान पूर्व डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर और केंद्र के पूर्व वार्ताकार पंकज कुमार सिंह को सौंपी गई है। समिति की जिम्मेदारियां काफी व्यापक हैं, जिसमें शामिल हैं:
- संभावित अंतिम समझौते का एक विस्तृत मसौदा तैयार करना।
- समझौते के तौर-तरीकों को निर्धारित करना।
- समाधान को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए एक स्पष्ट और प्रभावी रोडमैप बनाना।
पहाड़ी इलाकों में स्थिरता की तलाश
दार्जिलिंग के पहाड़ी क्षेत्रों में दशकों से गोरखा समुदाय के मुद्दे राजनीतिक अस्थिरता का मुख्य केंद्र रहे हैं। बार-बार होने वाले आंदोलनों के कारण यहां का सामान्य जनजीवन और विकास कार्य प्रभावित होते रहे हैं। बैठक में यह चर्चा मुख्य रही कि किस प्रकार संवैधानिक ढांचे के अंदर रहकर पहाड़ी क्षेत्रों को अधिक प्रशासनिक स्वायत्तता प्रदान की जा सकती है। यह प्रयास गोरखा समुदाय की विशिष्ट सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान को मुख्यधारा में मान्यता दिलाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
हालांकि, इस पूरी कवायद का अंतिम स्वरूप और इसके तहत मिलने वाली सुविधाएं क्या होंगी, यह सब पंकज कुमार सिंह के नेतृत्व वाली हाईलेवल कमेटी की सिफारिशों और विभिन्न पक्षों के साथ होने वाली गहन बातचीत के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। फिलहाल, सरकार का यह कदम दार्जिलिंग की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।
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