रक्षाबंधन पर मिठाई खरीदना हुआ मुश्किल, आसमान छूते दामों ने बिगाड़ा आम लोगों का बजट

रक्षाबंधन के नजदीक आते ही मिठाई और उससे जुड़ी जरूरी सामग्रियों के दाम तेजी से बढ़ गए हैं, जिससे ग्राहकों और दुकानदारों दोनों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

त्योहारों के मौसम में महंगाई का असर

रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक है और पूरे देश में इसे लेकर उत्साह का माहौल है। लेकिन, इस बार बाजारों में रौनक के साथ-साथ महंगाई की चिंता भी साफ देखी जा सकती है। त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही मिठाइयों की कीमतों में जो उछाल आया है, उसने आम आदमी की जेब पर बड़ा असर डाला है। मिठाइयों के स्वाद में अब महंगाई की कड़वाहट घुल गई है, जिसके चलते लोग अपनी खरीदारी को सीमित करने पर मजबूर हो गए हैं।

चीनी की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी

मिठाई उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि लागत में हुई अप्रत्याशित वृद्धि ने उनका काम मुश्किल कर दिया है। चीनी के कारोबार में पिछले 25 वर्षों से सक्रिय विकास के अनुसार, उन्होंने चीनी के दामों में ऐसी तेजी पहले कभी नहीं देखी है। चीनी का थोक भाव बढ़कर लगभग 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुका है। इस मूल्य वृद्धि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जो ट्रक पहले करीब 15 लाख रुपये में आता था, अब उसे खरीदने के लिए 22 से 30 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।

बाजार में चीनी के इतने ऊंचे दामों के पीछे का एक बड़ा कारण डर और बाजार में फैली चर्चा को भी माना जा रहा है। जैसे ही लोगों के बीच यह खबर फैली कि चीनी के दाम और भी बढ़ सकते हैं, लोगों ने जरूरत से ज्यादा स्टॉक करना शुरू कर दिया। जिस परिवार को 5 किलो चीनी की जरूरत थी, उन्होंने 50 किलो तक खरीदकर घर में जमा कर ली। मांग में अचानक आई इस बढ़ोतरी ने कीमतों पर और दबाव बना दिया है। इसके अलावा, गन्ने की गुणवत्ता में कमी और उत्पादन में गिरावट को भी इस महंगाई का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। हालांकि, बाजार में चीनी से एथेनॉल बनाने को लेकर चल रही चर्चाओं पर कारोबारियों का अलग मत है। उनका मानना है कि एथेनॉल के लिए गन्ने के रस और उप-उत्पादों का उपयोग होता है, लेकिन फिलहाल इससे जुड़ी गलत धारणाओं ने बाजार को प्रभावित किया है।

ड्राई फ्रूट्स और घी के बढ़ते दाम

सिर्फ चीनी ही नहीं, बल्कि ड्राई फ्रूट्स के बाजार में भी आग लगी हुई है। बादाम गिरी की बात करें तो इसके दामों में 100 से 150 रुपये प्रति किलो तक की तेजी दर्ज की गई है। सप्लाई चेन में बाधा और बढ़ती लागत के कारण, व्यापारियों को आशंका है कि आने वाले दिनों में बादाम गिरी का भाव 1,250 रुपये प्रति किलो के स्तर तक पहुंच सकता है। काजू, किशमिश और पिस्ता जैसे ड्राई फ्रूट्स भी काफी महंगे हो गए हैं, जिससे मिठाई बनाने की लागत लगातार बढ़ती जा रही है।

मिठाई कारोबारियों के लिए घी और रिफाइंड तेल की कीमतों में हुई वृद्धि भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। आंकड़ों के अनुसार, घी और रिफाइंड के दाम में करीब 500 रुपये तक का इजाफा हुआ है। सामग्री के अलावा, पैकिंग मटेरियल की बढ़ती कीमतों ने भी दुकानदारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है।

ग्राहकों की बदलती खरीदारी

मिठाई विक्रेता गुरमीत सिंह बताते हैं कि कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण उनके लिए अंतिम उत्पाद की कीमतें बढ़ाना एक मजबूरी बन गया है। इसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ रहा है। पहले जो ग्राहक आसानी से एक किलो मिठाई खरीद लिया करते थे, वे अब आधा किलो खरीदकर ही काम चलाने का प्रयास कर रहे हैं। दुकानदार का कहना है कि वे दाम नहीं बढ़ाना चाहते, लेकिन लागत इतनी अधिक है कि बिना मूल्य वृद्धि के व्यवसाय को जारी रखना संभव नहीं है।

आम उपभोक्ताओं का बजट पूरी तरह से बिगड़ चुका है। रमेश मल्होत्रा ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी आमदनी में कोई उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि दूध, घी, चीनी और तेल जैसी रोजमर्रा की चीजें लगातार महंगी होती जा रही हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि महंगाई पर लगाम लगाने के लिए उचित कदम उठाए जाएं।

दिहाड़ी मजदूरी करने वाले सुखविंदर सिंह का कहना है कि त्योहारों का समय उनके लिए खुशियों के बजाय तनाव लेकर आता है। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन जैसे त्योहार पर मिठाइयां खरीदना अब मुश्किल होता जा रहा है। उनकी आमदनी उतनी ही है, लेकिन महंगाई ने उनकी क्रय शक्ति को आधा कर दिया है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, इस वर्ष रक्षाबंधन पर महंगाई की मार साफ देखी जा सकती है। चीनी से लेकर घी और ड्राई फ्रूट तक हर चीज महंगी होने के कारण मिठाई उद्योग संकट के दौर से गुजर रहा है। दूसरी ओर, आम आदमी त्योहार मनाने के लिए अपने बजट में कटौती करने को मजबूर है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो आगामी त्योहारी सीजन में आम जनता को और भी अधिक आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

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