प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 'प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद' (EAC-PM) के सदस्यों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितताओं के बीच देश की आर्थिक रफ्तार को और तेज करने के तरीकों पर विचार करना रहा। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, चर्चा के दौरान 'जीवन की सुगमता' और 'कारोबारी सुगमता' को और बेहतर बनाने से जुड़े विभिन्न सुधारों पर भी गहन विचार-विमर्श हुआ।
वैश्विक हालात के बीच अर्थव्यवस्था को मजबूती देने पर चर्चा
प्रधानमंत्री और सलाहकार परिषद के सदस्यों ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आर्थिक वृद्धि को सुदृढ़ बनाने के लिए कई विचारों और नीतिगत कदमों पर बातचीत की। सूत्रों ने बताया कि इस दौरान पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का भारत और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का भी आकलन किया गया। बैठक में परिषद के सदस्यों ने वर्तमान आर्थिक हालात और आगे आने वाली चुनौतियों को लेकर अपना विश्लेषण भी सामने रखा।
वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ी अर्थव्यवस्था
शुक्रवार को सामने आए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में देश की आर्थिक वृद्धि दर बढ़कर 7.7 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि 2024-25 में यह 7.1 प्रतिशत रही थी। वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में मजबूत घरेलू मांग और सरकारी खर्च के बल पर भारतीय अर्थव्यवस्था अनुमान से अधिक यानी 7.8 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ी। हालांकि इसी अवधि के अंत तक कच्चे तेल की चढ़ती कीमतों और आपूर्ति शृंखला में आई रुकावटों ने आर्थिक तस्वीर पर दबाव डालना शुरू कर दिया था।
वैश्विक उथल-पुथल से निपटने में पूरी तरह सक्षम है भारत
इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जीडीपी की 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर इस बात का प्रमाण है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद बेहद मजबूत है। उन्होंने यह भरोसा भी जताया कि देश अपने 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक प्रयासों के दम पर मौजूदा वैश्विक उथल-पुथल के बीच भी स्वयं को संभालने में पूरी तरह सक्षम है।
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