रक्षाबंधन का विशेष महत्व
रक्षाबंधन का त्यौहार भाई-बहन के आपसी प्रेम, भरोसे और एक-दूसरे की सुरक्षा के संकल्प का महापर्व है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र यानी राखी बांधकर ईश्वर से उनके उत्तम स्वास्थ्य, सफलता और खुशहाल जीवन की प्रार्थना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहन को जीवन भर हर मुश्किल घड़ी में सुरक्षा देने का वचन देते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि बहन राखी बांधते समय एक विशेष मंत्र का जाप करती है, तो इससे भाई की रक्षा का संकल्प और अधिक प्रभावशाली हो जाता है और यह भाई के लिए कल्याणकारी माना गया है।
साल 2026 में कब है रक्षाबंधन
हिंदू पंचांग के अनुसार रक्षाबंधन का पर्व प्रतिवर्ष सावन पूर्णिमा के शुभ अवसर पर मनाया जाता है। इस वर्ष 28 अगस्त 2026, शुक्रवार के दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधेंगी। यह दिन भाई-बहन के स्नेह को नई मजबूती देने वाला होता है, जहां भाई अपनी बहन के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण करते हुए हमेशा साथ खड़े रहने का वादा करते हैं।
राखी बांधने का पवित्र मंत्र
धार्मिक ग्रंथों में राखी बांधते समय उच्चारण करने के लिए एक विशेष मंत्र का उल्लेख मिलता है, जो इस प्रकार है:
येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
मंत्र का आध्यात्मिक भाव
इस मंत्र का गहरा आध्यात्मिक अर्थ है। इसमें महान दानवराज बलि के पराक्रम का वर्णन है। इस मंत्र का अर्थ यह है कि जिस पवित्र रक्षा सूत्र से महाबली राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा धागे से मैं तुम्हें बांध रही हूं। यह रक्षा कवच तुम्हारी सदैव रक्षा करेगा और तुम्हें अपने मार्ग से कभी विचलित नहीं होने देगा। मान्यता है कि विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ राखी बांधने से भाई के जीवन में समृद्धि बनी रहती है।
राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त
रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के लिए तीन विशेष शुभ मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं। पहला शुभ समय सुबह 5 बजकर 45 मिनट से 9 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इसके पश्चात दूसरा मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 40 मिनट से शुरू होकर शाम 4 बजकर 15 मिनट तक उपलब्ध होगा। अंत में, शाम का शुभ समय 6 बजकर 29 मिनट से रात 9 बजकर 12 मिनट तक रहेगा।
राखी बांधने की सही विधि
रक्षाबंधन के अवसर पर सबसे पहले घर में देवताओं की पूजा अर्चना करें। इसके बाद अपने भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करवाकर बैठाएं। भाई के माथे पर तिलक लगाएं और उन पर अक्षत यानी चावल डालें, तत्पश्चात उनकी आरती उतारें। अब शुभ मंत्र का उच्चारण करते हुए भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधें। रक्षासूत्र बांधने के बाद भाई को मिठाई खिलाएं और उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना करें। यदि आपने भाई के लिए कोई उपहार चुना है, तो इस समय उन्हें भेंट स्वरूप प्रदान करें।
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