झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान का निर्णायक मोड़
झारखंड में बीते लंबे समय से जारी नक्सल विरोधी अभियान अब अपने सबसे निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई और रणनीतिक दबाव के चलते राज्य में प्रतिबंधित नक्सली संगठनों का प्रभाव लगातार सिमटता जा रहा है। जंगलों में सक्रिय नक्सलियों की घटती संख्या ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा एजेंसियां अब इस समस्या को जड़ से खत्म करने के करीब हैं। हालांकि, जंगल के मोर्चे पर मिली कामयाबी के बाद अब पुलिस मुख्यालय का ध्यान जेलों में बंद उन कुख्यात नक्सलियों की ओर गया है, जो सलाखों के पीछे रहकर भी अपने पुराने संपर्कों के जरिए संगठन को ऑक्सीजन देने की कोशिश कर सकते हैं।
जेलों में बंद 1000 से ज्यादा उग्रवादियों पर पुलिस का शिकंजा
पुलिस मुख्यालय ने अपनी रणनीति में एक बड़ा बदलाव किया है। अब केवल जंगलों में छापेमारी ही नहीं, बल्कि राज्य भर की जेलों में बंद एक हजार से अधिक नक्सलियों और उग्रवादियों की गतिविधियों पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि संगठन की जमीनी ताकत बेशक कमजोर हुई है, लेकिन जेलों में बंद कई बड़े लीडर और कैडर अभी भी अपने पुराने नेटवर्क से संपर्क रखने में सक्षम हो सकते हैं। इसे देखते हुए पुलिस यह सुनिश्चित कर रही है कि जेल के अंदर से कोई भी आपराधिक साजिश या संगठन को पुनर्जीवित करने का प्रयास न किया जा सके। आईजी ऑपरेशन नरेंद्र कुमार सिंह के अनुसार, जेलों के भीतर विशेष निगरानी का उद्देश्य इन उग्रवादियों के बाहरी संपर्कों को पूरी तरह से काटना है, ताकि वे जेल के अंदर बैठकर किसी भी प्रकार की हिंसात्मक गतिविधियों का ताना-बाना न बुन सकें।
वांटेड नक्सलियों की संख्या घटकर हुई 17
हालिया पुलिस कार्रवाई में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलताएं हाथ लगी हैं। गुमला जिले में चलाए गए एक ऑपरेशन में पुलिस ने जेजेएमपी के पांच लाख रुपये के इनामी सब-जोनल कमांडर रामदेव लोहरा को गिरफ्तार किया। इस दौरान उनके साथ तीन अन्य उग्रवादियों को भी पकड़ा गया। डुमरी इलाके में हुई इस कार्रवाई में पुलिस ने AK-56, SLR, सेमी-ऑटोमैटिक राइफल, पिस्तौल और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए। इस सफलता के बाद आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अब पूरे झारखंड में वांटेड नक्सलियों की संख्या घटकर केवल 17 रह गई है। इनमें से 9 नक्सली सीधे तौर पर भाकपा माओवादी संगठन से जुड़े हुए हैं। बचे हुए इन वांटेड उग्रवादियों को पकड़ने के लिए झारखंड पुलिस के साथ केंद्रीय सुरक्षा बल भी मिलकर काम कर रहे हैं।
वर्ष 2026 में पुलिस की बड़ी कामयाबी
झारखंड पुलिस के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल नक्सल विरोधी अभियानों में अभूतपूर्व तेजी आई है। 1 जनवरी 2026 से 5 अगस्त 2026 तक के अवधि में कुल 103 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा 46 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुना है। वहीं, सुरक्षा बलों के साथ हुई विभिन्न मुठभेड़ों में 22 नक्सली मारे गए हैं। पुलिस ने इस दौरान भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया है, जिसमें 98 हथियार, 7,470 कारतूस और 11 किलोग्राम विस्फोटक शामिल हैं। इस साल की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी रही, जिसने संगठन को बैकफुट पर धकेलने का काम किया है।
रणनीति का नया हिस्सा: नेटवर्क पर चोट
पुलिस अब केवल कैदियों की गतिविधियों पर ही सीमित नहीं है, बल्कि उनके पुराने संपर्कों और उनके बाहरी नेटवर्क के पूरे जाल को खंगाल रही है। जेल के अंदर से सुरक्षा का मसला अब पुलिस की प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर है। यह स्पष्ट है कि झारखंड पुलिस अब नक्सलवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को एक ऐसे मुकाम पर ले आई है जहाँ जंगलों की सफाई के साथ-साथ जेलों के भीतर से चल रही साजिशों को रोकना भी उतना ही जरूरी है। आने वाले दिनों में जेलों के अंदर बंद इन कैदियों के संपर्कों को तोड़ने के लिए और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं, ताकि राज्य पूरी तरह से नक्सल मुक्त हो सके।
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