खाड़ी देशों में पाकिस्तानियों की साख पर लगा बड़ा दाग
पाकिस्तान के हुक्मरानों की अक्षमता और वहां की दयनीय स्थिति का खामियाजा अब देश के आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान की छवि लगातार गिरती जा रही है, जिसके चलते सऊदी अरब के बाद अब संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE में भी पाकिस्तानी पासपोर्ट धारकों को कड़वे अनुभवों का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तान की संसद में भी इस मुद्दे ने जोर पकड़ लिया है, जहां पूर्व नेशनल असेंबली अध्यक्ष और वरिष्ठ सांसद असद कैसर ने अपना अपमानजनक अनुभव साझा किया है।
UAE में असद कैसर के साथ हुआ बुरा बर्ताव
संसद में अपनी बात रखते हुए असद कैसर ने खुलासा किया कि जब वह UAE की यात्रा पर थे, तब उनकी फ्लाइट अचानक रद्द कर दी गई। इस दौरान जो कुछ भी हुआ, वह किसी भी देश के प्रतिनिधि के लिए बेहद शर्मिंदगी भरा था। उन्होंने बताया कि विमान सेवा रद्द होने के बाद जब वह और अन्य पाकिस्तानी यात्री होटल में ठहरने के लिए पहुंचे, तो वहां का रुख बहुत सख्त था। वहां साफ तौर पर घोषणा की गई कि केवल भारतीय और अमेरिकी पासपोर्ट धारकों को ही होटल में जगह मिलेगी। इसके उलट पाकिस्तानी पासपोर्ट धारकों को होटल में प्रवेश देने से सीधे मना कर दिया गया।
संसद में गूंजा अपमान का मुद्दा
इस घटना के बाद पाकिस्तानी संसद में भारी विरोध देखने को मिला। असद कैसर ने सदन को बताया कि उन्हें और उनके जैसे कई अन्य पाकिस्तानियों को जिस तरह से बाहर का रास्ता दिखाया गया, वह पाकिस्तान की कमजोर पड़ती अंतरराष्ट्रीय स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने विदेश मंत्रालय और विदेश मंत्री से इस विषय पर कड़ा रुख अपनाने और UAE प्रशासन के समक्ष कूटनीतिक विरोध दर्ज कराने की मांग की है। कैसर ने UAE को एक इस्लामिक मित्र देश बताते हुए कहा कि ऐसी स्थिति स्वीकार्य नहीं है, लेकिन उनके बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान की विदेश नीति अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कितनी असहाय हो चुकी है।
भारतीय पासपोर्ट की बढ़ती ताकत और सम्मान
यह घटना एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करती है। एक तरफ जहाँ भारतीय नागरिकों को दुनिया भर के देशों में उनकी ईमानदारी, कार्यकुशलता और मजबूत कूटनीतिक साख के कारण सिर-आंखों पर बिठाया जाता है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तानी नागरिकों को शक की निगाह से देखा जा रहा है। UAE के होटल और हवाई अड्डों पर भारतीय और अमेरिकी नागरिकों को दी गई प्राथमिकता यह साबित करती है कि वैश्विक पटल पर भारत का प्रभाव कितना बढ़ गया है। इसके विपरीत, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की खस्ताहाली और वहां से जुड़ी आपराधिक गतिविधियों ने पाकिस्तानी पासपोर्ट को दुनिया में सबसे कमजोर बना दिया है।
सऊदी अरब में भी हो चुकी है फजीहत
UAE की यह घटना कोई इकलौती नहीं है। इससे पहले सऊदी अरब ने भी पाकिस्तानियों के प्रति कठोर रवैया अपनाया था। कुछ समय पहले सऊदी सरकार ने भीख मांगने और चोरी जैसे अपराधों में संलिप्त हजारों पाकिस्तानियों को न केवल गिरफ्तार किया था, बल्कि उन्हें वापस उनके देश भी भेज दिया था। हालात इतने बिगड़ गए थे कि सऊदी अरब में उमरा और तीर्थयात्रा के लिए जाने वाले पाकिस्तानी नागरिकों की आड़ में भीख मांगने का धंधा फल-फूल रहा था। सऊदी प्रशासन द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान सरकार को अपने नागरिकों के लिए सार्वजनिक चेतावनी जारी करनी पड़ी थी कि वे विदेश जाकर देश की इज्जत को तार-तार न करें। इतना ही नहीं, खाड़ी देशों ने पाकिस्तानियों के लिए वीजा नियमों को भी काफी कठिन कर दिया है।
20 लाख पाकिस्तानी और फिर भी ये हालत
आंकड़ों पर गौर करें तो अकेले UAE में 20 लाख से अधिक पाकिस्तानी नागरिक रहते और काम करते हैं। ये लोग वहां की अर्थव्यवस्था के लिए विदेशी मुद्रा भेजने का बड़ा जरिया हैं। बावजूद इसके, संकट के समय में वहां के संस्थानों ने पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भरोसा करने से इनकार कर दिया। यह स्थिति दर्शाती है कि निजी संस्थानों और सरकारी स्तरों पर पाकिस्तान की साख कितनी तेजी से गिरी है। व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों की लंबी फेहरिस्त होने के बावजूद, आज पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग महसूस हो रहा है।
भविष्य को लेकर गहराया संकट
सऊदी अरब और UAE जैसे देशों द्वारा पाकिस्तानियों को दरकिनार करना यह बताता है कि पाकिस्तान की वर्तमान सरकारें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने नागरिकों को सुरक्षा और सम्मान दिलाने में विफल रही हैं। जिस तरह से विदेश मंत्रालय इस मामले पर प्रतिक्रिया देने में असमंजस में दिख रहा है, उससे स्पष्ट है कि पाकिस्तान के पास अब अपने नागरिकों की पैरवी करने के लिए कूटनीतिक ताकत नहीं बची है। यह स्थिति पाकिस्तान के लिए एक बड़ा सबक है कि उसकी जनता को वैश्विक स्तर पर किस तरह की अपमानजनक परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
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