UGC रेगुलेशन 2026 पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का बड़ा बयान, फिर से विचार करने की कही बात

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के विवादित इक्विटी रेगुलेशंस, 2026 को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बड़ा कदम उठाते हुए इन नियमों पर पुनर्विचार करने की जानकारी दी है।

सुप्रीम कोर्ट में यूजीसी के नियमों पर सरकार का रुख

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC द्वारा लाए गए इक्विटी रेगुलेशंस, 2026 को लेकर चल रहे विवाद के बीच गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इन नियमों को लेकर देश भर में भारी विरोध दर्ज किया गया था, जिसके बाद मामला शीर्ष अदालत तक पहुंचा। कोर्ट ने पहले ही इन नियमों पर रोक लगा दी थी। अब इस ताजा सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि वह इन विवादास्पद नियमों पर फिर से विचार करने की प्रक्रिया में है।

केंद्र सरकार ने कोर्ट को क्या बताया

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और UGC का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष अपना बयान रखा। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि वर्तमान में इन नियमों को लेकर पुनर्विचार किया जा रहा है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा, मैं अभी यह नहीं बता सकता कि अंतिम फैसला क्या होगा, लेकिन हम निश्चित रूप से इन नियमों पर फिर से विचार कर रहे हैं।

अदालत ने दिया जवाब दाखिल करने का समय

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में UGC को सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने आयोग को इन नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना औपचारिक जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ़्ते का समय दिया है। कोर्ट का यह भी निर्देश है कि UGC एक विस्तृत जवाबी हलफनामा तैयार करे, जिसमें याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए सभी मुख्य मुद्दों को शामिल किया जाए। अदालत ने साफ किया है कि इस हलफनामे की प्रतियां सभी याचिकाकर्ताओं को अनिवार्य रूप से दी जानी चाहिए। इसके बाद, याचिकाकर्ताओं को अपना जवाब या रीजॉइंडर दाखिल करने के लिए दो हफ़्ते का अतिरिक्त समय दिया गया है।

विवाद की असली वजह क्या है

यह पूरा कानूनी विवाद बीते जनवरी महीने में सामने आए UGC (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी नियम) रेगुलेशंस, 2026 से जुड़ा है। इन नियमों के खिलाफ दायर याचिकाओं में मुख्य आधार यह था कि इनमें जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा बेहद सीमित रखी गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस नए ढांचे से गैर-आरक्षित या सामान्य श्रेणी के छात्रों को संस्थागत पक्षपात और भेदभाव से सुरक्षा नहीं मिलती है। इसके अलावा, इन नियमों के संभावित दुरुपयोग और इनके दायरे को लेकर भी काफी चिंताएं जताई गई थीं। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश के तहत इन नियमों पर रोक जारी है।

https://www.indiatv.in/india/national/we-are-reconsidering-ugc-equity-regulations-said-government-in-supreme-court-know-details-2026-08-20-1238448