डोनाल्ड ट्रंप की सद्भावना का उत्तर कोरिया ने दिया मिसाइल वर्षा से जवाब, दागीं 10 बैलिस्टिक मिसाइलें

उत्तर कोरिया ने अमेरिका के साथ जारी तनाव के बीच समुद्र की ओर 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर अपनी नाराजगी जताई है। यह घटनाक्रम तब हुआ है जब अमेरिका ने उत्तर कोरिया के प्रति गुडविल दिखाते हुए अपने सैन्य अभ्यासों को सीमित करने का कदम उठाया था।

उत्तर कोरिया का आक्रामक शक्ति प्रदर्शन

उत्तर कोरिया ने एक बार फिर से अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए गुरुवार को समुद्र की ओर करीब 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। दक्षिण कोरिया की सेना द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इन मिसाइलों को राजधानी क्षेत्र से शाम के लगभग 5 बजे लॉन्च किया गया था। ये मिसाइलें अपनी दिशा तय करते हुए देश के पूर्वी समुद्री इलाके की ओर आगे बढ़ीं। दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अपनी निगरानी प्रणालियों को और अधिक सतर्क कर दिया है। वर्तमान में दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान आपस में लगातार संपर्क बनाए हुए हैं और इस मिसाइल परीक्षण से जुड़ी हर जानकारी को साझा कर रहे हैं ताकि क्षेत्र की सुरक्षा पर पैनी नजर रखी जा सके।

दक्षिण कोरिया में आपातकालीन सुरक्षा बैठक

मिसाइल परीक्षण की इस घटना के तुरंत बाद दक्षिण कोरिया ने अपनी राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की एक आपातकालीन बैठक बुलाई। बैठक के बाद जारी किए गए आधिकारिक बयान में उत्तर कोरिया से स्पष्ट शब्दों में अपील की गई कि वह इस तरह के बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षणों को तत्काल प्रभाव से बंद करे। दक्षिण कोरिया का स्पष्ट मानना है कि उत्तर कोरिया द्वारा किए जा रहे ये परीक्षण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों का सीधा उल्लंघन हैं और क्षेत्र में स्थिरता के लिए खतरा पैदा करते हैं। इससे पूर्व जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी अपने स्तर पर संदिग्ध मिसाइल लॉन्च की पुष्टि की थी। गौरतलब है कि यह घटनाक्रम उस समय हुआ है जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया अपने संयुक्त सैन्य अभ्यास उल्ची फ्रीडम शील्ड को सीमित करने की प्रक्रिया पर काम कर रहे हैं।

सैन्य अभ्यास में कटौती और डोनाल्ड ट्रंप का फैसला

बुधवार को दोनों देशों की सेनाओं ने साझा जानकारी में बताया था कि 11 दिन तक चलने वाले इस संयुक्त अभ्यास के दायरे को कम किया जा रहा है। यह अभ्यास सोमवार से ही शुरू हो गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस अभ्यास के आगाज से ठीक पहले उत्तर कोरिया के प्रति एक सकारात्मक संकेत यानी गुडविल दिखाते हुए पेंटागन को इसे काफी हद तक कम करने का निर्देश दिया था। डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले के पीछे मुख्य वजह उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ उनके बेहतर व्यक्तिगत संबंधों को माना जा रहा है। इसके अलावा, ट्रंप ने संकेत दिया था कि ईरान में चल रहे युद्ध के दौरान दक्षिण कोरिया द्वारा उनके समर्थन में खुलकर न आने की स्थिति का भी इस निर्णय में कुछ असर हो सकता है।

किम यो जोंग ने ट्रंप की पहल को नकारा

डोनाल्ड ट्रंप की इस सद्भावना की पहल का जवाब उत्तर कोरिया की ओर से किम जोंग उन की प्रभावशाली बहन किम यो जोंग ने दिया। उन्होंने ट्रंप के इस कदम को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह ऐसी बात है जिस पर कोई भी प्रतिक्रिया देना समय की बर्बादी है। किम यो जोंग का तर्क है कि सैन्य अभ्यास की समय सीमा और उसके स्वरूप में कटौती करने से उसकी आक्रामक और उकसावे वाली प्रकृति में कोई मूलभूत बदलाव नहीं आता है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि अमेरिका यह उम्मीद पाल रहा है कि इस तरह के कदमों को सद्भावना का नाम देकर वह उत्तर कोरिया से अपनी मर्जी का जवाब हासिल कर लेगा, तो यह उसकी बहुत बड़ी भूल है।

किम यो जोंग का नरम रुख और भविष्य की रणनीति

किम यो जोंग ने हालांकि इस साल अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच आयोजित अन्य सैन्य अभ्यासों की कड़ी आलोचना की और दक्षिण कोरिया की परमाणु शक्ति संचालित पनडुब्बियों को तैनात करने की योजना पर भी सवाल खड़े किए। दिलचस्प बात यह है कि इस बार किम यो जोंग ने अपनी भाषा में उस कठोरता का प्रयोग नहीं किया जो आमतौर पर उत्तर कोरियाई बयानों में देखी जाती है। उन्होंने दोहराया कि उनके भाई किम जोंग उन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच के निजी संबंध अभी भी बहुत अच्छे हैं। यह कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है कि उत्तर कोरिया फिलहाल किसी भी बातचीत की मेज पर लौटने से पहले अमेरिका की तरफ से किसी बड़े रियायती कदम का इंतजार कर रहा है।

बातचीत को लेकर ट्रंप का दावा और अनिश्चितता

किम यो जोंग ने उन दावों को भी बेबुनियाद बताया जिनमें कहा गया था कि किम जोंग उन ने वार्ता के लिए अमेरिका के अनुरोधों का जवाब दिया है। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि वह इस साल किम जोंग उन से मुलाकात करना चाहते हैं। हालांकि, जब उनसे पत्रों के आदान-प्रदान के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कोई सीधा जवाब न देकर केवल यही कहा कि उनके संबंध किम जोंग उन के साथ काफी अच्छे हैं। गुरुवार को हुई 10 मिसाइलों की लॉन्चिंग यह साबित करती है कि दोनों देशों के बीच का सैन्य तनाव अभी पूरी तरह से शांत नहीं हुआ है और स्थिति काफी जटिल बनी हुई है।

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